मेरा कर्मा तू, मेरा धर्मा तू तेरा सब कुछ मै, मेरा सब कुछ तू लिरिक्स || Mera karma too, mera dharma too tera sab kuchh main, mera sab kuchh too lyrics in hindi ||
मेरा कर्मा तू, मेरा धर्मा तू
तेरा सब कुछ मै, मेरा सब कुछ तू
हम्म आ आ...
हर करम अपना करेंगे,
ऐ वतन तेरे लिए
दिल दिया है,
जां भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए
तू मेरा कर्मा, तू मेरा धर्मा,
तू मेरा अभिमान है ।
ऐ वतन महबूब मेरे तुझपे दिल कुर्बान है
हम जियेंगे और मरेंगे, ऐ वतन तेरे लिए
दिल दिया है जां भी देंगे...
हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई,
हम वतन हम नाम हैं
जो करे इनको जुदा मज़हब नही इल्जाम है
हम जियेंगे और मरेंगे ऐ वतन तेरे लिए
दिल दिया है जां भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए
आ आ....
तेरी गलियों में चलाकर नफरतो को गोलियाँ
लूटते है कुछ लुटेरे दुल्हनों की डोलियाँ
लूट रहे हैं आप वो आपने घरों को लूट कर
खेलते है बेखबर अपने लहू से होलियां
हम जियेंगे और मरेंगे ऐ वतन तेरे लिए
🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "मेरा कर्मा तू, मेरा धर्मा तू तेरा सब कुछ मै, मेरा सब कुछ तू लिरिक्स || Mera karma too, mera dharma too tera sab kuchh main, mera sab kuchh too lyrics in hindi || Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।
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