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हम कब से पड़े हैं शरण तुम्हारी हम कोई गैर नहीं लिरिक्स (Hum Kab Se Pade Hai Sharan Lyrics in Hindi) - KANHA BHAJAN MAA KO NAMAN- Bhaktilok

51 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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कान्हा भजन: भक्ति की अमृतधारा

इस भजन के माध्यम से भक्तों का हृदय प्रभु की शरण में स्थित होता है।

हम कब से पड़े हैं शरण तुम्हारी हम कोई गैर नहीं हम कब से पड़े हैं शरण तुम्हारी हम कोई गैर नहीं हे कान्हा, हे कान्हा, तुमने किया है हमें प्यार, तुमसे ही है सारा संसार हम कब से पड़े हैं शरण तुम्हारी हम कोई गैर नहीं हे नाथ, तुम्हारे चरणों में सब कुछ है भला, तुमसे ही है जीवन सारा, तुमसे ही है सुख सारा हम कब से पड़े हैं शरण तुम्हारी हम कोई गैर नहीं जो तुम्हारी शरण में आए, उसका सब कुछ है सही, जो तुम्हारी भक्ति करे, उसे मिले भवसागर से मुक्ति हम कब से पड़े हैं शरण तुम्हारी हम कोई गैर नहीं हे राधे, तुम्हारा नाम लूं, तुम्हारी आरती गाऊं, तुम्हारे चरणों का वंदन, मन मंदिर में सजाऊं हम कब से पड़े हैं शरण तुम्हारी हम कोई गैर नहीं हे कान्हा, हमें अपने चरणों में सदा बसा लो, हमारे जीवन को प्रेम से भर दो, हमें सही मार्ग पर चलने का बल दो हम कब से पड़े हैं शरण तुम्हारी हम कोई गैर नहीं

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मूल विषय स्वयं को भगवान श्री कृष्ण की शरण में समर्पित करने का है। 'हम कब से पड़े हैं शरण तुम्हारी' की पंक्ति यह दर्शाती है कि भक्त भगवान के प्रति कितने समर्पित हैं और उन्हें अपनी सभी समस्याओं का समाधान केवल कृष्ण से प्राप्त होता है। हर एक भक्त की यह भावना होती है कि वे किसी भी संकट में स्वयं को प्रभु की शरण में रखते हैं। भगवती की शरण में जाने से संसार की सभी कठिनाइयों का समाधान मिल जाता है। आगे की पंक्तियों में यह समर्पण और भी गहराता है, जहाँ भक्त श्री कृष्ण को नाथ कहते हैं और उनकी महिमा का बखान करते हैं। लिए बिना अर्थ यह प्रकट होता है कि भगवान कृष्ण ही सभी भलाई का स्रोत हैं।

भजन की भावनात्मक गहराई भक्त के व्यक्तिगत संबंधों को आत्मसात करती है। 'जो तुम्हारी शरण में आए, उसका सब कुछ है सही' का अर्थ है कि जो व्यक्ति अपनी चिंता और भय को भगवान श्री कृष्ण के चरणों में डाल देता है, उसे सच्चाई, प्रेम और आशा का अनुभव होता है। यहाँ पर भक्त की मानसिक स्थिति का भी उल्लेख है, जहाँ वह राधे का नाम लेकर भक्ति की शक्ति को अनुभव करता है। राधे के नाम को लेने से भक्त की भक्ति दोगुनी हो जाती है और वे मन में सुख और शांति का अनुभव करते हैं। यह न केवल भक्ति की गहराई है, बल्कि भगवान से व्यक्तिगत संबंध की कठोरता को भी दर्शाता है।

भक्त का ध्यान केवल भगवान के स्थान पर नहीं, बल्कि उनके चरित्र और उनके गुणों पर भी है। 'हे कान्हा, हमें अपने चरणों में सदा बसा लो' में भक्त अपने समर्पण की गहराई को दिखाते हुए प्रार्थना कर रहे हैं कि प्रभु उनके जीवन में स्थायी रूप से निवास करें। यह एक उन्नत भावना है जो भक्ति मार्ग के गहन अनुभव की ओर इशारा करती है, जहाँ भक्त अपने स्वार्थ के परे जाकर केवल प्रभु की सेवा और भक्ति का आलिंगन करता है। इस लेख में दिखाए गए सभी तत्व निरंतरता के आधार पर भक्ति के लक्ष्य को स्पष्ट करते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन पौराणिक रूप से भगवान कृष्ण की महिमा का बखान करता है, जिसे विशेष रूप से भक्तिकाल में गाया गया। अनेक ग्रंथों में श्री कृष्ण को न केवल एक नायक के रूप में स्थान दिया गया है, बल्कि विभिन्न पौराणिक कथाएँ भी उनके विभिन्न रूपों और लीलाओं का वर्णन करती हैं। भक्ति के इस रूप में, शरणागति का अधिकारिक मार्ग दर्शाया गया है, जिसे भगवद गीता में भी विस्तृत किया गया है। यहाँ भक्तिभाव में प्रेम के विभिन्न स्वरूपों को समझाया गया है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित रूप से गायन करने से मानसिक शांति, संतोष और सकारात्मकता का अनुभव होता है। भक्तों का हृदय प्रेम से भर जाता है, जो नकारात्मकता को कम करता है। आध्यात्मिक दृष्टि से भजन के जाप से मानसिक स्पष्टता और आंतरिक शक्ति में बढ़ोतरी होती है। इसके साथ ही, यह मानसिक तनाव को कम कर सकता है और भक्त को भक्ति मार्ग की ओर प्रेरित कर सकता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का गायन सुबह की शुरुआत में या शाम के समय किया जा सकता है। पूजा के दौरान एक दीया जलाकर और श्रद्धा के साथ भगवान श्री कृष्ण को फूल अर्पित करना चाहिए। मन में श्रद्धा और भक्ति भाव से बैठकर इस भजन का जाप करना चाहिए ताकि ध्यान केंद्रित हो सके, और आत्मा में भक्ति का अनुभव हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश है कि भक्ति मार्ग पर चलकर, भक्ती में पूर्ण समर्पण से ही सभी संकटों से मुक्ति मिलती है।

इस भजन का कौन-सा भाग सबसे प्रमुख है?

इस भजन का सबसे प्रमुख भाग है 'हम कब से पड़े हैं शरण तुम्हारी', जो भक्त की सच्ची भक्ति और समर्पण को दर्शाता है।

क्या इस भजन का कोई विशेष लाभ है?

इस भजन का विशेष लाभ है मानसिक शांति, सकारात्मकता की वृद्धि और भक्त की भगवान श्री कृष्ण के प्रति आत्मिक जुड़ाव को बढ़ाना।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 18 Aug 2026

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