शिव एक है (Shiv Ek Hai Lyrics in Hindi) - MAHASHIVRATRI BHOLENATH BHAJAN | Shiv Ek Hai By Sunayana Thakur - Bhaktilok
Song: शिव एक है (Shiv Ek Hai Lyrics in Hindi)
Singer - Sunayana thakur
Lyrics- Gourav Pawar Bhawsar
Music - Ankit Sharma
Composer - ankit shrma
Dop- kesar studio and Suraj thakur
Edit by - colour motion films
Direction by - Divya badole (nirtyangan - creation-of - dance)
Backing Vocals - Ankit Sharma
Recorded &Mix Mastered @ Bhairavi Music production Manawar
Special Thanks - Mukhmantri Neeraj Niranjan
Category: Hindi Devotional (Lord Shiva Songs)
Producers: Amresh Bahadur, Ramit Mathur
Label: Yuki
शिव एक है (Shiv Ek Hai Lyrics in Hindi) :
शिव मुझमे है शिव तुम में है
शिव अनेक में शिव एक है
हर कण कण का मन है शिव से रौशन
बोल बम बम मिलेंगे शिव के दर्शन
बन जाऊं भस्म शिव मुझको ओढ़ ले
मिल जाए अगर शिव जीवन भी छोड़ दे
शिव राख में, शिव आग है
शिव अनेक में शिव एक है
शिव ही में धरती शिव ही में गगन समाये
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय
शिव ही दिन, शिव ही रात सजाये
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय
शिव ही से मुक्ति , शिव ही से जीवन पाए
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय
शिव ही गंगा, शिव ही प्यास जगाये
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय
शिव ही अमृत शिव ही विष पिलाये
शिव प्राण है, शिव काल है
ओमकार है, महाकाल है
शिव मुझ में है, श्वी तुम में है
शिव अनेक में, शिव एक है
🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
देवादिदेव महादेव को समर्पित यह भजन "शिव एक है (Shiv Ek Hai Lyrics in Hindi) - MAHASHIVRATRI BHOLENATH BHAJAN | Shiv Ek Hai By Sunayana Thakur - Bhaktilok" भगवान शिव के कल्याणकारी और वैराग्यपूर्ण रूप का सजीव चित्रण करता है। शिव का अर्थ ही कल्याण है। इस भजन के शब्दों के माध्यम से साधक शिव की अनंत चेतना, भस्म आरती, डमरू की ध्वनि और ध्यानमग्न मुद्रा का ध्यान करता है।
शिव भक्ति का मूल सिद्धांत यही है कि जगत की प्रत्येक नश्वर वस्तु का अंत शिव में ही होना है। यह भजन भक्त को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर आत्मा के वास्तविक स्वरूप को पहचानने की प्रेरणा देता है। शिव का नाम पंचमहाभूतों को नियंत्रित करने वाली परम शक्ति का प्रतीक है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव अत्यंत भोले हैं और साधारण जल तथा बेलपत्र अर्पण करने मात्र से भी प्रसन्न हो जाते हैं। इस शिव भजन का संकीर्तन करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और कुंडली के ग्रहों के दोष शांत होते हैं।
भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। नियमित शिव भजन और पंचाक्षरी मंत्र (ॐ नमः शिवाय) के जप से तनाव का नाश होता, अवसाद दूर होता है और अंतर्मन में अपूर्व शांति का उदय होता है। यह आरोग्य और दीर्घायु प्रदान करने में भी सहायक है।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
शिव संकीर्तन के लिए प्रदोष काल (संध्या समय) अथवा सोमवार का दिन सर्वोत्तम माना जाता है। उत्तर दिशा की ओर मुख करके कुशासन पर बैठकर शिवजी का ध्यान करते हुए भजन गाएं।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न करने की सरल विधि क्या है?
शुद्ध जल, बेलपत्र, धतूरा अर्पित करते हुए श्रद्धापूर्वक शिव मंत्र अथवा भजनों का संकीर्तन करने से महादेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
शिव भजनों के लिए कौन सा दिन विशेष है?
सोमवार, प्रदोष व्रत की तिथि और महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की उपासना और भजन संकीर्तन के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
क्या शिव जी की उपासना से कुंडली के दोष दूर होते हैं?
हाँ, भगवान शिव (महाकाल) की आराधना से कालसर्प दोष, राहु-केतु दोष और शनि जनित कष्टों का निवारण होता है।
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