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Parvati Stotram

पारस जिनंदा मोरी (Paras Jinnada Mori Lyrics in Hindi) - Jain Bhajan - Bhaktilok

65 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रभु पारस जिनंदा की भक्ति: सम्पूर्णता का मार्ग

इस भजन के माध्यम से जिनेंद्र की कृपा की अपार महत्ता को समझा जा सकता है।

पारस जिनंदा मोरी, पारस जिनंदा मोरी, पारस जिनंदा मोरी। पारस जिनंदा मोरी, पारस जिनंदा मोरी, पारस जिनंदा मोरी। जो मघि मैया नाम दूं, तो दोबार सुगंध दूं। जो मघि मैया नाम दूं, तो दोबार सुगंध दूं। गुण कहूं गीत कान्हा की, मूंदेश्वर बात ही बात की। गुण कहूं गीत कान्हा की, मूंदेश्वर बात ही बात की। पारस जिनंदा मोरी, पारस जिनंदा मोरी, पारस जिनंदा मोरी। पारस जिनंदा मोरी, पारस जिनंदा मोरी, पारस जिनंदा मोरी।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह भजन 'पारस जिनंदा मोरी' जिनेंद्र भगवान की महिमा का गान है। 'पारस' का अर्थ है वह तत्व जो लौहे को सोने में बदल सकता है, यह एक प्रतीक है पहचान और परिवर्तन का, जो हमें आवश्यकता पड़ी उस क्षण के समय हमें ध्यान में रखते हुए हमे प्रभु की औद्धेश्यिकता का स्मरण कराया जाता है। भजन के आरम्भ में पारस जिनंदा का नाम न लेकर हम यह इंगित करते हैं कि जिनेंद्र ही हमारे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाले हैं। 'जो मघि मैया नाम दूं, तो दोबार सुगंध दूं' ये पंक्तियाँ हमें यह बताते हैं कि जिनेंद्र का स्मरण हमारी मन की शुद्धता को बहाल करता है, जो पुनः हमें सूक्ष्मता और संतुलन की ओर ले जाता है।

इस भजन में भक्ति और श्रद्धा का सुंदर समावेश है। श्रद्धा के साथ भगवान का स्मरण केवल बुद्बुधा का कार्य नहीं, बल्कि यह आत्मा की गहराईयों में जाकर एक अद्वितीय एहसास करवाने का कार्य है। 'गुण कहूं गीत कान्हा की' इस पंक्ति में जिनेंद्र के गुणों का बखान किया गया है, जो हमें माया के बंधनों से मुक्त करने का संकल्प दर्शाते हैं। यहाँ भक्ति की भावनाएँ उभरकर सामने आती हैं, जिससे भक्त प्रभु में तल्लीन होकर उन्हें अपना जीवन साधक मानता है।

भक्ति मार्ग पर चलने का यह प्रेरणादायक भजन हमें बताते हैं कि कैसे हम अपने जीवन में आंतरिक शांति प्राप्त कर सकते हैं। जिनेंद्र को अपना सर्वस्व समर्पित करना, हमें इस बात का अहसास कराता है कि शुद्धता और ज्ञान की प्राप्ति के लिए यह आवश्यक है कि हम अपने मन से सभी विकारों को दूर करें। जिनेंद्र का चरित्र हमें लौकिक जीवन में भी एक अनन्त स्वर्णिम मार्ग दिखाता है, जहाँ सच्चा प्रेम और करुणा ही सर्वोच्च है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन जैन धर्म में भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। जैन परंपरा में जिनेंद्र भगवान का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है, और यह भजन उनके प्रति समर्पण और भक्ति को दर्शाता है। औपनिषदिक सिद्धांत 'सत्यं ज्ञानं अनंतं ब्रह्म' का अनुसरण करते हुए भक्त अपने जीवन में जिनेंद्र के ध्यान से शुद्धता और ज्ञान की प्राप्ति की कामना करते हैं। जैन ग्रंथों में, जिनेंद्र के गुणों का वर्णन पूजा आराधना और आत्मिक उन्नति का साधन माना गया है, जो इस भजन में स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप करने से भक्तों को मानसिक संकुलता, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का अनुभव होता है। नियमित जाप करने से तनाव कम होता है, और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। यह भजन भक्त की आस्था को बढ़ाता है और उन्हें जीवन के कठिन समय में सहारा प्रदान करता है, परिणामस्वरूप यह आत्म-संवाद और ध्यान की साधना में सहायता करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह सूर्योदय के समय या शाम के समय किया जा सकता है। पूजा स्थल पर स्वच्छता बनाए रखते हुए एक दीप जलाना और पुष्प अर्पित करना उचित है। श्रद्धा के साथ ध्यान मुद्रा में बैठकर इसे गायन करना चाहिए, जिससे आत्मा की गहराइयों में जाकर भक्त भगवान से एकाकार हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

पारस जिनंदा मोरी भजन का अर्थ क्या है?

यह भजन जिनेंद्र भगवान की महिमा का बखान करता है और भक्ति के माध्यम से मानव जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संदेश देता है।

इस भजन को कब और कैसे गाना चाहिए?

इस भजन का पाठ सुबह या शाम की आरती में श्रद्धा भाव से किया जा सकता है, दीप जलाकर और लक्ष्मी जी का ध्यान करते हुए।

क्या इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति मिलती है?

हाँ, यह भजन मानसिक शांति और सुख की प्राप्ति में सहायक है, क्योंकि यह भक्ति और ध्यान को एक जगह लाता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Aug 2026

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