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Hanuman Bhajan

मंगल भवन अमंगल हारी लिरिक्स (Mangal Bhawan Amangal Haari Lyrics) - Raghupati Kar Sandesh Hanuman Bhajan - Bhaktilok

75 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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हनुमान की भक्ति का मधुर संगीतमय पाठ

इस भजन के द्वारा हनुमान जी की कृपा और संकट नाशक शक्तियों का अनुभव करें।

मंगल भवन अमंगल हारी, दर्शन कीजै मुझे पवन मिहारी। सियापति रामचन्द्र के जवाहर, शरण में आई चामुण्डा विहारी। मंगल भवन अमंगल हारी। सुग्रीव लखन, देखिए सिया रावण, राम जी का नाम लेते गए दीन मोहन। ईश्वर के सच्चे भक्तों की कभी ना हो विघ्न कोई अवरोधकारी। मंगल भवन अमंगल हारी। श्री हनुमान जी का समझना है कर्म, जिनका स्वभाव है भक्ति का धर्म। कष्ट में होता उनका परोपकार, संकट नाशक सियापति के दुलारे। मंगल भवन अमंगल हारी। हरि भक्त समर्पित श्री राम के, सिद्धि को देते हैं हर कहानी। जो भी इस भजन को सुनता, हो जाता है धन्य ही भावकारी। मंगल भवन अमंगल हारी। आनंद भक्ति में मन से पास, भक्त जन से बढ़कर कौन उदास। कर्तव्य प्रति सजग रहकर, करें सब कृत्य हंसते उत्सव यारी। मंगल भवन अमंगल हारी। मंगल भवन अमंगल हारी, दर्शन कीजै मुझे पवन मिहारी। सियापति रामचन्द्र के जवाहर, शरण में आई चामुण्डा विहारी। मंगल भवन अमंगल हारी। ...

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह भजन 'मंगल भवन अमंगल हारी' मुख्यतः भगवान हनुमान की महिमा और उनके द्वारा भक्तों को दी जाने वाली कृपा पर केंद्रित है। इस भजन के पहले हिस्से में 'मंगल भवन अमंगल हारी' का जप करने से व्यक्ति के जीवन में आनंद और समृद्धि का संचार होता है। इस भजन का उद्देश्य भक्त को इस बात की याद दिलाना है कि हनुमान जी संकटों में सहायक होते हैं और जिनका सहारा लेते हैं, उनके दुख-दर्द दूर होते हैं। हनुमान जी को पवन-पुत्र कहकर दर्शाना है कि वह पिता वात्सल्यमय व प्रेममय हैं। इस भजन में श्री राम की कृपा का भी वर्णन है, यह दर्शाता है कि राम के अनुग्रह से ही भक्तों को संकटों से मुक्ति मिलती है।

इस भजन का अर्थ इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भक्त का मानसिक और भावनात्मक जुड़ाव दर्शाता है। विशेषकर उस क्षण में जब भक्त हनुमान जी का स्मरण करता है, उसकी हृदय की गहराइयों में एक बलिदान और प्रसन्नता का संचार होता है। जो भक्त हनुमान जी के चरित्र और उनके महान कार्यों का स्मरण करते हैं, वे अपने जीवन में साहस और बल पाते हैं। भजन में उल्लिखित 'संकट नाशक', हनुमान जी का यह गुण एक विशेष आकर्षण है, जिससे भक्त अपने कष्टों को मिटाने का सौभाग्य प्राप्त करते हैं। इस भक्ति को गाते हुए भक्त स्वयं को पवन साहब के अनुग्रह में समर्पित समझता है।

इस भजन में भक्तिमार्ग का गंभीर संवाद है। हनुमान जी की भक्ति से भक्त के जीवन में अद्भुत परिवर्तन होता है। भक्ति ने व्यक्ति को यह सिखाया है कि कैसे अपने कष्टों और दुखों से लड़ना है। इस भजन के माध्यम से भक्त हनुमान जी को स्वयं का मार्गदर्शक मानते हैं। यह देवता उन्हें अद्वितीय रूप से ज्ञान और शक्ति देते हैं, जिससे वे अपने कर्मफल से मुक्त हो जाते हैं। अतः, यह भजन न केवल एक भक्ति भाव है, बल्कि यह एक दार्शनिक जीवन दृष्टिकोण भी प्रस्तुत करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व भारतीय धार्मिक परंपरा में अति विशेष है। हनुमान जी का वर्णन 'रामायण' में किया गया है, जहाँ उनकी अनेक लीलाएँ और समर्पण का उल्लेख मिलता है। पवित्र ग्रंथ 'रामायण' में हनुमान को सच्चे भक्त, संकट नाशक, और राम की अनुकम्पा के रूप में दर्शाया गया है। इस भजन का वर्णन सदियों से भक्तों के दिलों में एक सशक्त श्रद्धा का संचार करता आया है। हनुमान चालीसा में भी उनके गुणों का बखान किया गया है, जिससे भक्तों में विश्वास बढ़ता है कि हनुमान जी की उपासना से हर समस्या का समाधान संभव है।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। इस भजन का नियमित पाठ करने से मानसिक शांति, आंतरिक शक्ति और आत्मविश्वास की वृद्धि होती है। इसके प्रभाव से व्यक्ति नकारात्मकता और मानसिक तनाव से दूर रह सकता है। भक्ति के साथ इस भजन को गाने से साधक को अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव होते हैं। यह भजन उपासना से मोक्ष की ओर भी मार्ग प्रशस्त करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह के समय या शाम को अद्भुत ऊर्जा के साथ किया जा सकता है। ध्यान केंद्रित करने के लिए, शुद्ध मन से गंध, दीपक, और फूलों का समर्पण करें। इस समय, भक्त को ध्यान लगाते हुए एक शांत और सकारात्मक मानसिक स्थिति में रहना चाहिए। अर्चना करते समय हनुमान जी की छवि के सामने बैठकर भजन का उच्चारण करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

मंगल भवन अमंगल हारी का अर्थ क्या है?

इसका अर्थ है कि हनुमान जी जो शुभता लाते हैं, वह अशुभता को दूर करने की क्षमता रखते हैं।

क्या इस भजन का पाठ रोजाना करना चाहिए?

हाँ, रोज इस भजन का पाठ करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक लाभ होता है।

हनुमान जी की भक्ति का महत्व क्या है?

हनुमान जी की भक्ति से भक्त को साहस, शक्ति और संकट निवारण की प्राप्ति होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Aug 2026

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