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श्री गणेश का नाम पूरे हो जायेंगे सब तेरे बिगड़े काम (Shri Ganesh Ka Naam pure ho jayege sab tere bigde kaam Lyrics in Hindi) - C. Laxmichand Ganesh Bhajan - Bhaktilok

64 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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गणेश नाम: संजीवनी सब कार्यों की

श्री गणेश का नाम जपने से हर बाधा दूर होती है, यह भजन आपके मन को शांति प्रदान करेगा।

श्री गणेश का नाम पूरे हो जायेंगे सब तेरे बिगड़े काम। जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देव। जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देव। सेतु बंधन मुरलीधर, सर्बति मंत्र, स्वामी महादेव। सुख, शांति, धन, वैभव, जब आएगा तेरा नाम। जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देव। जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देव। धूम्रवर्ण भगवान का, हर दुख दूर करे। शरण में तेरे आए, सभी बिगड़े काम करे। जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देव। जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देव। श्री गणेश का नाम पूरे हो जायेंगे सब तेरे बिगड़े काम।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय भगवान गणेश का नाम जपने की महिमा को उद्घाटित करना है। प्रारंभ में, भक्त गणेश जी का स्मरण करते हैं, जिनके नाम के जप से 'बिगड़े काम' बनने का मार्ग प्रशस्त होता है। भक्त की भावनाएँ साफ़ हैं कि गणेश जी के नाम से सभी अड़चनें दूर होती हैं। 'जय गणेश देव' का उच्चारण करते समय, भक्त अपने अंदर आस्था और विश्वास की एक गहरी भावना को जगाते हैं। यह सोचना कि 'जब आएगा तेरा नाम' समस्या समाधान की दिशा में एक नये जीवन का संचार करता है। यह दर्शाता है कि हर कार्य संपूर्ण रूप से गणेश नाम से पूर्ण होता है।

भजन की भावार्थ अनेक गहराइयों से जुड़ा है। 'सेतु बंधन मुरलीधर, सर्बति मंत्र' जैसी पंक्तियाँ हमें दिखाती हैं कि गणेश जी केवल विघ्नहर्ता नहीं बल्कि कष्ट-साधनकर्ता भी हैं। उनके नाम में ऐसा शक्ति है कि भक्ति भाव से उच्चारित करने पर वे भक्त के कार्यों में स्थिरता और पूर्णता लाते हैं। 'धूम्रवर्ण भगवान' का उल्लेख हमें उन सभी कष्टों से निकालने की एक आशा देता है जो जीवन में कठिनाई पैदा करते हैं। यह भजन मन और आत्मा को संतोष और सुकून प्रदान करता है।

गणेश भक्ति मार्ग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह भजन उस धार्मिक ज्ञान को दर्शाता है जो हमें बताता है कि जीवन में पहला और मुख्य कार्य विनायक की पूजा है। गणेश जी को पहले पूजने से न केवल हमारा काम सफ़ल होता है बल्कि आत्मा का विकास भी होता है। पौराणिक काव्यों में गणेश जी को बुद्धि, समृद्धि और सफलता का देवता मानकर पूजा जाता है। इस भजन की पंक्तियाँ उस संकल्प को जस की तस आगे बढ़ाती हैं, जिसने भक्त को ये विश्वास दिलाया है कि उनके नाम से शक्ति प्राप्त होती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्त्व धार्मिक और पौराणिक संदर्भ में गहरा है। गणेश जी का वर्णन विभिन्न पुराणों में मिलता है, जहाँ उन्हें सभी विघ्नों का नाशक कहा गया है। उनके नाम का जप करने से कार्यों में सफलताओं की प्राप्ति होती है। गणेश जी को बुद्धि और समृद्धि का देवता माना जाता है, अतः उनका स्मरण करना समस्त कार्यों की सिद्धि के लिए आवश्यक है। यह भजन विशेषकर गणेश चतुर्थी जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर गाया जाता है, जो भक्तों में विश्वास और केंद्रितता का संचार करता है।

प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के जन्म और उनकी कथाओं का संपूर्ण विवरण जानने के लिए ब्रह्म पुराण गणेश महिमा का पाठ करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक स्थिरता, संतोष, और आत्मविश्वास बढ़ता है। साथ ही, यह जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने में सहायक है। नियमित रूप से इस भजन का श्रवण करना या इसका जप करना धन, सुख, और शांति की प्राप्ति में सहायक देखा गया है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का उच्चारण सुबह के समय या संध्या में करना उत्तम होता है, जब मन शुद्ध और एकाग्र होता है। भक्त को दो दीये जलाने चाहिए और गणेश जी के समक्ष फूल, फल और मिष्ठान अर्पित करना चाहिए। सही मुद्रा में बैठकर, मन में उच्च भाव रखते हुए, भगवान गणेश का ध्यान करते हुए इस भजन का जाप करना फलदायी होता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

श्री गणेश का नाम जपने से क्या लाभ होता है?

श्री गणेश का नाम जपने से सभी विघ्न दूर होते हैं, मानसिक शांति मिलती है, और कार्यों में सफलताएँ प्राप्त होती हैं। यह भक्ति अन्य देवताओं के प्रति समर्पण की भावना को भी बढ़ाती है।

क्या इस भजन का कोई विशेष समय है?

इस भजन का जाप सुबह या संध्या में करना श्रेष्ठ है। विद्यमान एकाग्रता और शांति से मन में संकल्प लेकर इसकी पूजा की जानी चाहिए।

गणेश जी की पूजा में क्या चीजें अर्पित करनी चाहिए?

गणेश जी की पूजा में फल, फूल, मिठाई, और दीपक अर्पित करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। विशेषकर मोदक और दूर्वा का अर्पण अत्यंत प्रिय होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 21 Aug 2026

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