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Hanuman Bhajan

बालाजी का डंका (Balaji Ka Danka Lyrics in Hindi) - Hanuman Bhajan Sunil Sarvottam जय अंजनी लाल केसरी नंदन प्यारे - Bhaktilok

88 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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बालाजी की महिमा: संकट में सहारा

प्रभु हनुमान की कृपा से सभी दुख खत्म होते हैं। इस भजन का पाठ करें और आशीर्वाद प्राप्त करें।

बालाजी का डंका (Balaji Ka Danka Lyrics in Hindi) - जय हो अंजनी लाल केसरी नंदन प्यारे......एक हाथ में पर्वत साजे दूजे गदा विराजे बालाजी बजरंग बली का जग में डंका बाजे, जग में डंका बाजे एक हाथ में पर्वत साजे...........लाल लंगोटा हाथ में सोटा तन सिन्दूरी चोला उनकी जल्दी सुन लेता है राम राम जो बोलासोये भाग जगा देता है बिगड़ी बात बनादे, बिगड़ी बात बनादे एक हाथ में पर्वत साजे...........भोग मेरे बजरंग बली का देसी घी का चूरमा इनके बल से कांपे दानव आये कितने सूरमा एक हाँक से बालाजी की भूत प्रेत भी भागे, भूत प्रेत भी भागे एक हाथ में पर्वत साजे...........सच्चे मन से बालाजी को जिसने पुकारा दीन दुखी मजबूरों को वो देते हैं सहारा बालाजी को सभी मनाते क्या राजे महाराजे, क्या राजे महाराजे एक हाथ में पर्वत साजे...........

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय हनुमान जी की महानता और उनकी अनंत शक्ति का बखान करना है। हनुमान जी को 'बालाजी' के नाम से पुकारा जाता है, जिनका वर्णन भजन में 'एक हाथ में पर्वत साजे' के रूप में किया गया है। यह दर्शाता है कि वे अपनी शक्ति के बल पर पर्वत को उठाने की क्षमता रखते हैं। भजन कहता है कि 'बजरंग बली का जग में डंका बाजे' है, अर्थात उनकी उपस्थिति से संपूर्ण विश्व में सुरक्षा और शक्ति का संचार होता है। भक्ति भाव से यदि कोई 'राम राम' का जाप करता है, तो हनुमान जी उसकी बिगड़ी बातों को बना देते हैं। यह विश्वास इस भक्तिपूर्ण भजन के प्रत्येक शेर में दिखाई देता है, जिसमें भक्ति का कल्याणकारी स्वरूप है।

भजन में यह स्पष्ट किया गया है कि हनुमान जी हमेशा अपने भक्तों की सुनते हैं। 'दीन दुखी मजबूरों को वो देते हैं सहारा' यह पंक्ति उनकी करुणा और प्रेम को दर्शाती है। यह भावार्थ न केवल भक्ति की गहराई को व्यक्त करता है, बल्कि समाज के सबसे कमजोर वर्ग के प्रति उनकी दीर्घ दृष्टि को भी दर्शाता है। भजन में 'भूत प्रेत भी भागे' का उल्लेख यह संकेत करता है कि हनुमान जी की शक्ति से सभी प्रकार के बुराई और नकारात्मकता का नाश किया जा सकता है। यह भक्ति का संवेदनशील आयाम है, जो भक्तों को निराशा के समय में बल देता है।

भक्ति मार्ग का अनुसरण करते हुए, भक्तों को समर्पण और विश्वास के साथ हनुमान जी का स्मरण करना चाहिए। 'सच्चे मन से बालाजी को जिसने पुकारा' से यह सिद्ध होता है कि भक्ति में सच्चाई और लगन आवश्यक है। यह भजन अहंकार और सांसारिक बंधनों से परे हटकर एक सच्चे भक्त की पहचान को दर्शाता है। यह स्पष्ट है कि हनुमान जी की सेवा और भक्ति से कोई भी कठिनाई दूर की जा सकती है। यह भक्तिपूर्ण आस्था का एक अद्वितीय रूप है जो हमें भक्ति के मार्ग पर चलते रहने के लिए प्रेरित करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

हनुमान जी की उपासना का उल्लेख हिंदू धर्म में विभिन्न पुराणों, विशेषकर रामायण में व्यापकता से मिलता है। वे राम के परम भक्त माने जाते हैं और उन्हें संकटों से छुटकारा दिलाने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। ये भाव व्यक्त करते हैं कि हनुमान जी की कृपा से भक्तों की सभी परेशानियों का समाधान संभव है। हनुमान चालीसा एवं अन्य ग्रंथों में भी उनकी शक्ति और सहायता का विवरण मिलता है। भक्तों द्वारा उनकी आराधना करने से न केवल आध्यात्मिक बल प्राप्त होता है, बल्कि भौतिक जीवन में भी सुख-शांति की प्राप्ति होती है।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान जी का जीवन पर आधारित भजन सुनने से सुनने वाले को मानसिक शांति, आध्यात्मिक स्फूर्ति और आत्मविश्वास मिलता है। इसे गाने या सुनने से हृदय में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मानसिक तनाव कम होता है। भक्तिपूर्ण भावना से हनुमान जी की उपासना करने से जीवन में सामर्थ्य का अनुभव होता है, जिससे कठिनाइयों का सामना करने की क्षमता बढ़ती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

हनुमान जी का भजन 'बालाजी का डंका' सुबह या शाम के समय गाना सबसे उचित होता है। पूजा करते समय एक दीया जलाना, पुष्प अर्पित करना और उनकी छवि के समक्ष बैठकर मन में श्रद्धा और समर्पण भाव रखकर भजन का उच्चारण करना चाहिए। यह ध्यान रहे कि मन में शुद्धता और शांति के साथ भजन गाने से आशीर्वाद सुनिश्चित होता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

बालाजी का डंका भजन किस बारे में है?

यह भजन हनुमान जी की शक्ति, सहानुभूति और भक्तों की कठिनाईयों के समाधान के बारे में है। इसमें उनकी महिमा का गुणगान किया गया है।

यह भजन सुनने से क्या लाभ होता है?

इस भजन को सुनने से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है। इससे तनाव कम होता है और हृदय में सुकून का अनुभव होता है।

इस भजन का पाठ करने का सही समय कौन सा है?

भजन का पाठ सुबह या शाम करना उचित होता है। पूजा के समय दीया जलाकर, श्रद्धा पूर्वक भजन गाना चाहिए।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 22 Aug 2026

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