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Hanuman Bhajan

हनुमान लंका जला के चला है भजन लिरिक्स (Hanuman Lanka Jala ke Chala Hai Lyrics in Hindi) - Hanuman Bhajan Chanchal Prajapati - Bhaktilok

64 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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हनुमान की कृपा: लंका दहन की महत्ता

हनुमान जी की भक्ति में समर्पित यह भजन रावण से विजय और आत्मसुधार का संदेश देता है।

हनुमान लंका जला के चला है अरे लंका वालो दशानन से कहदो के हनुमान लंका जला के चला है चुराते हो सीता मैया को छल से समझ लोबुराई अपनी बाला है अरे लंका वालो दशानन से कहदो के हनुमान लंका जला के चला है उजाड़े है मैंने ये बाग़ सारे संभल जाओ वरना जाओगे मारे गदा से गिराये दानव हजारो राम भक्त ऐलान करके चला है अरे लंका वालो दशानन से कहदो के हनुमान लंका जला के चला है अहंकार छोडो ना जीवन गवाओ यु बेवक्त अपनी मौत ना बुलाओ करेगा तुम्हे भी बरबाद रावण वो बरबाद तुमको करने चला है अरे लंका वालो दशानन से कहदो के हनुमान लंका जला के चला है

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में हनुमान जी की अद्वितीय शक्ति और उनकी कार्यकुशलता का वर्णन किया गया है। 'लंका जला के चला है' वाक्यांश में यह संकेत दिया गया है कि हनुमान जी ने लंका, जो रावण का निवास स्थान है, को नष्ट कर दिया। यह सिर्फ एक भौतिक विनाश नहीं है, बल्कि यह रावण के अहंकार और अन्याय के प्रतीक का भी दहन है। भजन में रावण के पापों को उजागर करते हुए, सीता माता को छीनने के उसके छल के खिलाफ चेतावनी दी गई है। साथ ही, यह भी कहा गया है कि अहंकार छोड़कर इंसान को सच्चे मार्ग पर चलना चाहिए। यह संदेश भक्ति की शक्ति और भक्तों की सामर्थ्य को दर्शाता है।

इमोशनल और आध्यात्मिक दृष्टिकोन से यह भजन उन भक्तों को प्रोत्साहित करता है जो बुराइयों और बाधाओं का सामना कर रहे हैं। यह दर्शाता है कि जैसे हनुमान जी ने रावण का नाश किया, वैसे ही हर भक्त अगर सच्चे मन से भक्ति करें तो अपनी जीवन की समस्याओं का समाधान पा सकता है। गीत में 'संभल जाओ वरना जाओगे मारे' की चेतावनी एक गहरी मानसिकता को दर्शाती है कि बुराई का अंजाम हमेशा बुरा होता है। यह दिल से सच्चा होने और नैतिकता का पालन करने का संदेश देता है।

आध्यात्मिक संदर्भ में, यह भजन भक्त मार्ग (भक्ति मार्ग) का अनुगमन करता है, जिसमें भक्ति, श्रद्धा, और शक्ति का समावेश होता है। हनुमान जी न केवल सहायिका हैं, बल्कि वे भक्तों के हृदय में असीम साहस और प्रेरणा का संचार करते हैं। भजन में निहित संदेश हमें बताता है कि हर भक्त में हिम्मत और आस्था होती है, जो उन्हें विपत्ति से निकाल सकती है। हनुमान जी की भक्ति से भक्त आध्यात्मिक उन्नति के पथ पर अग्रसर होते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन धार्मिक और पौराणिक संदर्भों में बहुत महत्वपूर्ण है, विशेषकर रामायण में हनुमान के चरित्र के संदर्भ में। रामायण में हनुमान जी की निष्ठा और बलिदान का जिक्र है, जो उन्हें परम भक्त बनाता है। इस भजन के माध्यम से, भक्त हनुमान जी की महिमा का बखान करते हैं और अपने जीवन में उनके गुणों को अपनाने का प्रयास करते हैं। हनुमान चालीसा, रामायण और विभिन्न पुराणों में उनकी वीरता, प्रतिभा और भक्ति की कथाएँ प्रचलित हैं, जो इस भजन को एक पवित्रता प्रदान करती हैं।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान जी का यह भजन मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक लाभ प्रदान करता है। मानसिक शांति के लिए, इसे नियमित रूप से गाने से आंतरिक संतुलन और शक्ति मिलती है। संतोष और धैर्य की भावना उत्पन्न होती है, जिससे व्यक्ति जीवन की चुनौतीओं का सामना आसानी से कर पाता है। इससे भक्त के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो स्वास्थ्य और कल्याण में सहायक होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का उच्चारण सुबह के समय, सूर्योदय के बाद या शाम के समय, सूर्यास्त के बाद किया जाए तो अत्यधिक लाभकारी होता है। भक्ति में ध्यान लगाने के लिए कमरे में एक दीया जलाकर, फूल चढ़ाकर और स्वच्छ मन से बैठकर भजन सुनना या गाना चाहिए। आदर्श मुद्रा में ध्यान केंद्रित करते हुए मन के शांति और लगाव के साथ गाना जरूरी है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

हनुमान लंका जला के चला है भजन का अर्थ क्या है?

इस भजन में हनुमान जी का लंका को जलाने का किरदार दर्शाया गया है, जो रावण के अहंकार का प्रतीक है। यह अधर्म के खिलाफ सत्य और न्याय की विजय का संदेश देता है।

क्या यह भजन मानसिक शांति के लिए लाभकारी है?

हाँ, यह भजन मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि करता है। नियमित रूप से इसे गाने से आंतरिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है।

इस भजन को गाने का उचित समय क्या है?

सुबह के समय या शाम को गाने से यह अधिक प्रभावी होता है, जब मन शांति और ध्यान की स्थिति में होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Aug 2026

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