क्या खिलाया जाए तुझे क्या पिलाया जाए लिरिक्स (Kya Khilaya Jaye Tujhe Kya Pilaya Jaye Lyrics in Hindi) - Shiv Bhajan:-
क्या खिलाया जाए तुझे क्या पिलाया जाए लिरिक्स (Kya Khilaya Jaye Tujhe Kya Pilaya Jaye Lyrics in Hindi):-
क्या खिलाया जाय
तुझे क्या पिलाया जाय
बोल भोलेनाथ तुझे
क्या भोग लगाया जाय।।
आप खुश हो जाये मै वो ही मंगवा दू
अक धतूरे कि बूटी बोलो पिसवा दू
बोलो भोलेजी बोलो
जरा अंखिया तो खोलो
भांग घुटवा दू
किशमिश डाली जाय
बादाम मिलाया जाय
बोल भोलेनाथ तुझे
क्या भोग लगाया जाय।।
बर्फी रबड़ी कलाकन्द भी आ जाय
हलवा पूरी कहो तो अभी बन जाय
खिर चुरमे के साथ बोलो हे भोलेनाथ
और क्या लाउं
दहि मंगाया जाय
रायता बनवाया जाय
बोल बाबा बोल तुझे
क्या भोग लगाया जाय।।
आम अमरुद खाओ बाबा खरबूजा
सेब संतरा अनार लेलो तरबुजा
काले अंगुर प्यारे संग मे आलु बुखारे
पियो रुहे अफ़्जा
दुध चढाया जाय
जो तेरे मन को भाए
बोल बाबा बोल तुझे
क्या भोग लगाया जाय।।
गंगा के जल की कावड़ भी में लाउ
बढे प्रेम से भोलेजी तुम्हे नहलाउ
बोलु बम बम का नारा जो लगे तुझको प्यारा
फ़ुल बरसाउ
भस्म रमाइ जाय
फ़िर शंख बजाया जाय
बोल भोलेनाथ तुझे
क्या भोग लगाया जाय।।
क्या खिलाया जाय
तुझे क्या पिलाया जाय
बोल भोलेनाथ तुझे
क्या भोग लगाया जाय।।
क्या खिलाया जाय
तुझे क्या पिलाया जाय
बोल भोलेनाथ तुझे ||
🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
देवादिदेव महादेव को समर्पित यह भजन "क्या खिलाया जाए तुझे क्या पिलाया जाए लिरिक्स (Kya Khilaya Jaye Tujhe Kya Pilaya Jaye Lyrics in Hindi) - Shiv Bhajan - Bhaktilok" भगवान शिव के कल्याणकारी और वैराग्यपूर्ण रूप का सजीव चित्रण करता है। शिव का अर्थ ही कल्याण है। इस भजन के शब्दों के माध्यम से साधक शिव की अनंत चेतना, भस्म आरती, डमरू की ध्वनि और ध्यानमग्न मुद्रा का ध्यान करता है।
शिव भक्ति का मूल सिद्धांत यही है कि जगत की प्रत्येक नश्वर वस्तु का अंत शिव में ही होना है। यह भजन भक्त को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर आत्मा के वास्तविक स्वरूप को पहचानने की प्रेरणा देता है। शिव का नाम पंचमहाभूतों को नियंत्रित करने वाली परम शक्ति का प्रतीक है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव अत्यंत भोले हैं और साधारण जल तथा बेलपत्र अर्पण करने मात्र से भी प्रसन्न हो जाते हैं। इस शिव भजन का संकीर्तन करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और कुंडली के ग्रहों के दोष शांत होते हैं।
भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। नियमित शिव भजन और पंचाक्षरी मंत्र (ॐ नमः शिवाय) के जप से तनाव का नाश होता, अवसाद दूर होता है और अंतर्मन में अपूर्व शांति का उदय होता है। यह आरोग्य और दीर्घायु प्रदान करने में भी सहायक है।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
शिव संकीर्तन के लिए प्रदोष काल (संध्या समय) अथवा सोमवार का दिन सर्वोत्तम माना जाता है। उत्तर दिशा की ओर मुख करके कुशासन पर बैठकर शिवजी का ध्यान करते हुए भजन गाएं।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न करने की सरल विधि क्या है?
शुद्ध जल, बेलपत्र, धतूरा अर्पित करते हुए श्रद्धापूर्वक शिव मंत्र अथवा भजनों का संकीर्तन करने से महादेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
शिव भजनों के लिए कौन सा दिन विशेष है?
सोमवार, प्रदोष व्रत की तिथि और महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की उपासना और भजन संकीर्तन के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
क्या शिव जी की उपासना से कुंडली के दोष दूर होते हैं?
हाँ, भगवान शिव (महाकाल) की आराधना से कालसर्प दोष, राहु-केतु दोष और शनि जनित कष्टों का निवारण होता है।
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