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खैर पा दे लिरिक्स (khair paa de Lyrics in Hindi) - Baba Balak Nath Bhajan - Bhaktilok

62 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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बाबा बलाकनाथ की कृपा: खैर पा दे भजन

भक्‍तों की हृदय की पुकार, बाबा बलाकनाथ से कृपा प्राप्त करने का दिव्य भजन। समर्पण करें।

खैर पा दे लिरिक्स (khair paa de Lyrics in Hindi) - सारिया नू बाबा वे तू सुख वंडदाआउंदे दर तेरे दुखिये बथेरेतेरा केहड़ा जोगिया वे मूल लगदावे खैर पा दे तू झोली दे विच मेरेझोली विच पा दे मेरे लाल जोगियामैनु भी मिला दे जग नाल जोगियाडूबदेया नू बाबा तू सहारे देंदा एलाउँदा ए किनारे पार बेड़ेतेरा केहड़ा जोगिया वे मूल लगदावे खैर पा दे तू झोली दे विच मेरेमान तेरे उत्ते गल ताहियो आखी आदेदे तू मुरादा गुफा दिया वासियामोड़ी ना तू खाली दर आये मंगतेखड़े आये हन वेहड़े तेरेतेरा केहड़ा जोगिया वे मूल लगदावे खैर पा दे तू झोली दे विच मेरेचेत दे महीने तेरा मेला आउना एभगता ने आके गुणगान गाउना एरख के भरोसा मैं भी आया दर तेसुत्ते भाग जगा दे मेरेतेरा केहड़ा जोगिया वे मूल लगदावे खैर पा दे तू झोली दे विच मेरेपीरति दे वांगु सानू तार जोगियामेहरा वाले छीटे ओहते मार जोगियाओहना विच मैनु खड़ा होन करदेताहने मारदे ने लोकि मैनु जेहड़ेतेरा केहड़ा जोगिया वे मूल लगदावे खैर पा दे तू झोली दे विच मेरे

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन के माध्यम से भक्त बाबा बलाकनाथ के प्रति अपनी गहरी भक्ति व्यक्त करते हैं। भजन की पहली पंक्तियों में कहा गया है कि बाबा अपने दर पर आने वाले भक्तों को सुख देने वाले हैं। 'सुख वंडदाआउंदे दर तेरे' का अर्थ है कि बाबा अपनी दिव्य शक्ति से भक्तों के दुख दूर करते हैं। फिर यह प्रश्न उठता है, 'केहड़ा जोगिया वे मूल लगदावे', जिसका अर्थ है कि बाबा अपनी वास्तविकता को प्रकट करते हैं। यह भक्तों की भावनाओं को दर्शाता है, जो बाबा से यह पूछते हैं कि उनकी झोली में क्या रखा है। भक्त की आस्था और समर्पण साफ साफ झलकता है, जो उन्हें न केवल साक्षात दर्शन की इच्छा देता है, बल्कि उस दिव्य प्रेम का अनुभव करने का भी संकेत है जो बाबा अपने भक्तों पर वितरित करते हैं।

भजन में भावनाओं का एक सागर है, जहाँ भक्त अपनी आत्मा की पुकार करते हैं। 'मैनु भी मिला दे जग नाल' का अर्थ है कि वे अकेले नहीं रहना चाहते, बल्कि जग के साथ मिलकर चलना चाहते हैं। यहां 'जोगिया' का संदर्भ आध्यात्मिक मार्गदर्शक से है, जो उन्हें कठिनाइयों से निकालने में सहायता करेगा। इस प्रकार, यह भजन केवल सामान्य भक्ति नहीं है, बल्कि एक गहरी प्रार्थना है। भक्त बाबा के सामने अपनी जिज्ञासाएं और भावनाएं व्यक्त कर रहे हैं, जैसे 'हे बाबा, तुम मेरा सहारा बनो', जिसमें एक गहरा आशावाद और विश्वास प्रकट होता है।

धार्मिक और दार्शनिक दृष्टिकोण से, यह भजन भक्ति मार्ग का प्रतिनिधित्व करता है, जहाँ प्रेम, विश्वास, और लगन मुख्य तत्व हैं। 'खैर पा दे तू झोली दे विच मेरे' यह दर्शाता है कि भक्त अपने हृदय को बाबा के चरणों में समर्पित कर देना चाहता है। यह एक आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत को दर्शाता है, जहाँ भक्त अपनी आत्मा की शुद्धता की ओर अग्रसर हो रहा है। बाबा बलाकनाथ की कृपा प्राप्त करने के लिए भक्ति, तप, और साहस की आवश्यकता होती है, जिसे ये भक्त अपने गाने में परिभाषित करते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व पौराणिक कथाओं और धार्मिक ग्रंथों में गहराई से निहित है। बाबा बलाकनाथ को कई पुराणों में एक शक्तिशाली दिव्य संरक्षक के रूप में वर्णित किया गया है, जो भक्तों को संकटों से निकालते हैं। भक्तों का मेला, जिसमें भजन गाए जाते हैं, वृहद् संचार और समुदाय के बंधनों को भी प्रगाढ़ करता है। रामायण और महाभारत में भक्ति की महत्ता को विशेष स्थान दिया गया है, जहाँ विश्वास और समर्पण को सर्वोपरि बताया गया है। यह भजन, बाबा बलाकनाथ के प्रति आस्था को और अधिक गहरा बनाता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप मानसिक शांति, आत्मिक विकास, और आध्यात्मिक उन्नति का साधन होता है। जब भक्त इसे गाते हैं, तो उनके मन, शरीर और आत्मा में संतुलन और सच्चाई का अनुभव होता है। यह एकाग्रता को बढ़ाता है और साधक की ध्यान की शक्ति को मजबूत करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह के समय सूर्योदय से पहले करना सर्वोत्तम माना जाता है। इस दौरान एक शांत स्थान पर बैठकर, दीप जलाना और फूलों की चढ़ावा अर्पित करना अनिवार्य है। ध्यान का एक स्थिर स्थिति में बैठना जरूरी है, ताकि भक्ति भावना एकाग्र रह सके और मन एक स्थान पर केंद्रित हो।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का गान कब करना चाहिए?

इस भजन का गान सुबह सूर्योदय से पहले करना बेहतर होता है। यह समय दिव्य ऊर्जा से भरपूर होता है।

भजन में 'जोगिया' का क्या अर्थ है?

'जोगिया' शब्द का अर्थ है आध्यात्मिक मार्गदर्शक, जो भक्तों को भक्ति के मार्ग पर चलने में मदद करता है।

बाबा बलाकनाथ की महिमा क्या है?

बाबा बलाकनाथ को संकटमोचन और भक्तों के दुखों का हरता माना जाता है। उनका दर सभी भक्तों के लिए एक सुरक्षित आश्रय है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 18 Aug 2026

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