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तेरी शीतल शीतल मूरत लख (Teri Shital Shital Murat lakhh Lyrics in Hindi) - Jain Bhajan - Bhaktilok

76 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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शीतल मूरत: श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक

इस भजन के माध्यम से शान्ति और सौम्यता की खोज करें और ईश्वर की दिव्य मूरत का स्मरण करें।

तेरी शीतल शीतल मूरत लख, तेरे नामों का गूंजे गगन। तेरी शीतल शीतल मूरत लख, तेरे नामों का गूंजे गगन। अहिंसा के मार्ग पर तू चल, प्रेम की है गूँज अनंत। तेरी शीतल शीतल मूरत लख, तेरे नामों का गूंजे गगन। दया का सूरज चमका जीवन में, तू है करुणा का अवतार। तेरी शीतल शीतल मूरत लख, तेरे नामों का गूंजे गगन। संग हर दुख का मिटता पहर, तेरे साथ है शांति का भंडार। तेरी शीतल शीतल मूरत लख, तेरे नामों का गूंजे गगन। तेरी कृपा से जीवन पार करूँ, संग तुम हो, सब बाधा से पार। तेरी शीतल शीतल मूरत लख, तेरे नामों का गूंजे गगन।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मूल संदेश ईश्वर की शीतलता और दिव्यता को प्रकट करना है। 'तेरी शीतल शीतल मूरत लख' का अर्थ है कि हम ईश्वर की निर्दोष और कल्याणकारी रूप को दृष्टिगोचर करते हैं। इस गीत में अहिंसा, प्रेम और करुणा के गुणों का वर्णन किया गया है। संपूर्ण जीवन में शांति और संतोष की खोज में, हम उस दिव्य शक्ति को स्मरण करते हैं जो हमारे जीवन में प्रकाश और दिशा देती है। शीतलता का भाव केवल बाह्य रूप में नहीं, बल्कि आंतरिक शांति का भी प्रतीक है। जब हम ईश्वर की मूरत की शीतलता का ध्यान करते हैं, तो हमारी आत्मा में संतोष और शांति का अनुभव होता है।

भावार्थ के दृष्टिकोन से, यह भजन हमें एक गहरी भावना में डुबोता है जहाँ हमें अपनी समस्त बाधाओं और कठिनाइयों के पार जाने का मार्ग दिखाता है। 'दया का सूरज चमका जीवन में' वाक्य हमें स्मरण कराता है कि जब हम ईश्वर के साथ होते हैं, तब अंधकार का कोई अस्तित्व नहीं रह जाता। ईश्वर की कृपा हर कठिनाई से हमें उबारती है। गहन तप और भक्ति से हम अपने मन की नकारात्मकता को दूर कर सकते हैं और प्रेम, शांति और करुणा के मार्ग पर चल सकते हैं। यह भजन हमें उस शक्ति का आभास कराता है जो हमारे भीतर अंतर्निहित है, जिससे हम हर नकारात्मकता को पीछे छोड़ सकते हैं।

इस भजन में भक्ति मार्ग की शुद्धता का भी महत्वपूर्ण ध्यान रखा गया है। भक्ति मार्ग केवल पूजा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक आंतरिक सफाई और आत्मज्ञान प्राप्त करने की प्रक्रिया है। यहाँ अहिंसा, प्रेम, और करुणा के प्रति प्रगाढ़ता से जोड़ते हुए, हम समझते हैं कि वास्तविक भक्ति तभी पूर्ण होती है जब हम इन सिद्धांतों को अपने जीवन में लागू करें। जब हम अपने क्रोध और द्वेष को छोड़कर, प्रेम और करुणा के मार्ग पर चलते हैं, तब हम अनुभव करते हैं कि हमारी आत्मा शुद्ध होती है और ईश्वर के करीब पहुँचती है। इस भजन के माध्यम से, हम समझते हैं कि सच्चा भक्त वही है, जो अपने जीवन में अहिंसा और दया को प्राथमिकता देता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन जैन धर्म में अहिंसा और करुणा के मूल सिद्धांतों को अभिव्यक्त करता है। जैन ग्रंथों में, अहिंसा को सर्वोच्च धर्म माना गया है और यह भजन इसको जीवित करता है। 'अहिंसा के मार्ग पर तू चल' पंक्ति हमें यह सिखाती है कि हमारे विचार और कर्मों में अहिंसा का पालन होना चाहिए। जैन संस्कृति में यह विश्वास है कि करुणा का विकास और सभी जीवों के प्रति प्रेम ही सच्ची भक्ति का संकेत है। यह भजन हमें आदर्श जीवन जीने के लिए प्रेरित करता है और एक समर्पित स्वभाव के साथ अपने अंदर की दिव्यता को पहचानने का मार्ग दिखाता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप मानसिक स्थिरता और आत्मिक शांति को बढ़ावा देता है। जब हम 'तेरी शीतल शीतल मूरत लख' का उच्चारण करते हैं, तो यह हमारे चित्त को शांत करता है एवं नकारात्मक भावनाओं को दूर करता है। नियमित रूप से इस भजन का जाप करने से मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है, भावनात्मक स्थिरता मिलती है, और आध्यात्मिक उन्नति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह या शाम को करना सबसे अच्छा होता है। पूजा करते समय स्वच्छता का ध्यान रखें, दीपक जलाएँ और फूलों का श्रद्धापूर्वक अर्पण करें। आदर्श स्थिति है कि आप पद्मासन में बैठकर ध्यान केंद्रित करें, जिससे मन में एकाग्रता और शांति बनी रहे। इस प्रक्रिया में नियमितता और पूर्ण विश्वास आवश्यक है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य भाव क्या है?

इस भजन का मुख्य भाव ईश्वर की शीतलता और करुणा का स्मरण करना है। यह जैन धर्म की मूल विचारधारा को उजागर करता है, जिसमें अहिंसा और प्रेम का महत्व है।

क्या इस भजन का जाप करने से कोई विशेष लाभ मिलता है?

हाँ, इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक विकास मिलता है। यह नकारात्मकता को दूर करने और सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने में मदद करता है।

इस भजन की उत्पत्ति और प्रासंगिकता क्या है?

यह भजन जैन धर्म की भक्ति परंपरा से संबंधित है और यह अहिंसा और करुणा के सिद्धांतों को व्यक्त करता है। इसके माध्यम से विश्व में शांति और समर्पण का संदेश फैलता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Aug 2026

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