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धोबिया मेरा मेल छुड़ा दे लिरिक्स (Dhobiya Mera Mail Chhuda De Lyrics in Hindi) - New Bhakti Bhajan - Bhaktilok

269 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

 

धोबिया मेरा मेल छुड़ा दे लिरिक्स (Dhobiya Mera Mail Chhuda De Lyrics in Hindi) - 


धोबिया मेरा मेल छुड़ा दे

धोबिया मेरा मेल छुड़ा दे


धोबिया मेरा मेल छुड़ा दे

धोबिया मेरा मेल छुड़ा दे


ओ धोबिया मेरा मेल छुड़ा दे

धोबिया मेरा मेल छुड़ा दे


जनम जनम की मैली चादर

जनम जनम की मैली चादर उजली कर पहनना दे


ओ धोबिया मेरा मेल छुड़ा दे

धोबिया मेरा मेल छुड़ा दे


आसा धोबी पात लगाना

आसा धोबी पात लगाना

आसा धोबी पात लगाना


धुल जाए मेरा तन बना

धुल जाए मेरा तन बना


ध्यान की सबुन प्रेम का पानी

अपनी करुणा कर से लगना

अपनी करुणा कर से लगना


एएसआई निर्मल कर्ण इसको

एएसआई निर्मल कर्ण इसको

जो इसको राम मिला दे

जो इसको राम मिला दे


ओ धोबिया मेरा मेल छुड़ा दे

धोबिया मेरा मेल छुड़ा दे


सारे दाग मिटा ना इसके

सारे दाग मिटा ना इसके


सारे दाग मिटा ना इसके

परात परात इस्की सुलझना

परात परात इस्की सुलझना


तार तार को शीतल करना

तार तार को शीतल करना


लौट कर फिर पडना आना

लौट कर फिर पडना आना


धीरज की धूप लगा कर

धीरज की धूप लगा कर

ज्यों की त्यों लौटा दे


ओ धोबिया मेरा मेल छुड़ा दे

धोबिया मेरा मेल छुड़ा दे


ओ धोबिया मेरा मेल छुड़ा दे

धोबिया मेरा मेल छुड़ा दे


धोबिया मेरा मेल छुड़ा दे


धोबिया मेर मेल चाहुद दे

धोबिया मेर मेल चाहुद दे


ओ धोबी मेर मेल चाहुद दे

धोबिया मेर मेल चाहुद दे


जनम जनम की मैली चादर

जनम जनम की मैली चादर उजली कर पहन दे


ओ धोबी मेर मेल चाहुद दे

धोबिया मेर मेल चाहुद दे


जैसे धोबी पाट लगाना

जैसे धोबी पाट लगाना

जैसे धोबी पाट लगाना


धुल जाए मेर तन बना

धुल जाए मेर तन बना


ध्यान सबुन प्रेम का पानी

आपनी करुण कर से लगना

अपनी करुण कर से लगन


एएसआई निर्मल करण इसाको

एएसआई निर्मल करण इसाको

जो इसाको राम मिल दे

जो इसाको राम मिल दे


ओ धोबी मेर मेल चाहुद दे

धोबिया मेर मेल चाहुद दे


सारे दाग़ मिट एन इसाके

सारे दाग़ मिट एन इसाके


सारे दाग़ मिट एन इसाके

परत परत इसाकी सुलजहाना

परत परत इसाकी सुलजहान


तार तार को शीतल करना

तार तार को शीतल करना


लौट कर फिर पढें आना

लौट कर फिर पढें आना


धीरज की धूप लग कर

धीरज की धूप लग कर

ज्यों की त्यों लौट दे


ओ धोबी मेर मेल चाहुद दे

धोबिया मेर मेल चाहुद दे


ओ धोबी मेर मेल चाहुद दे

धोबिया मेर मेल चाहुद दे ||


  • ⇨Album : Dhobiya
  • ⇨Singer : Prakash Gandhi
  • ⇨Music : Gandhi Brothers (Prakash-Subhash Gandhi)
  • ⇨Lyrics :- Traditional
  • ⇨Director/DOP/Edit :- Narpat Dhrath
  • ⇨Music Label : Power Music Company
  • ⇨Category : Bhajan


सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "धोबिया मेरा मेल छुड़ा दे लिरिक्स (Dhobiya Mera Mail Chhuda De Lyrics in Hindi) - New Bhakti Bhajan - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 27 Aug 2026

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