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रोम रोम में राम समाये भजन लिरिक्स (Rom rom me ram samaye Lyrics in Hindi) - Ram Bhajan Surajit Nandi - Bhaktilok

90 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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रोम रोम में राम: भाग्य का उन्नयन

राम के स्मरण से जीवन में सुख और शांति आएगी, भक्ति से हर दुख का नाश होगा।

रोम रोम में राम समाये। निशदिन ध्यान तिनका लगाये। छाया पाया सदा सुख जानी। राम बिना संसार अधूरी। जितने भी पाप सब हैं मिटाए। सच्चिदानंद सुख सबको पाए। राम जी की भक्ति जो गाए। संसार सागर यस पार गाए। हरजना राम अपना बनाया। नित निरंतर उनका गुन गाए। बीते दिन सुख के भाग्य लाए। राम नाम सुख सबको भाए। हरि भक्तों के भव से निस्कूट। दुख में भइ ज्ञान का गहना। जिन्हें राम छवि की सदा प्रिय। उनका सुख हर नाकाम हमें हैं। प्रभु चरण रज सुख की विद्या। जो तजें राम ने वास किया। सब भक्ति सुख की सहज सुनें। राम से प्रीति वही सुखी देश।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय राम का ध्यान करना है। 'रोम रोम में राम समाये' का अर्थ है कि भगवान राम हर अंग में, हर फेफड़े में, हर नस में स्थित हैं। यह भजन हमें सिखाता है कि जब हम श्रद्धा और भक्ति से राम का ध्यान करते हैं, तब हम अपने भीतर से विपत्तियों का नाश कर सकते हैं। 'राम बिना संसार अधूरी' इस पंक्ति में यह स्पष्ट किया गया है कि जब तक हम राम के नाम को जीवन में नहीं अपनाते, तब तक हमारा संसार अधूरा ही रहेगा। राम का नाम हमें वो शक्ति प्रदान करता है, जिससे हर प्रकार के पाप मिटाए जा सकते हैं।

भजन में भावार्थ यह है कि जब भक्त राम नाम का जाप करते हैं, तो वो अपने जीवन की 모든 कठिनाइयों को पार कर सकते हैं। 'जितने भी पाप सब हैं मिटाए' इस पंक्ति के द्वारा यह बताया गया है कि राम नाम का जाप निश्चित रूप से हमारे पापों का नाश करता है, और संसार के दुःख दर्द से मुक्ति दिलाता है। भक्त अपने जीवन में आनंद और सच्चिदानंद की अनुभूति पाते हैं। 'संसार सागर यस पार गाए' कहने का तात्पर्य यह है कि राम भक्ति हमारी नैया को भक्ति के समुद्र पार पहुंचाने का कार्य करती है।

भक्ति मार्ग का यह एक गहरा दार्शनिक अर्थ है। इससे यह पता चलता है कि प्रेम और भक्ति ही सच्चे ज्ञान का स्रोत हैं। जब हम अपने मन को राम में लगाते हैं, तो हमारा मन शांति और स्थिरता को अनुभव करने लगता है। 'राम जी की भक्ति जो गाए' से यह स्पष्ट होता है कि यह भक्ति केवल समीप जाकर शारीरिक पूजा नहीं है, बल्कि यह मन, वचन और विचार से भगवान राम के प्रति समर्पण का प्रतीक भी है। भक्ति के इस मार्ग पर चलकर हम अपने जीवन के सुख और शांति प्राप्त कर सकते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

रामायण, जो कि भारत के सबसे प्रसिद्ध प्राचीन ग्रंथों में से एक है, भगवान राम के जीवन और शिक्षाओं पर आधारित है। इस भजन का संदर्भ हमें यह बताता है कि भक्ति का मार्ग शिक्षा, प्रेम और समर्पण का है। रामayana में राम के चरित्र से प्रेरणा लेकर भक्तों को यह ज्ञात होता है कि केवल राम का नाम लेने से ही जीवन में कठिनाइयाँ स्वतः समाप्त होती हैं। राम के प्रति भक्ति से ना केवल व्यक्तिगत समस्याएँ हल होती हैं, बल्कि समाज में भी शांति और प्रेम का दीप जलता है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, आत्मिक संतोष और सकारात्मकता में वृद्धि होती है। भक्ति में डूबकर व्यक्ति अपने जीवन के तनाव और चिंताओं को भुलाकर एक नई ऊर्जा प्राप्त करता है। यह ध्यान और साधना से जुड़ी प्रक्रियाओं के लिए विशेष रूप से लाभदायक है, और मन को सुकून प्रदान करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह-सुबह या संध्या समय करना उत्तम है। भक्त को एक शुद्ध मन और पवित्र स्थान पर बैठकर आरती और दीप जलाना चाहिए। ध्यान लगाते समय ध्यान केंद्रित करना और राम के गुणों का स्मरण करना चाहिए। भक्त को श्रद्धा-पूर्वक अपने हृदय में राम की छवि को देखना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

रोम रोम में राम समाए भजन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस भजन का मुख्य उद्देश्य यह है कि भक्त अपने हृदय में भगवान राम को धारण कर सकें, जिससे जीवन के दुखों का समाधान हो सके और भक्त को शांति और सच्चिदानंद की प्राप्ति हो सके।

इस भजन का प्रभाव कैसे होता है?

यह भजन राम नाम की महिमा का गायक है। जब भक्त सच्चे मन से इसका गायन करते हैं, तो उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और आंतरिक शांति की धारा प्रवाहित होती है।

क्या इस भजन के जप से कोई विशेष लाभ मिलते हैं?

हां, इस भजन का नियमित जप मानसिक तनाव को कम करता है, मन को एकाग्र करता है और सुख-शांति के अनुभव को बढ़ाता है। इसे करने से भक्त की भक्ति में भी वृद्धि होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 18 Aug 2026

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