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आया मोर दी सवारी करके लिरिक्स (Aaya mor di swari karke Lyrics in Hindi) - Baba Balak NAth Bhajan - Bhaktilok

86 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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बाबा बलकनाथ की कृपा: मोर दी सवारी

भक्ति भाव से गाया जाने वाला यह भजन, बाबा बलकनाथ की कृपा के लिए है। इसके गायन से मन में शांति और भक्ति का संचार होता है।

आया मोर दी सवारी करके, नाच नाच के पास मेरे आए। हे सच्चिदानंद बाबा, मोर मन में तुम समाए। चरणों में तेरे मैं ये राधा, चरणों में सदा लीन रहूं। हर जीव के हित कर दे, यही प्रार्थना मैं करूं। कर दिल्ली स्वर्ण नगरी, हर देस में तेरा नाम करे। दे सुख से हर प्राणी को, तेरा कृपा हम सब पर करे। आया मोर दी सवारी करके, नाच नाच के पास मेरे आए। तेरी महिमा से गूंजे धरती, तेरा नाम हमें दें शांति। हर दुख का कर दे नाश तरे, ओ विघ्न बाधा दूर करे। आया मोर दी सवारी करके, नाच नाच के पास मेरे आए। जग में सब है तेरा लीलामय, तू हंसता खेलता मंगलमय। हम सभी हैं तेरे भक्त सज्जन, दे हमें सुख सम्पत्ति, रहे सुखचिन्तामणि। आया मोर दी सवारी करके, नाच नाच के पास मेरे आए।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में मुख्य रूप से भक्त का प्रेम और श्रद्धा झलकती है। "आया मोर दी सवारी करके" शब्दों में भक्त यह व्यक्त करता है कि बाबा बलकनाथ उनके बीच आ चुके हैं और उनकी उपस्थिति से उनकी दुनिया रोशन हो गई है। इस भक्ति गीत में बाबा से प्रार्थना की गई है कि वे भक्तों के हृदय में प्रेम का संचार करें और हर जीव के हित में कार्य करें। कविता में यह भावना है कि भक्त अपने दुखों को भुलाकर, आनंद में अपने इष्ट की महिमा गाता है। "हर जीव के हित कर दे, यही प्रार्थना मैं करूं" इस पंक्ति में सच्चे भक्ति मार्ग पर चलने के लिए प्रेरणा मिलती है।

आध्यात्मिक दृष्टिकोण से, इस भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा है। भक्त का यह भाव कि "तेरे चरणों में मैं ये राधा" अत्यंत प्रेमपूर्ण है, जो यह दर्शाता है कि भक्ति का सर्वोच्च स्तर भगवान में पूर्ण आत्म-समर्पण है। भक्त अपने आप को बाबा के चरणों में लीन कर देना चाहता है, जो आत्मानुभूति का संकेत है। "तेरी महिमा से गूंजे धरती" वाले अंश से यह स्पष्ट होता है कि जब भक्त सच्चे मन से प्रार्थना करते हैं, तब हृदय में एक प्रेमपूर्ण और शांतिपूर्ण वातावरण बनता है।

गहरी धार्मिक दृष्टि में, यह भजन भक्ति मार्ग का प्रतीक है। हर पंक्ति में कर्तव्य, प्रेम और समर्पण का संवाद है। भक्त की चाह है कि बाबा उनकी सभी विकट परीक्षाओं का नाश करें और उन्हें सुख दें। इस प्रकार, भक्ति का मार्ग केवल भक्ति नहीं, बल्कि आत्मा के सच्चे सुख की खोज भी है। बाबा बलकनाथ की उपासना के माध्यम से भक्त अपने दुखों को भूलकर, जीवन में सकारात्मकता और आनंद लाने का प्रयास करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन बाबा बलकनाथ की कृपा और उनकी महिमा का गुणगान करता है। पौराणिक संदर्भों के अनुसार, बाबा बलकनाथ को विशेष रूप से शिक्षा, उपदेश और आत्मज्ञान के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। यह भजन उनके प्रति भक्तों की अपार श्रद्धा को प्रकट करता है एवं उनसे अनुकंपा पाने की अभिलाषा करता है। इसे गाने से शांति, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित पाठ करने से मानसिक शांति, आत्मिक संतोष और भक्ति का अनुभव होता है। भक्तों को मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है, और जीवन की कठिनाइयों में साहस व समर्पण का विकास होता है। यह भजन नम्रता, सच्चाई और श्रद्धा की भावना को भी मजबूत करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का गायन सुबह या शाम के समय करना उत्तम होता है। इस समय मन शांत होता है। ध्यान के दौरान एक साफ जगह पर बैठकर, दीया जलाना और प्रसाद चढ़ाना उत्तम रहता है। सच्चे मन से बाबा की कृपा की प्रार्थना करते हुए भजन गाना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह भजन कैसे भक्तों की मदद करता है?

यह भजन भक्तों को मन की शांति और तात्कालिक सुख की अनुभूति कराता है। बाबा बलकनाथ की कृपा से सभी दुख दूर हो जाते हैं।

भजन गाने का सही समय क्या है?

इस भजन का गायन सुबह या शाम के समय करना लाभदायक है, क्योंकि यह समय ध्यान और भक्ति के लिए उचित माना जाता है।

इस भजन की प्रमुख शिक्षा क्या है?

इस भजन की शिक्षा है कि भक्ति और सच्चे हृदय से की गई प्रार्थना सभी विघ्नों को दूर कर देती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 22 Aug 2026

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