नमो नमो जी शंकरा भोलेनाथ शंकर (Namo Namo Shankara Lyrics in Hindi) - Kedarnath Sushant Rajput Sara Ali Khan Amit Trivedi Amitabh B - Bhaktilok
नमो नमो जी शंकरा भोलेनाथ शंकर (Namo Namo Shankara Lyrics in Hindi) -
जय हो जय हो शंकर(भोलेनाथ शंकर)आदि देव शंकर(हे शिवाय शंकरा)तेरे जाप के बिना(भोलेनाथ शंकर)चले ये सांस किस तरह(हे शिवाय शंकरा)मेरा कर्म तू ही जानेक्या बुरा है क्या भला...तेरे रास्ते पे मैं तोआंख चांद के चला...तेरे नाम की जोत नेसारा हर लिया तामस मेरा(तमस: अंधेरा)नमो नमो जी शंकराभोलेनाथ शंकरहे त्रिलोकनाथ शंभुहे शिवाय शंकरानमो नमो जी शंकराभोलेनाथ शंकररुद्रदेव हे महेश्वरःसृष्टि के जन्म से भी(ओ ओ…)पहले तेरा वास था(ओ ओ…)ये जग रहे या ना रहे(ओ ओ…)रहेगी तेरी आस्था(ओ ओ…)क्या समय... क्या प्रलयदोनो में तेरी महंतमहंता... महंता...सीपियों की ओट मैं(भोलेनाथ शंकर)मोतियां हो जिस तरह(हे शिवाय शंकरा)मेरे मन में शंकर(भोलेनाथ शंकर)तू बसा है उस तरह(हे शिवाय शंकरा)मुझे भरम था जो है मेराथा नहीं कभी मेरा...अर्थ क्या निरार्थ क्याजो भी है सभी तेरा...तेरे सामने है झुकामेरे सर पर हाथ रख तेरानमो नमो जी शंकराभोलेनाथ शंकरहे त्रिलोकनाथ शंभुहे शिवाय शंकरानमो नमो जी शंकराभोलेनाथ शंकररुद्रदेव हे महेश्वरचंद्रमा ललित पे (ओ ओ…)भस्म है भुजाओं में (ओ ओ…)वस्त्र बाग चाल का (ओ ओ...)है खड़ाउ पांव में (ओ ओ...)प्यास क्या हो तुझेगंगा है तेरी जटाओं मेंजटाओं में… जटाओं में…'दूसरों के बर्बाद'(भोलेनाथ शंकर)तू सदाव है जिया(हे शिवाय शंकरा)मांगा कुछ कभी नहीं(भोलेनाथ शंकर)तूने सिर्फ है दिया(हे शिवाय शंकरा)समुद्र मंथन का था समय जो आ पड़ाद्वंद्व दोनो लोक में विष-अमृत पे था छिदाअमृत सभी मैं बंट केप्याला विष का तूने खुद पियानमो नमो जी शंकराभोलेनाथ शंकरहे त्रिलोकनाथ शंभुहे शिवाय शंकरानमो नमो जी शंकराभोलेनाथ शंकररुद्रदेव हे महेश्वररुद्रदेव हे महेश्वररुद्रदेव हे महेश्वर
🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
देवादिदेव महादेव को समर्पित यह भजन "नमो नमो जी शंकरा भोलेनाथ शंकर (Namo Namo Shankara Lyrics in Hindi) - Kedarnath Sushant Rajput Sara Ali Khan Amit Trivedi Amitabh B - Bhaktilok" भगवान शिव के कल्याणकारी और वैराग्यपूर्ण रूप का सजीव चित्रण करता है। शिव का अर्थ ही कल्याण है। इस भजन के शब्दों के माध्यम से साधक शिव की अनंत चेतना, भस्म आरती, डमरू की ध्वनि और ध्यानमग्न मुद्रा का ध्यान करता है।
शिव भक्ति का मूल सिद्धांत यही है कि जगत की प्रत्येक नश्वर वस्तु का अंत शिव में ही होना है। यह भजन भक्त को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर आत्मा के वास्तविक स्वरूप को पहचानने की प्रेरणा देता है। शिव का नाम पंचमहाभूतों को नियंत्रित करने वाली परम शक्ति का प्रतीक है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव अत्यंत भोले हैं और साधारण जल तथा बेलपत्र अर्पण करने मात्र से भी प्रसन्न हो जाते हैं। इस शिव भजन का संकीर्तन करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और कुंडली के ग्रहों के दोष शांत होते हैं।
भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। नियमित शिव भजन और पंचाक्षरी मंत्र (ॐ नमः शिवाय) के जप से तनाव का नाश होता, अवसाद दूर होता है और अंतर्मन में अपूर्व शांति का उदय होता है। यह आरोग्य और दीर्घायु प्रदान करने में भी सहायक है।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
शिव संकीर्तन के लिए प्रदोष काल (संध्या समय) अथवा सोमवार का दिन सर्वोत्तम माना जाता है। उत्तर दिशा की ओर मुख करके कुशासन पर बैठकर शिवजी का ध्यान करते हुए भजन गाएं।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न करने की सरल विधि क्या है?
शुद्ध जल, बेलपत्र, धतूरा अर्पित करते हुए श्रद्धापूर्वक शिव मंत्र अथवा भजनों का संकीर्तन करने से महादेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
शिव भजनों के लिए कौन सा दिन विशेष है?
सोमवार, प्रदोष व्रत की तिथि और महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की उपासना और भजन संकीर्तन के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
क्या शिव जी की उपासना से कुंडली के दोष दूर होते हैं?
हाँ, भगवान शिव (महाकाल) की आराधना से कालसर्प दोष, राहु-केतु दोष और शनि जनित कष्टों का निवारण होता है।
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