आज का पंचांग | सूर्योदय: ०५:४५ AM | सूर्यास्त: ०६:५० PM
Vishwakarma Puja

श्री श्याम चैरासी लिरिक्स (Shri Shyam Chairasee Lyrics in Hindi) - महर करो जन के सुखरासी Shyam Bhajan - Bhaktilok

95 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
आकार:
कंट्रास्ट:

 

श्री श्याम चैरासी लिरिक्स (Shri Shyam Chairasee Lyrics in Hindi) - 


दोहा - सबसे बड़ा तेरा दरबार है तू ही सब का पालनहार है ।

सजा दे या करदे क्षमा सांवरे तू ही हमारी सरकार है।


महर करो जन के सुखरासी, 

साँवलशाह खाटू के वासी ||1||


प्रथम शीश चरणों में नाऊँ, 

किरपा दृष्टि रावरी चाहँू ||2||


माफ सभी अपराध कराऊँ, 

आदि कथा सुछंद रच गाऊँ ||3||


भक्त सुजन सुनकर हरषासी, 

साँवलशाह खाटू के वासी ||4||


कुरु पांडव में विरोध छाया, 

समर महाभारत रचवाया ||5||


बलि एक बर्बरीक आया, 

तीन सुबाण साथ में लाया ||6||


यह लखि हरि को आई हाँसी, 

साँवलशाह खाटू के वासी ||7||


मधुर वचन तब कृष्ण सुनाये, 

समर भूमि केहि कारन आये ||8||


तीन बाण धनु कंध सुहाये, 

अजब अनोखा रूप बनाये ||9||


बाण अपार वीर सब ल्यासी, 

साँवलशाह खाटू के वासी ||10||


बर्बरीक इतने दल माहीं, 

तीन वाण की गिनती नाहीं ||11||


योद्धा एक से एक निराले, 

वीर बहादुर अति मतवाले ||12||


समर सभी मिल कठिन मचासी, 

साँवलशाह खाटू के वासी ||13||


बर्बरीक मम कहना मानो, 

समर भूमि तुम खेल न जानो ||14||


द्रोण गुरू कृपा आदि जुझारा, 

जिनसे पारथ का मन हारा ||15||


तू क्या पेश इन्हों से पासी, 

साँवलशाह खाटू के वासी ||16||


बर्बरीक हरि से यों कहता, 

समर देखना मैं हूँ चाहता ||17||


कौन बली रण शूर निहारुँ, 

वीर बहादुर कौन जुझारुँ ||18||


तीन लोक त्रावाण से मारुँ, 

हँसता रहँू कभी नहिं हारुँ ||19||


सत्य कहूँ हरि झूठ न जानो, 

दोनों दल इक तरफ हो मानो ||20||


एक वाण दल दोऊ खपासी, 

साँवलशाह खाटू के वासी ||21||


बर्बरीक से हरि फरमावें, 

तेरी बात समझ नहिं आवे ||22||


प्रान बचाओ तुम घर जाओ, 

क्यों नादानपन दिखलाओ ||23||


तेरी जान मुफत में जासी, 

साँवलशाह खाटू के वासी ||24||


अगर विश्वास न तुम्हें मुरारी, 

तो कर लीजे जाँच हमारी ||25||


यह सुन कृष्ण बहुत हरषाये, 

बर्बरीक से वचन सुनाये ||26||


मैं अब लेऊँ परीक्षा खासी, 

साँवलशाह खाटू के वासी ||27||


पात विटप के सभी निहारो, 

बेंध एक वाण से सब डारो ||28||


कह इतना इक पात मुरारी, 

दबा लिया पद तले करारी ||29||


अजब रची माया अविनाशी, 

साँवलशाह खाटू के वासी  ||30||


बर्बरीक धनु बाण चढ़ाया, 

जानी जाय न हरि की माया ||31||


विटप निहार बली मुसकाया, 

अजित अमर अहिल्यावती जाया ||32||


बली सुमिर शिव बाण चलासी, 

साँवलशाह खाटू के वासी ||33||


बाण बली ने अजब चलाया, 

पत्ते बेध विटप के आया ||34||


गिरा कृष्ण के चरनों माहीं, 

विध पात हरि चरन हटाई ||35||


इनसे कौन फतेह किमि पासी, 

साँवलशाह खाटू के वासी ||36


कृष्ण बली से कहे बताओ, 

किस दल की तुम जीत कराओ ||37||


बली हार का दल बतलाया, 

यह सुन कृष्ण सनका खाया ||38||


विजय किस तरह पारथ पासी, 

साँवलशाह खाटू के वासी ||39||


छल करना कृष्ण ने विचारा, 

बली से बोले नंद कुमारा ||40||


