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तेरी शरण में आया मैं बाबा मेरी लाज रखना (Teri Sharan Me Aaya Main Baba Meri Laaj Rakhana Lyrics in Hindi) - Shyam Bhajan - Bhaktilok

87 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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गहन भक्ति भाव से संचालित श्याम भजन

इस भजन का पाठ करते हुए भगवान श्री कृष्ण की शरण में पूर्ण विश्वास के साथ ध्यान करें।

तेरी शरण में आया मैं बाबा मेरी लाज रखना

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन के माध्यम से भक्त भगवान श्री कृष्ण से अपनी आस्था और विश्वास प्रकट कर रहे हैं। 'तेरी शरण में आया मैं' की पंक्ति दर्शाती है कि भक्त ने भगवान कृष्ण के चरित्र और उनकी कृपा पर विश्वास किया है। यह भक्ति एक गहराई से भरे हुए भाव के साथ प्रकट की गई है, जिसमें भक्त ने अपने जीवन की सभी बाधाओं और मुश्किलों को भगवान के चरणों में समर्पित कर दिया है। 'मेरी लाज रखना' का भाव इस संसार में भगवान से सुरक्षा और रक्षा की निवेदन करता है, जो हर भक्त की नैतिकता और आत्म-सम्मान के लिए आवश्यक है।

भावार्थ की दृष्टि से इस भजन में एक अत्यंत भावुक वरदान मांगी जा रही है। भक्त अपने जीवन की समस्याओं और अनिश्चितताओं को एक सच्चे प्रेमी की भांति भगवान को सौंप देते हैं। यहाँ पर 'लाज' का मतलब केवल शारीरिक अस्तित्व नहीं है, बल्कि एक आधिकारिक पहचान और आत्मिक शुद्धता से जुड़ा हुआ है। भक्त की यह कामना होती है कि भगवान उनके सम्मान और प्रतिष्ठा की रक्षा करें, क्योंकि वे जानते हैं कि श्री कृष्ण ही अपने भक्तों की सुरक्षा करते हैं।

इस भजन के माध्यम से भक्ति मार्ग का विस्तार किया गया है, जो जीवन के सभी पहलुओं में भक्ति और समर्पण की आवश्यकता को संकेतित करता है। यह अनुपम प्रेम का प्रतीक है, जिसमें भक्त अपनी सीमाओं को पार करके सीधे अपने ईश्वर से जुड़े रहने की जुगत में रहता है। यह हमें सिखाता है कि भक्ति न केवल एक अनुष्ठान है, बल्कि यह एक व्यक्तिगत संबंध है, जिसमें भक्त और भगवान के बीच एक गहरा बंधन है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भारतीय धार्मिकता में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है, जिसमें भगवान कृष्ण को अपने आसरे लेने की शक्ति का वर्णन किया गया है। पुराणों में भी, कृष्ण की भक्ति एक अनिवार्य केंद्रीय विषय है, जो प्रेम और समर्पण के माध्यम से भक्तों को उनके जीवन के अंधेरे क्षणों से बाहर निकालता है। भगवद गीता में भी भगवान श्री कृष्ण ने अपने भक्तों की सभी आवश्यकताओं और समस्याओं का समाधन किया है, जिससे यह भजन उनकी महानता और कृपा का परिचायक है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, सुरक्षा और संतोष की प्राप्ति होती है। यह भक्ति की आस्था को मजबूत करने के साथ-साथ भक्त को भौतिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टियों से सशक्त बनाता है, जिससे जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का सहेज पाठ सुबह या शाम के समय किया जा सकता है। दीप जलाकर और भगवान की प्रतिमा के आगे पुष्प अर्पित करें। ध्यान रखें कि मन में भावनाएं साफ और सुखद रहें, जिससे भजन का अर्पण भाव से और भी प्रभावी हो।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि भक्त भगवान श्री कृष्ण की शरण में जाकर अपनी समस्याओं और लज्जाओं को उन पर छोड़ देता है।

भजन का पाठ करने का सही समय क्या है?

इस भजन का पाठ सुबह या शाम के समय करना सबसे अच्छा होता है, जब भक्त शांत मन से भगवान की कृपा का ध्यान कर सके।

क्या इस भजन का पाठ नियमित रूप से करना आवश्यक है?

हाँ, इस भजन का नियमित पाठ करने से भक्त की आस्था मजबूत होती है और उन्हें जीवन की कठिनाइयों में भगवान का आश्रय मिलता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 22 Aug 2026

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