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श्री काल भैरव अष्टकम्(Kaal Bhairav Ashtakam Lyrics Sanskrit Me) - Bhaktilok

58 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्री काल भैरव की महिमा: भक्तों की रक्षा के लिए

श्री काल भैरव अष्टकम् का पाठ भक्तों को सम्पूर्ण शांति और सुख प्रदान करता है।

श्री काल भैरव अष्टकम् वन्दे काल भैरवम्, वन्दे भक्तिप्रियो भवम्। विश्वं याति नष्टं च, कल्पयेत्परम् शान्तिम्॥ १॥ हे भैरव, सदा शान्ति देने वाले, भक्तों के प्रिय, आपको प्रणाम करते हैं। आप सृष्टि का नाश करते हो, और समस्त संसार को शान्ति प्रदान करते हो।॥ १॥ जपाकुसुम श्यामलम्, शिरोमणी ध्वजध्वजम्। जीवन्मृत्युः संभवं, कृतियान्वितकृत्यम्॥ २॥ हे कल्याणकारी, आपके कर्ण-वर्ण सुशोभित हैं। आप जीवन के हर मरण से मुक्ति प्रदान करते हैं।॥ २॥ पञ्चप्राण ममेश्वरम्, जगतः सृष्टिसंवर्तकम्। जगद्गुरु हरतम्, परमेश्वर ह्यपारगम्॥ ३॥ हे श्री काल भैरव, आप विश्व के सृष्टिकर्ता हैं। आपकी कृपा से जीव हर प्रकार के दुःखों से मुक्त होते हैं।॥ ३॥ क्रोधः शान्तीकरः, ब्रह्मविज्ञानवृत्तिधम्। असत्यं धारयामास्य, सत्यमेव तुत्यु लेखितम्॥ ४॥ हे भैरव, आप क्रोध को शान्ति में परिवर्तित करते हैं। आपके ज्ञान से सत्य का अनुसरण होता है।॥ ४॥ नमः तुभ्यम्, सर्वदुष्टमौक्तिकम्। भुतदृगाङ्गे, स्पृष्टा हि नष्टानाम्॥ ५॥ मैं आपको प्रणाम करता हूँ, आप सभी बुराइयों को नष्ट करते हो। आप अपने भक्तों की रक्षा करते हो और शुभ फल देते हो।॥ ५॥ भृगु शृङ्गारशब्दम्, ब्रह्मताकोहरम्। रुद्रव्यावसायोऽस्मिन्विज्ञान सयत्र यान्ति॥ ६॥ हे भगवान, आपके आनंदमयी स्वरूप का अनुभव सब करते हैं। आपकी कृपा से सृष्टि का ज्ञान विषद होता है।॥ ६॥ ब्रह्माण्डजन्मोद्भवश्च, विश्वभूतं च गच्छति। जाग्रतो भगवान् कष्ठं, सहस्त्रं वदनानि च॥ ७॥ आप सभी को निरंतर बनाए रखते हैं। हे भैरव, आपका साक्षात्कार सभी पर होता है।॥ ७॥ जयन्ति काल भैरवः, भक्तानाम् यानमुत्तमम्। सर्वदान्यस्य पोषणं, हृदयपृष्ठात्स्वयमेव॥ ८॥ भक्तों की विनय पर आप हमेशा जयंत होते हैं। आप अपने भक्तों की सभी आवश्यकताओं का ध्यान रखते हैं।॥ ८॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

श्री काल भैरव अष्टकम् एक महत्वपूर्ण स्तुति है जो भगवान काल भैरव की महिमा का वर्णन करती है। इस अष्टकम में भगवान काल भैरव को सृष्टि के नाशक एवं भक्तों के प्रति कृपालु बताया गया है। पहले श्लोक में भैरव की महानता को स्वीकारते हुए हम उन्हें नमस्कार करते हैं, जो सृष्टि में नाश और शांति का समन्वय करते हैं। वे जीवन में आने वाले समस्त संकटों को दूर कर अपने भक्तों को हमेशा हमेशा सुख और शांति प्रदान करते हैं। यहां भक्तिप्रियता का महत्व अभिव्यक्त किया गया है, जो दर्शाता है कि भगवान भैरव सच्चे भक्तों के प्रति हमेशा स्नेही और सहायता करते हैं।

