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Hanuman Bhajan

मेरी सुन लो मारुति नंदन लिरिक्स (MERI SUN LO MARUTI NANDAN Lyrics in Hindi) - HANUMAN BHAJAN Suresh Badekar - Bhaktilok

77 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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हनुमान भक्ति के लिए प्रेरणादायक भजन

हनुमान जी की कृपा पाने के लिए यह भजन समर्पित है, जो भक्तों के दुःख हरता है।

मेरी सुन लो मारुति नंदन काटो मेरे दुःख के बंधन हे महाबीर बजरंगी तुम्हे कहते है दुःख भंजन । मुझ पर भी करुणा करना मैं आया शरण तिहारी मैं जोड़े हाँथ खड़ा हूँ तेरे दर का बना भिखारी । तुम सबसे बड़े भंडारी मैं पानी तुम हो चन्दन हे महाबीर बजरंगी तुम्हे कहते है दुःख भंजन । तेरा नाम बड़ा दुनिया में सब तेरा ही गुण गए इस जग के सब नर नारी चरणों में शीश नवाये । करो भाव से पार मुझे भी हे बाबा संकट मोचन हे महाबीर बजरंगी तुम्हे कहते है दुःख भंजन ॥ मैंने तेरी आश लगायी बाबा हनुमान गोसाई जब भीड़ पड़ी भक्तो पे तूने ही करी सहाई । भक्तो ने करी दुहाई प्रभु दीजो मोहे दर्शन हे महाबीर बजरंगी तुम्हे कहते है दुःख भंजन ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

भजन की मुख्य थीम हनुमान जी की महानता और उनके प्रति भक्तों की भक्ति है। 'मेरी सुन लो मारुति नंदन' में भक्त हनुमान जी को 'महाबीर' और 'बजरंगी' का नाम देकर उनकी शक्तियों का गुणगान करता है। इसमें कहा गया है कि हनुमान जी संकटों को हरते हैं और भक्तों के दु:खों को दूर करते हैं। भक्त हनुमान जी से करुणा के लिए प्रार्थना करते हैं और अपनी आशा को उन पर लगाते हैं। भजन के बोल यह दर्शाते हैं कि भक्त न केवल हनुमान जी के प्रति नतमस्तक हैं बल्कि उनके चरणों में अपने आप को समर्पित करने के लिए तैयार हैं। यह भक्ति भाव भावी को प्रकट करती है, जिसमें भक्त हनुमान जी को भंडारी मानते हैं, यह दर्शाते हुए कि वे हर प्रकार की आवश्यकता को पूर्ण कर सकते हैं।

भजन में एक गहरी भावना है जहां भक्त अपनी दुर्बलताओं और समस्याओं का उल्लेख करते हैं। 'मैं जोड़े हाँथ खड़ा हूँ, तेरे दर का बना भिखारी' के माध्यम से भक्त यह अभिव्यक्त कर रहे हैं कि वे हनुमान जी के दर पर आकर अपने आपको एक आश्रित के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। भक्ति की इस श्रंखला में, भक्त केवल सहायता नहीं चाहते बल्कि एक दृढ़ विश्वास के साथ हनुमान जी से आशा रखते हैं। इसी प्रकार की भावनाएँ 'भक्तो ने करी दुहाई' और 'प्रभु दीजो मोहे दर्शन' जैसे शब्दों में भी प्रकट होती हैं, जो यह दर्शाते हैं कि भक्त हनुमान जी की कृपा की आकांक्षा रखते हैं और इसके लिए नियमित रूप से प्रार्थना में लगे रहते हैं।

हनुमान जी को संकट मोचन कहा जाता है, और यह भजन उनके प्रति श्रद्धा का वर्तन करने का एक साधन है। 'हे महाबीर बजरंगी, तुम्हे कहते है दुःख भंजन' शब्दों में विचार विमर्श करते हुए यह स्थापित होता है कि हनुमान जी की महिमा अनंत है। वे न केवल बल और साहस का प्रतीक हैं, बल्कि भक्तों की कठिनाइयों को दूर करने में सबसे बड़े सहायक भी हैं। भक्ति मार्ग की इस यात्रा में, भजन हमें एक सकारात्मक दृष्टिकोण से अपने संकटों का सामना करने की प्रेरणा देता है, यह दर्शाते हुए कि अगर हम हनुमान जी की शरण में आते हैं, तो हमें एक नई शक्ति और ऊर्जा मिलेगी। इस प्रकार, यह भजन केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह भक्ति का एक सुंदर माध्यम है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का धार्मिक और पौराणिक महत्व बहुत बड़ा है। हनुमान जी, जो रामायण में प्रमुख पात्र हैं, को भक्त उनकी शक्ति और भक्ति के लिए जानने जाते हैं। उनका नाम लेते समय भक्तों की भावनाएँ गहराई तक जाती हैं और वे उन्हें संकट मोचन के रूप में पहचानते हैं। रामायण में हनुमान जी ने प्रभु राम के प्रति अपनी निस्वार्थ भक्ति का परिचय दिया, जो उन्हें युगों-युगों तक भक्ति का आदर्श बनाती है। इस भजन में हनुमान जी की भक्ति का गुणगान करते हुए भक्त उन से सुरक्षा और मार्गदर्शन की प्रार्थना करते हैं।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, आत्म-विश्वास और ताजगी प्राप्त होती है। हनुमान जी की भक्ति के अनुसार, यह मानसिक दबाव और तनाव को कम करने में सहायक है। इसके द्वारा भक्तों को स्वास्थ्य लाभ, जीवन में सचेतना और आध्यात्मिक उत्थान की अनुभूति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह या सूर्यास्त के समय करना सबसे अच्छा होता है। भक्ति के समय, श्री हनुमान जी की तस्वीर के सामने दीप जलाना और परिहार का संकल्प लेना सहायक होता है। भक्त को मन से शुद्ध होकर, ध्यान केन्द्रित करके भजन का जाप करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

हाँ, ये भजन देवी-देवताओं के प्रति भक्तों की भक्ति को दर्शाता है।

इस भजन के माध्यम से भक्त हनुमान जी से संकट से मुक्ति, शक्ति और साहस की प्रार्थना करते हैं। यह मान्यता है कि हनुमान जी हमेशा अपने भक्तों की रक्षा करते हैं।

क्या इस भजन का जाप हर दिन करना चाहिए?

हाँ, इस भजन का नियमित जाप करने से मानसिक शांति और आत्म-विश्वास में वृद्धि होती है। यह भक्तों के लिए स्थायी लाभकारी होता है।

भजन का सही समय क्या है?

इस भजन का जाप सुबह जल्दी या संध्या के समय करना सर्वोत्तम होता है। यह समय ध्यान और भक्ति में लीन होने के लिए अनुकूल माना जाता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 24 Aug 2026

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