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Hanuman Bhajan

अर्थ सहित श्री हनुमान स्तुति (Arth Sahit Sri Hanuman Stuti Lyrics in Hindi) - अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहम् Atulit Baldhamam Manojavam Marutatulya Vegam - Bhaktilok

346 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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हनुमान स्तुति: भक्ति का अद्वितीय मार्ग

श्री हनुमान की स्तुति से श्रद्धा और बल की प्राप्ति के लिए इस भजन का पाठ करें।

अर्थ सहित श्री हनुमान स्तुति (Arth Sahit Sri Hanuman Stuti Lyrics in Hindi) - अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहम् अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहम्। दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशम्। रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि।। मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतम् शरणं प्रपद्ये।। रामरक्षास्तोत्रम् 23 रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे। रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः॥ 'ॐ हनुमंते नम:'

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह भक्ति गीत श्री हनुमान जी की अनंत शक्ति और उनकी अद्वितीय विशेषताओं का वर्णन करता है। पहले पद में कहा गया है कि 'अतुलित बल धाम' अर्थात् वह जो अपार बल के स्वामी हैं। यह वाक्यांश हमें हनुमान जी के अद्वितीय बल और महिमा की याद दिलाता है। इसमें कहा गया है कि उनका शरीर 'हेमशैलाभदेहम्' जैसा है, अर्थात् जैसा कि सुनहरी पर्वत का दृश्य होता है। इसके आगे, उन्‍हें 'ज्ञानिनामग्रगण्यम्' कहा गया है, जो दर्शाता है कि वे ज्ञानी, बुद्धिमान और दक्ष भक्तों के सबसे प्रिय हैं। यह भी उल्लेखित है कि वे 'सकलगुणनिधानं' हैं, जो सभी गुणों का भंडार हैं। उनका गुणगान करते हुए, भक्त हनुमान जी की वानर रूप में विशेष स्थिति और रघुपतिप्रिय भक्त होने की भावना से प्रेरित होते हैं।

दूसरे पद में, भक्त हनुमान जी की गति और वेग की ओर संकेत करते हैं। 'मनोजवं' का अर्थ है जो मन की गति के समान तेज हैं, और 'मारुततुल्यवेगं' का अर्थ है जिनका वेग वायु के समान तेज है। ये विशेषताएँ हनुमान जी की अद्भुत क्षमताओं का बखान करती हैं। उनके 'जितेन्द्रियं' होने का अर्थ है कि उनके इन्द्रियां काबू में हैं, जो साधकों के लिए एक प्रेरणा है। भक्त प्रार्थना करता है कि मैं इस वायु के पुत्र, प्रमुख वानर, श्रीराम के दूत की शरण लेता हूं। यह शरणागति का भाव हमें यथार्थ भक्ति के मार्ग पर अग्रसर करता है।

इस स्तुति में भक्ति मार्ग की अद्भुत बातें भी छिपी हुई हैं। 'रामायण' का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह बताता है कि हनुमान जी वेदना और पीड़ा के समय पर हमेशा अपने भक्तों के साथ रहते हैं। इस स्तुति से यह चित्रित होता है कि जब भक्त हनुमान जी की प्रशंसा करते हैं और उनकी महिमा में लीन होते हैं, तो उनकी कृपा प्राप्त होती है। यहां ईश्वर की अद्वितीयता और भक्ति की शक्ति का गहरा संबंध है। हनुमान जी की अर्चना साधकों को आंतरिक शक्ति और साहस प्रदान करती है, जिससे वे अपने जीवन की कठिनाइयों पर विजय पा सकते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

हनुमान जी की स्तुति का महत्व भारतीय पौराणिक कथाओं में अत्यंत है। 'रामायण' के अनुसार, हनुमान जी ने भगवान राम की सेवा की और संकट मोचन के रूप में पहचाने गए। हनुमान जी की भक्ति, जैसी कि चित्रित की गई है, हमें न केवल शारीरिक बल देती है, बल्कि आध्यात्मिक बल भी प्रदान करती है। भक्तों के लिए यह जानना जरूरी होता है कि हनुमान चालीसा, मंत्र व स्तुतियाँ उनके सभी पापों को मिटा देती हैं और उन्हें मानसिक शांति प्रदान करती हैं। इसके अलावा, 'श्रीरामरक्षास्तोत्र' में भी हनुमान जी की महिमा का गुणगान किया गया है, जो उनकी अद्वितीय व्य्क्तित्व का प्रदर्शक है।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान स्तुति का पाठ करने से मानसिक स्थिरता, शारीरिक स्वास्थ्य और आध्यात्मिक विकास की प्राप्ति होती है। यह भक्तों को आत्म-विश्वास का अनुभव प्रदान करती है। मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक स्तर पर यह सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है, जिससे निराशा और चिंता दूर होती है। नियमित रूप से हनुमान जी की स्तुति करने वाले भक्तों का साधना का मार्ग प्रशस्त होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

हनुमान स्तुति का पाठ सर्वोत्तम सुबह के समय करना चाहिए, जब मन शांत और तरोताजा होता है। पूजा में दीप जलाएं, फल, मिठाइयाँ और फूल चढ़ाएं। पाठ करते समय शांत आसन में बैठें और हनुमान जी की छवि पर ध्यान केंद्रित करें। नियमितता इस साधना की महत्वपूर्ण कुंजी है। ध्यान और श्रद्धा के साथ इस भजन का पाठ करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

अर्थ सहित हनुमान स्तुति का क्या महत्व है?

यह स्तुति हनुमान जी की बलिदान, शौर्य और सेवाभाव का वर्णन करती है। भक्तों के लिए यह उनकी कृपा प्राप्ति का अत्यंत प्रभावी साधन है।

कब और कैसे हनुमान स्तुति का पाठ करना चाहिए?

हनुमान स्तुति सुबह के समय, ध्यान और श्रद्धा के साथ करनी चाहिए। विशेष समय पर लक्ष्मी पूजन के साथ इसे करना लाभकारी होता है।

हनुमान स्तुति से क्या लाभ होते हैं?

इस स्तुति से मानसिक शांति, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक प्रगति होती है। यह भक्तों को नकारात्मक ऊर्जा से मुक्त करती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Aug 2026

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