ना जाने क्या ज्ञान तुम्हारा, 

कहना मानो बली हमारा ||41||


हो निज तरफ नाम पाजासी, 

साँवलशाह खाटू के वासी ||42||


कहे बर्बरीक कृष्ण हमारा, 

टूट न सकता प्रन है करारा ||43||


माँगे दान उसे मैं देता, 

हारा देख सहारा देता ||44||


सत्य कहँू ना झूठ जरासी, 

साँवलशाह खाटू के वासी ||45||


बेसक वीर बहादुर तुम हो, 

जचते दानी हमें न तुम हो ||46||


कहे बर्बरीक हरि बतलाओ, 

तुमको चहिये क्या फरमाओ ||47||


जो माँगे सो हमसे पासी, 

साँवलशाह खाटू के वासी ||48||


बली अगर तुम सच्चे दानी, 

तो मैं तुमसे कहूँ बखानी ||49||


समर भूमि बलि देने खातिर, 

शीश चाहिए एक बहादुर ||50||


शीश दान दे नाम कमासी, 

साँवलशाह खाटू के वासी ||51||


हम तुम तीनों अर्जुन माहीं, 

शीश दान दे को बलदाई ||52||


जिसको आप योग्य बतलायें, 

वही शीश बलिदान चढ़ायें ||53||


आवागमन मिटे चैरासी, 

साँवलशाह खाटू के वासी ||54||


अर्जुन नाम समर में पावे, 

तुम बिन सारथी कौन कहावे ||55||


मम शीश दान देहु भगवाना, 

महाभारत देखन मन ललचाना ||56||


शीश शिखर गिरि पर धरवासी, 

साँवलशाह खाटू के वासी ||57||


शीशदान बर्बरीक दिया है, 

हरि ने गिरि पर धरा दिया है ||58||


समर अठारह रोज हुआ है, 

कुरु दल सारा नाश हुआ है ||59||


विजय पताका पाण्डु फैहरासी, 

साँवलशाह खाटू के वासी ||60||


भीम, नकुल सहदेव, पारथ, 

करते निज तारीफ अकारथ ||61||


यों सोचें मन में यदुराया, 

इनके दिल अभियान है छाया ||62||


हरि भक्तों का दुःख मिटासी, 

साँवलशाह खाटू के वासी ||63||


पारथ,भीम आदि बलधरी, 

से यों बोले गिरिवर धरी ||64||


किसने विजय समर में पाई, 

पूछो सिर बर्बरीक से भाई ||65||


सत्य बात सिर सभी बतासी, 

साँवलशाह खाटू के वासी ||66||


हरि सबको संग ले गिरवर पर, 

सिर बैठा था मगन शिखर पर ||67||


जा पहँुचे झटपट नंदलाला, 

पुनि पँूछा शिर से सब हाला ||68||


सिर दानी है खुद अविनाशी, 

साँवलशाह खाटू के वासी ||69||


हरि यों कहै सही फरमाओ, 

समर विजयी है कौन बताओ ||70||


बली कहैं मैं सही बताऊँ, 

नहिं पितु चाचा बली नाहिं ताऊ ||71||


भगवत ने पाई स्याबासी, 

साँवलशाह खाटू के वासी ||72||


चक्र सुदर्शन है बलदाई, 

काट रहा था दल जिमि काई ||73||


रूप द्रौपदी काली का धर, 

हो विकराल ले कर में खप्पर ||74||


भर-भर रूधिर पिये थी प्यासी, 

साँवलशाह खाटू के वासी ||75||


मैंने जो कुछ समर निहारा, 

सत्य सुनाया हाल है सारा ||76||


सत्य वचन सुनकर यदुराई, 

वर दीन्हा शिर को हर्षाई ||77||


श्याम रूप मम धरि पुजासी, 

साँवलशाह खाटू के वासी ||78||


कलि में तुमको श्याम कन्हाई, 

पूजेगें सब लोग-लुगाई ||79||


मन वचन कर्म से जो ध्यावेंगे, 

मन इच्छा फल सब पायेंगे ||80||


‘सेवक’ सद्गति को पाजासी, 

साँवलशाह खाटू के वासी ||81||


भक्तों को धनवान बनाना, 

पत्नि गोद में सुमन खिलाना ||82||


रामकृष्ण वंश है शरन तिहारी, 

श्रीपति यदुपति कंुज बिहारी ||83||


सब सुखदायक आनन्द रासी, 

साँवलशाह खाटू के वासी ||84||


*** Singer - Sapna Vishwakarma ***



सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 14 Aug 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!