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मैयां तेरी जय जयकार(Maiya Teri Jayjaykar Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

108 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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माँ की गोद में सुकून और आशीर्वाद

इस भजन के माध्यम से माँ की कृपा का अनुभव करना और आशीर्वाद प्राप्त करना होगा।

मैयां तेरी जय जयकार तेरी गोद में सर है मैयां अब मुझको क्या डर है मैयां दुनियां नज़रें फेरे तो फेरे मुझपे तेरी नज़र है मैयां तेरी गोद में सर है मैयां अब मुझको क्या डर है मैयां [मैयां तेरी जय जयकार] x 2 [तेरा दरस यहाँ भी है तेरा दरस वहां भी है] x 2 हर दुःख से लड़ने को मैयां तेरा एक जय कारा काफी है, काफी है मैयां तेरी जय जयकार मैयां तेरी जय जयकार दिल में लगा तेरा दरबार मैयां तेरी जय जयकार [मैं सन्तान तू मातातू मेरी जीवन दाता] x 2 जग में सबसे गहरा मैयां तेरा और मेरा है नाता, है नाता [मैयां तेरी जय जयकार] x 4 तेरी गोद में सर है मैयां अब मुझको क्या डर है मैयां दुनियां नज़रें फेरे तो फेरे दुनियां नज़रें फेरे तो फेरे मुझपे तेरी नज़र है मैयां तेरी गोद में सर है मैयां अब मुझको क्या डर है मैयां [मैयां तेरी जय जयकार] x 6 तेरी गोद में सर है मैयां अब मुझको क्या डर है मैयां मैयां तेरी जय जयकार मैयां तेरी जय जयकार

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

भजन 'मैयां तेरी जय जयकार' माता की असीम कृपा और संरक्षण का प्रतीक है। इस भजन में 'तेरी गोद में सर है मैयां' का प्रयोग करके भक्त अपनी माँ की गोद में सिर रखकर सुरक्षा और प्रेम का अनुभव करते हैं। यह पंक्ति बयान करती है कि जब भक्त माँ की गोद में होते हैं, तब उन्हें किसी भी प्रकार का डर नहीं रहता। भक्ति का यह भाव सभी भक्तों को यह समझाता है कि ईश्वर की कृपा से हर मुश्किल का सामना किया जा सकता है। गीत के आगे की पंक्तियाँ जैसे 'मुझपे तेरी नज़र है मैयां' यह दर्शाती हैं कि माँ की दृष्टि भक्तों पर सदा रहती है, जिससे उन्हें एक सुरक्षा कवच मिलता है। सच्चे मन से माँ की भक्ति करने पर भक्त हर दुःख और पीड़ा का सामना कर सकते हैं।

इस भजन की भावार्थीता यहीं समाप्त नहीं होती। 'दुनियां नज़रें फेरे तो फेरे' का अर्थ है कि संसार चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ उत्पन्न करे, भक्त को अपनी माँ पर पूर्ण विश्वास होना चाहिए। माँ का आशीर्वाद ही सबसे बड़ा सहारा है, और इस विश्वास के साथ भक्ति करने से भक्त को कठिन समय में भी सहायता मिलती है। भजन में यह समर्पण भाव स्पष्ट है; जब भक्त कहता है, 'तेरा एक जय कारा काफी है', तो उसका अर्थ है कि माँ की नाम की जयकार करने से ही हर दुख व संकट से लड़ने की शक्ति मिलती है। यह भक्तिपूर्ण वाणी प्रेम और समर्पण का संदेश फैलाती है।

भakti मार्ग का यह मार्ग इस भजन में स्पष्ट रूप से प्रकट होता है। भक्तों के लिए यह महत्त्वपूर्ण है कि वे सच्चे मन से माता का स्मरण करें और उसकी उपासना करें। 'मैं सन्तान तू माता' इस पंक्ति में यह भावना प्रकट होती है कि संतान का संबंध अपनी माँ से अटूट और गहरा है। यह भजन केवल भक्ति के लिए नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में माँ का आशीर्वाद प्राप्त करने की प्रेरणा देता है। भक्तों को अपनी समस्या और मुश्किलों का समाधान माँ की स्तुति में मिलता है। यह भजन माँ की अमूल्य कृपा को गायन करते हुए भक्तों को जीवन के कठिन रास्तों पर चलने की प्रेरणा भी देता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भारतीय संस्कृति में मातृ देवो भव: की भावना को प्रकट करता है। हिन्दू धर्म में माता को सृष्टि की जननी माना जाता है और उनके प्रति समर्पण एक महत्वपूर्ण संस्कार है। माता की गोद को सुरक्षा, प्रेम और करुणा का प्रतीक मानकर इस भजन का गायन भक्तों के दिलों में अनुराग और भक्ति की भावना जगाता है। भारतीय पौराणिक कथाओं में, माँ दुर्गा, माँ काली और अन्य देवी-देवियों ने अपने भक्तों को संकट से बचाने का कार्य किया है। इस संदर्भ में, यह भजन भक्तों को कठिनाइयों से लड़ने की प्रेरणा देता है, जो कि उपनिषदों और पुराणों में भी वर्णित है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित पाठ करने से भक्तों को मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आत्म-सम्मान प्राप्त होता है। यह कथा भक्तों को भय से मुक्ति दिलाती है। भजन का संकीर्तन करने से भक्तों का आध्यात्मिक उन्नति और भक्ति में वृद्धि होती है। पवित्रता और भक्ति से प्राप्त होने वाले लाभों में शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार और मानसिक तनाव में कमी शामिल होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह या शाम की पूजा के समय किया जा सकता है। पूजा करते समय एक दीया जलाना और माता के चित्र या मूर्ति के समक्ष श्रद्धा पूर्वक बैठकर पाठ करना चाहिए। श्रद्धा और भावनाओं के साथ किया गया पाठ माँ की कृपा को प्राप्त करने में सहायक होता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का महत्वपूर्ण संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि माँ की गोद में होने पर व्यक्ति को किसी भी भय का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है। यह भक्त को आशीर्वाद और सुरक्षा का एहसास कराता है।

कौन सी मात्रीका की स्तुति की गई है इस भजन में?

इस भजन में समग्र मातृत्व की स्तुति की गई है, जो कि सभी देवी-देवियों का प्रतीक है। यह माँ की करुणा और उसकी दिव्यता की महिमा का गुणगान करता है।

इस भजन का गायन किस वक्त करना सर्वोत्तम है?

इस भजन का गायन सुबह या शाम की पूजा के दौरान करना सर्वोत्तम होता है। इसकी आवृत्ति से सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है और मानसिक स्थिरता हासिल होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 27 Aug 2026

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