अष्टक के दूसरे श्लोक में काल भैरव के रूप को दर्शाया गया है कि वे कर्ण-वर्ण से सुशोभित हैं और भक्तों के जीवन के अंत के समय मृत्यु से मुक्ति दिलाने वाले होते हैं। इस भावार्थ में यह संकेत है कि भैरव का स्वरूप दिव्य और सभी प्रकार की वृत्तियों को शांति देने वाला है। भैरव का सामर्थ्य उस पञ्चप्राण का प्रतीक है, जो हमारे अस्तित्व का आधार होती है। गया है कि वे सृष्टि की सम्पूर्णता को समर्थन करते हैं, जिससे हम समझ सकते हैं कि भैरव का ध्यान करने से हमारी सभी विकृतियों का नाश होता है।

तेरहवें श्लोक में जिसका उल्लेख किया गया है, उसमें भैरव की शक्ति का अनुभव करते हुए उन्हें सब कार्यों में मददगार बताया गया है। वे ज्ञान और भक्ति मार्ग के प्रतीक हैं, जो जीवन में सच्ची प्रगति और मुक्ति के लिए आवश्यक हैं। भैरव के प्रति श्रद्धा व निष्ठा रखकर हम सच्चे अर्थ में भक्ति के मार्ग पर चल सकते हैं। अष्टकम के प्रत्येक श्लोक में भैरव की शक्ति और भावनाओं का उल्लेख है जो दर्शाता है कि यद्यपि वे सृष्टि में नाशक हैं, वे अपने भक्तों के प्रति असीम करुणा रखते हैं और अपनी कृपा से भक्तों को संतोष प्रदान करते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह अष्टकम एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रार्थना है जो पुराणों में वर्णित काल भैरव की महिमा को प्रकट करती है। काल भैरव का नाम सुनते ही हमारे मन में उनके कृत्यों और विज्ञान का स्मरण होता है। पुराणों में उनका उल्लेख अत्यंत संतोषजनक तरीके से किया गया है। विशेष रूप से, उन्हें त्रिगुणात्मा और ब्रह्माण्ड का संरक्षक माना जाता है। देवताओं में उनका एक विशिष्ट स्थान है, जो न केवल नकारात्मक शक्तियों का विनाश करते हैं बल्कि अपने भक्तों को दिव्य ज्ञान और शक्ति भी प्रदान करते हैं। इसलिए इस अष्टकम का पाठ करने से पुष्ट होता है कि भक्तों को भैरव से अत्यधिक कल्याण मिलता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। श्री काल भैरव अष्टकम का नियमित पाठ करने से मानसिक शांति, बीमारियों का नाश, और आध्यात्मिक उन्नति होती है। यह नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर सकारात्मकता का संचार करता है। भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में खुशहाली आती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

श्री काल भैरव अष्टकम का पाठ सुबह जल्दी करना अत्यंत लाभकारी है। इस दौरान सूर्योदय के समय, एक दीपक जलाना और व्रति का पालन करना चाहिए। शांत वातावरण में बैठकर ध्यान से पाठ करें। मानसिक शांति और भक्ति के साथ ह्रदय में श्रद्धा भरे भावों से इस अष्टकम का पाठ करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

श्री काल भैरव का महत्व क्या है?

श्री काल भैरव का महत्व अतुलनीय है। उन्हें समय के पार, मृत्यु और जन्मचक्र के नाशक के रूप में पूजा जाता है। उनके द्वारा दी गई शांति भक्तों को मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाती है।

क्या काल भैरव अष्टकम का पाठ रोज़ करना चाहिए?

हाँ, काल भैरव अष्टकम का रोज़ पाठ करने से सुख, शांति और समृद्धि का अनुभव होता है। यह मानसिक संतुलन बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का भी कारण बनता है।

श्री काल भैरव की उपासना का तरीका क्या है?

श्री काल भैरव की उपासना में ध्यान, जाप और भक्ति चरित्र का समावेश होता है। भक्तिपूर्वक और विनम्रता से उनका स्मरण करने से मन को शांति और ज्ञान की प्राप्ति होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 24 Aug 2026

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