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Hanuman Bhajan

बालाजी हनुमान जी की आरती(Balaji Hanuman Ki Aartai in Hindi) - Bhaktilok

63 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्री हनुमान जी की आरती: संकटमोचन का स्तोत्र

हनुमान जी की इस आरती का गान करें और सभी संकट दूर करने का आशीर्वाद प्राप्त करें।

बालाजी हनुमान जी की आरती(Balaji Hanuman Ki Aartai in Hindi):- ॐ जय हनुमत वीरास्वामी जय हनुमत वीरा ।संकट मोचन स्वामीतुम हो रनधीरा ॥॥ ॐ जय हनुमत वीरा..॥पवन पुत्र अंजनी सूतमहिमा अति भारी ।दुःख दरिद्र मिटाओसंकट सब हारी ॥॥ ॐ जय हनुमत वीरा..॥बाल समय में तुमनेरवि को भक्ष लियो ।देवन स्तुति किन्हीतुरतहिं छोड़ दियो ॥॥ ॐ जय हनुमत वीरा..॥कपि सुग्रीव राम संगमैत्री करवाई।अभिमानी बलि मेटयोकीर्ति रही छाई ॥॥ ॐ जय हनुमत वीरा..॥जारि लंक सिय-सुधि ले आएवानर हर्षाये ।कारज कठिन सुधारेरघुबर मन भाये ॥॥ ॐ जय हनुमत वीरा..॥शक्ति लगी लक्ष्मण कोभारी सोच भयो ।लाय संजीवन बूटीदुःख सब दूर कियो ॥॥ ॐ जय हनुमत वीरा..॥रामहि ले अहिरावणजब पाताल गयो ।ताहि मारी प्रभु लायजय जयकार भयो ॥॥ ॐ जय हनुमत वीरा..॥राजत मेहंदीपुर मेंदर्शन सुखकारी ।मंगल और शनिश्चरमेला है जारी ॥॥ ॐ जय हनुमत वीरा..॥श्री बालाजी की आरतीजो कोई नर गावे ।कहत इन्द्र हर्षितमनवांछित फल पावे ॥॥ ॐ जय हनुमत वीरा..॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस आरती में भगवान हनुमान को अभिव्यक्त किया गया है, जो संकट मोचन और संकटों के निवारक हैं। पहले बोल में कहा गया है, 'ॐ जय हनुमत वीरास्वामी...' यह उनकी वीरता और बलिदान का प्रतीक है। हनुमान जी को भक्तों का संरक्षक मानते हुए उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त की गई है। प्रत्येक श्लोक में उनकी महिमा, शक्ति और उन पर भरोसा रखने के फल की चर्चा की गई है। 'पवन पुत्र अंजनी सूतमहिमा अति भारी' के माध्यम से उनके पवन पुत्र होने का गुणगान किया गया है और सूत के रूप में मां अंजनी की महिमा का उल्लेख है। इस आरती में भगवान की शक्ति को जीवन की समस्याओं के निवारण के तौर पर स्वीकार किया जाता है। यह भाव भक्त को यह संदेश देती है कि हर प्रकार की कठिनाई में हनुमान जी पर विश्वास करना चाहिए।

भक्ति की भावना को उभारे बिना, यह आरती भक्तों के भीतर अपने इष्ट देवता के प्रति सुरक्षा और साहस का संचार करती है। 'रामहि ले अहिरावण जब पाताल गयो' में हनुमान जी की साहसिकता का वर्णन है कि कैसे उन्होंने राम जी को कठिनाई से उबारा। यह कथा न केवल कठिन परिश्रम, बल्कि निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक है। जहां भक्त अपनी परेशानियों में हनुमान जी का सहारा लेते हैं, वहीं ये पंक्तियाँ उन्हें संघर्षों में साहस और धैर्य देती हैं। 'श्री बालाजी की आरती जो कोई नर गावे' से इसे स्पष्ट किया जाता है कि जो भी इस आरती का गान करता है, वह इंद्र के समान प्रसन्नता और इच्छित फल पाता है। यह एक प्रार्थना है कि हनुमान जी की कृपा से जीवन के सब संकट विलीन हो जाएँ।

इस आरती में भक्ति मार्ग का गहन अनुसरण किया गया है। यह दिखाता है कि कैसे हनुमान जी न केवल शक्ति, बल्कि भक्ति के भी प्रतीक हैं। भक्त को स्पष्ट रूप से यह समझाया गया है कि सच्चे मन से की गई भक्ति हनुमान जी को प्रसन्न कर सकती है। यह एक श्रद्धा भाव है जो भक्त को उनके निकट ले जाता है। हनुमान जी की महिमा को समझना और उनके प्रति पूर्ण समर्पण करना, भक्त को आंतरिक शांति और संतोष प्रदान करता है। आरती का गान एक साधना है, जो विश्वास और प्रेम के साथ की जाए तो मनोकामनाओं के पूर्ण होने का मार्ग प्रशस्त करती है। भक्तों को यह प्रेरणा मिलती है कि हर समस्या का समाधान हनुमान जी के पास है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस आरती का महत्व भारतीय पौराणिक कथाओं में गहरा है। रामायण में हनुमान जी की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। वे राम जी के प्रिय भक्त और उनके लिए हर संकट में सहायक रहे हैं। हनुमान जी का नाम सुनना ही भक्तों में साहस भर देता है। इस आरती में उनकी महिमा का गायन करते हुए भक्त हनुमान को अपने जीवन में बुलाते हैं। यह भक्ति, श्रद्धा और सुरक्षा का प्रतीक है। पुराणों में भी हनुमान जी की उपासना के माध्यम से सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति का उल्लेख है। इसलिए इस आरती को गाने का महत्व सिर्फ आध्यात्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक स्तर पर भी गहरा है।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान जी की आरती का नियमित जाप मानसिक शांति, धैर्य और साहस में वृद्धि करता है। यह व्यक्ति को आत्मिक शक्ति प्रदान करता है और नकारात्मक ऊर्जा से दूर रखता है। आरती का गान करने से मानसिक तनाव कम होता है और हनुमान जी की कृपा से भक्त के जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

हनुमान जी की आरती गाने का सबसे उपयुक्त समय सुबह या शाम है। पूजा करते समय एक दीया जलाएँ और हनुमान जी के चरणों में पुष्प अर्पित करें। आरती के समय भावार्थ के साथ ध्यान लगाएँ और मन को एकाग्र करें। सफाई और शुद्धता का ध्यान रखना आवश्यक है, ताकि भक्ति पूर्ण हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या बालाजी हनुमान जी की आरती का विशेष समय है?

इसे सुबह या शाम के समय गाना सबसे लाभदायक माना जाता है। इस समय मन और आत्मा शुद्ध रहते हैं।

आरती का गान करते समय क्या करना चाहिए?

आरती के दौरान दीया जलाने, पुष्प अर्पित करने और ध्यान लगाने से हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है। लक्ष्मण के प्रति उनकी भक्ति को याद करें।

हनुमान जी की आरती गाने से क्या लाभ होता है?

यह मानसिक शांति, साहस, और सफलताओं में वृद्धि के लिए लाभकारी होती है। इससे भक्तों को समस्या समाधान में सहायता मिलती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Aug 2026

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