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उस बांसुरी वाले की नीले घोड़े वाले की लिरिक्स (Uss Bansuri Wale Ki Nile Ghode Wale Ki Lyrics in Hindi) - Radha Krishna Bhajan - Bhaktilok

183 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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उस बांसुरी वाले की नीले घोड़े वाले की लिरिक्स (Uss Bansuri Wale Ki Nile Ghode Wale Ki Lyrics in Hindi) - Radha Krishna Bhajan - Bhaktilok


उस बांसुरी वाले की नीले घोड़े वाले की लिरिक्स (Uss Bansuri Wale Ki Nile Ghode Wale Ki Lyrics in Hindi) - Radha Krishna Bhajan - 

 

उस बांसुरी वाले की नीले घोड़े वाले की लिरिक्स (Uss Bansuri Wale Ki Nile Ghode Wale Ki Lyrics in Hindi) - 


उस बाँसुरी वाले की लीले घोड़े वाले की
उस बांसुरी वाले की लीले घोड़े वाले की
गोदी में सो जाऊँ मेरा दिल करता है
श्याम के भजनों में खो जाऊं
देखी दुनियाँ दीवानी ये मतलब की मस्तानी
बिन मतलब रूख़ ना जोड़े यहाँ नित नित नयी कहानीं
किस किस को छोड़ू बाबा किस किस को अपनाऊँ
मेरा दिल करता है श्याम के भजनों में खो जाऊं
सुख दुःख पहलू ज़ीवन के बस वहम ही है ये मन के
कोई हस हस के सहता है कोई सहता है तन तन के
जीवन की पहेली उलझीं में कैसे सुलझाऊ
मेरा दिल करता है श्याम के भजनों में खो जाऊं
बंधन दुनिया के झूठें कोई माने कोई रूठे
"संजू" चाहे जग छूटें ये तार कभी ना टूटे
बस इतनी किरपा कर दे में तेरा हो जाऊ
मेरा दिल करता है श्याम के भजनो में खो जाऊ
उस बाँसुरी वाले की लीले घोड़े वाले की
गोदी में सो जाऊँ मेरा दिल करता है श्याम के भजनों में खो जाऊं

 




🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)

प्रस्तुत राधा-कृष्ण भजन "उस बांसुरी वाले की नीले घोड़े वाले की लिरिक्स (Uss Bansuri Wale Ki Nile Ghode Wale Ki Lyrics in Hindi) - Radha Krishna Bhajan - Bhaktilok" के माध्यम से भक्त और आराध्य के परम संबंध को दर्शाया गया है। वैष्णव संप्रदाय में राधा-कृष्ण का प्रेम लौकिक प्रेम न होकर जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। इस भजन की एक-एक पंक्ति का सार यही है कि भगवान श्री कृष्ण स्वयं राधा रानी के प्रेम के अधीन हैं। बिना राधा के न तो वे मुरली बजाते हैं और न ही गोपी-गोपियों को सुख देते हैं।

भजन के पदों में यह स्पष्ट होता है कि वृंदावन की कुंज गलियों में जब तक 'राधे-राधे' नाम की गूंज नहीं होती, तब तक भगवान श्यामसुंदर का मन भी वहां नहीं रमता। भक्त राधा जी से आग्रह करता है कि वे भी कृष्ण की इस भक्ति और दिव्यता का रहस्य उजागर करें, ताकि एक सामान्य साधक भी कृष्ण प्रेम का अधिकारी बन सके।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)

ब्रह्म पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार, भगवान कृष्ण की आराधना से पूर्व राधा जी का नाम स्मरण करना अनिवार्य माना गया है। राधा नाम की महिमा स्वयं कृष्ण गाते हैं। इस भजन को श्रद्धापूर्वक गाने या सुनने से साधक के हृदय में भक्ति रस का संचार होता है और मानसिक विकारों तथा चिंताओं का समूल नाश होता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। राधा-कृष्ण भजन के गायन से गृहक्लेश दूर होता है, दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और पारिवारिक वातावरण सात्विक बनता है। यदि इसका नियमित संकीर्तन किया जाए, तो साधक को मानसिक एकाग्रता और दिव्य शांति की अनुभूति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)

इस भजन के संकीर्तन के लिए सर्वोत्तम समय प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त) अथवा संध्या आरती के समय का है। गायन के समय दीप प्रज्वलित कर, तुलसी दल अर्पित करें और शुद्ध भाव से युगल सरकार (राधा-कृष्ण) की छवि का ध्यान करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन के मुख्य आराध्य देव कौन हैं?

इस भजन के मुख्य आराध्य देव युगल सरकार अर्थात भगवान श्री कृष्ण और श्री राधा रानी जी हैं।

राधा-कृष्ण भजन का पाठ किस दिन विशेष रूप से करना चाहिए?

यद्यपि भगवान के नाम संकीर्तन के लिए हर दिन शुभ है, किन्तु एकादशी, पूर्णिमा और शनिवार/रविवार के दिन इसका संकीर्तन विशेष फलदायी माना गया है।

क्या यह भजन पारिवारिक सुख-शांति के लिए सहायक है?

हाँ, राधा-कृष्ण के भक्तिमय भजनों को घर में नियमित रूप से गाने अथवा सुनने से दांपत्य प्रेम बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 13 Aug 2026

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