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bholenath bhajan lyrics

ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने (Esa damru bajaya bholenath ne Lyrics in Hindi) - Hansraj Raghuwanshi Bholenath Bhajan - Bhaktilok

52 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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भोलेनाथ का भक्ति रस: ऐसा डमरू बजाया

इस भजन में भोलेनाथ की आराधना का गहरा भाव छिपा है, जो भक्तों को प्रेम और भक्ति के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है।

ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने, कौड़ी मिला अशुतोष ने। भभूति से घायल हुआ, प्रेम चढ़ाना इष्ट देव को। ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने। गौरवति गोद में धारण की, भक्ति की अन्यतम को। ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने। हिमालय से गंगा बहाई, धरती पर प्रेम गुनगुनाया। ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने। गोपियाँ देखती जनसेवा, कृष्ण जी की लीला सुनती। ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने। नंदनंदन का वास किया, सुनकर हंसते जन सब। ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में 'ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने' एक महत्वपूर्ण धुन की तरह गूंजता है, जिसे भगवान भोलेनाथ के द्वारा बजाए जाने का विषय बनाया गया है। डमरू, जो शिव का प्रतीक है, व्यक्ति के मन के भीतर शांति, संतुलन और सृष्‍टि की सृष्टि का संकेत है। डमरू की आवाज पर विश्व का निर्माण और संहार निर्भर करता है। यहाँ, भजन में खासतौर पर यह कहा गया है कि इस डमरू की धुन के स्वर में प्रेम और भक्ति की गहराइयाँ हैं, जिसे समझने का प्रयास किया जा रहा है। हर बार जब ये धुन बजती है, भक्तों को एक नई ऊर्जा मिलती है, और वे अपने ईष्ट को अजन्मा और अनंत मानते हैं।

इस भजन के भावार्थ में एक गहरी भावनात्मकता समाहित है। जब हम सुनते हैं 'ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने', उस समय एक अनजानी सी आह्वान महसूस होती है जो हमारे अंदर गहराई से बसता है। यह धुन हमें याद दिलाती है कि कैसे शिव जी का प्रेम सदैव हमारे साथ है। यह प्रेम सिर्फ भौतिक स्तर पर नहीं, अपितु आध्यात्मिक स्तर पर भी हमें ताकत और मार्गदर्शन देता है। यहाँ तक कि जब हम इस प्रेम को अपने अंश के रूप में स्वीकार करते हैं, तब संपूर्ण जीवन में सकारात्मक बदलाव अनुभव करते हैं।

इस भजन की आध्यात्मिक गहराइयों में भक्ति मार्ग की परिभाषा भी निहित है। भक्ति मार्ग का अर्थ है सर्वे भवंतु सुखिनः, जहां शिव जी केवल देवता नहीं, बल्कि हमारे मार्गदर्शक बन जाते हैं। उनका डमरू बजाने का अर्थ जीवन की धुन में हमें जोड़ना है, जिससे हम अपने भीतर की दिव्यता को पहचानें। यह भक्ति का मार्ग जीवन के सभी पहलुओं को संजोता है और हमें सिखाने का प्रयास करता है कि निरंतरता में रहना और प्रेम में प्रवाहित होना ही सच्ची भक्ति है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन हिंदू पौराणिक संदर्भों में गहराई से जुड़ा हुआ है। शिव जी को सृष्टि और संहार के देवता के रूप में माना जाता है, और उनके डमरू का ध्वनि पूरी सृष्टि के लिए जीवनदायिनी है। पुराणों में उल्लेख है कि शिव जी के डमरू से उत्पन्न ध्वनि से संसार की रचना होती है। इसलिए, इस भजन के माध्यम से शिव भक्ति और उनके प्रति श्रद्धा का गहन अर्थ समझा जा सकता है। यह भक्ति शिव के विमर्शों के अनुरूप उन्हें एक अद्वितीय स्थान दिलाती है।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। इस भजन का नियमित पाठ करने से मानसिक शांति, सकारात्मकता और भक्ति का अनुभव होता है। यह आध्यात्मिक स्तर पर व्यक्ति को जागरूक बनाता है और अपने प्रति आत्मीयता की भावना जागृत करता है। मानसिक तनाव से मुक्ति, जीवन में उत्साह का संचार और शिव की कृपा का अनुभव इसके प्रमुख लाभ हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह के वक्त करना विशेष शुभ होता है। ध्यान में पूर्वमुखी होकर बैठें और एक दीया जलाएं। दीपक की रोशनी में, मन और आत्मा को शांत कर इस भजन को श्रद्धापूर्वक गाएं। इस समय सकारात्मक मनोबल बनाए रखना और भगवान शिव से भक्ति की भावना के साथ जुड़ना अति महत्वपूर्ण है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या 'ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने' भजन का कोई विशेष समय है?

इस भजन का जप सुबह के समय करना अत्यंत फायदेमंद होता है, जब मन शांत और प्रफुल्लित होता है। इससे आत्मिक उन्नति की संभावना बढ़ जाती है।

इस भजन का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव है?

इस भजन का सुनना और गाना शारीरिक ऊर्जा बढ़ाने, मानसिक तनाव को दूर करने और ध्यान की स्थिति में जाने में मदद करता है। यह भक्तों को आंतरिक शांति और संतुलन प्रदान करता है।

क्या इस भजन को सुनने से शिव जी की कृपा मिलती है?

हाँ, प्रभु शिव की भक्ति में सच्चाई और दृढ़ता से इस भजन का जप करने से उन्होंने अपने भक्तों पर कृपा दृष्टि अवश्य डालते हैं। इससे भक्तों का जीवन सुखमय बनता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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