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Hanuman Bhajan

फरियाद मेरी सुनके हनुमान चले आना (Fariyad Meri Sunke Hanuman Chale Aana Lyrics in Hindi) - By Sandeep Rajput Hanuman Bhajan - BHaktilok

97 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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हनुमान की कृपा: संकट कातु सायक भजन

हनुमान चालीसा की प्रेरणा से, संकट में हमारी रक्षा करें, मन से निस्वार्थ भाव से गाएं।

फरियाद मेरी सुनके हनुमान चले आना। तेरी कृपा से ही सब, दुखों से हम बचाना। दूर कहीं मैं हूँ खोया, तेरा ही ध्यान लगाना। फरियाद मेरी सुनके हनुमान चले आना। लंबोदर, धरणीधर, कपीश्वर तेरा नाम। राम के दास तू है, आता है तू हर काम। तेरे ही गुण गाते, सदा सुमिरन तेरी आरती। फरियाद मेरी सुनके हनुमान चले आना। जेव्हा मैं अकेला हूँ, कर दे तू बातें मुझसे। सब शोक मिटा दे, मेरी राह दिखा दे। तेरी महिमा बखानूँ, भक्ति से समर्पित हूँ। फरियाद मेरी सुनके हनुमान चले आना। भूत, प्रेत, पिशाच हों, तुझसे मैं लूँ सुरक्षा। तू लेना बाकी सब, भेज दे मुझे मोक्ष भिक्षा। तेरी शरण में आया, तेरा ही हूं अब दास। फरियाद मेरी सुनके हनुमान चले आना।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय हनुमान जी की कृपा और उनकी अनुकंपा को प्राप्त करने की fervent विनती है। भक्त ने हनुमान से निवेदन किया है कि वे उनकी साधारण फरियाद सुनकर, उनकी जीवन में कदम रखें। 'फरियाद मेरी सुनके' की बार-बार दोहराई गई पंक्ति इस भावना का संकेत देती है कि भक्त हनुमान पर अपार विश्वास रखते हैं और उनकी कृपा के लिए संक्रमण के समय में उन्हें पुकार रहे हैं। भजन में यह विधान है कि हनुमान, जो कि भक्ति और शक्ति के प्रतीक हैं, हर दर्द और संकट से भरे जीवन में भी सौम्यता और शक्ति का संचार करते हैं। भक्त का यह आग्रह कि 'तेरी कृपा से ही सब दुखों से बचाना', इस महानता को परिभाषित करता है कि असाधारण परेशानियों में केवल हनुमान ही सही मार्ग में प्रेरित कर सकते हैं।

भजन में भक्त की एकलता और अकेलेपन की भावना व्यक्त की जा रही है, जहाँ वह हनुमान को अपने संकटों में अपने साथी के रूप में चाहता है। 'जेव्हा मैं अकेला हूँ, कर दे तू बातें मुझसे' इस पंक्ति में भक्ति का गहन भाव दिखाई देता है, जहाँ भक्त हनुमान से केवल शारीरिक सुरक्षा की नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक समर्थन की भी अपेक्षा रखते हैं। इस पंक्ति से पता चलता है कि हनुमान जी केवल बाह्य सुरक्षा नहीं देते, बल्कि आत्मिक शांति और साहस भी प्रदान करते हैं। परंतु, जब भक्त कहते हैं 'भूत, प्रेत, पिशाच हों', तब यह केवल भौतिक संकट न होकर भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक संकटों का भी संकेत करता है। हनुमान जी पर अटूट विश्वास रखते हुए भक्त आशा करते हैं कि हर संकट के समय वे उनके साथ होंगे।

हनुमान जी की भक्ति का जो मार्ग दर्शाया गया है, वह भक्ति मार्ग का एक प्रमुख उदाहरण है। इस भजन में भक्त की भावना सच्ची भक्ति का प्रतीक है - एक निस्वार्थ अर्पण जहाँ वे हनुमान जी को अपने जीवन का सार मानते हैं। हनुमान जी के प्रति समर्पण में पूर्णता, विश्वास और दृढ़ता का संदेश छिपा है। वे भक्त के संकटों का निवारण केवल इसलिए नहीं करते कि वे देवता हैं, बल्कि इसलिए कि भक्त ने उन्हें अपनी श्रेणी में रखा है। यही भक्ति मार्ग का सार है - आत्म-समर्पण के माध्यम से भगवान की कृपा को पाना। इस भजन में धार्मिकता, श्रद्धा और भक्ति की गहरी वास्तविकता को समझाया गया है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

हनुमान जी की पूजा का वर्णन विशेष रूप से रामायण में मिलता है, जहाँ उन्हें श्रीराम के बड़े भक्त के रूप में प्रदर्शित किया गया है। उन्होंने सीता जी की खोज में प्रमुख भूमिका निभाई थी। हनुमान चालीसा और इनके अन्य भजनों में ही भक्तों में हनुमान जी को संकटमोचिन के रूप में पूजने की परंपरा है। यह भजन 'फरियाद मेरी सुनके हनुमान चले आना' हनुमान जी की साक्षात्कार हासिल करने का एक अनुष्ठानिक प्रयास है। भक्तों को उनका प्रिय नाम, 'रामदूत' सुनकर उनकी महानता का साक्षात्कार होता है। हनुमान जी की कथाएं हमें यह शिक्षा देती हैं कि भक्ति के बल से और श्रद्धा के साथ उनकी प्राप्ति की जा सकती है।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। इस भजन के नियमित पाठ से मानसिक तनाव को कम किया जा सकता है। यह आस्था और निष्ठा को बढ़ावा देता है, और भक्तों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। हनुमान जी की महिमा के गायन से न केवल मानसिक स्थिति में सुधार होता है, बल्कि आत्मिक मजबूती भी प्राप्त होती है। कठिनाइयों के समय, यह भजन साधक को आश्वस्त करता है कि वे अकेले नहीं हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह-सुबह करना सबसे उत्तम माना जाता है, जब मन शुद्ध एवं शांत होता है। भजन पाठ करते समय एक दीपक जलाना और गुड़ या चना का भोग अर्पित करना शुभ होता है। भक्त को बैठते समय ध्यान लगाना चाहिए और हनुमान जी के प्रति भावनाएं स्पष्ट रखनी चाहिए। सही मुद्रा में बैठकर, हृदय और मन को हनुमान जी की महिमा में लगाना आवश्यक है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

फरियाद मेरी सुनके हनुमान चले आना किस प्रकार की भक्ति है?

यह भक्ति हनुमान जी के प्रति अटूट विश्वास और आस्था का प्रतीक है, जहाँ भक्त अपने जीवन की समस्याओं का समाधान ढूंढते हैं।

इस भजन का पाठ करने का सही समय क्या है?

इस भजन का पाठ सुबह करते समय किया जाता है, क्योंकि सुबह का समय मानसिक और आध्यात्मिक विकास के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।

हनुमान जी का इस भजन में क्या महत्त्व है?

हनुमान जी भक्ति, शक्ति और साहस के देवता माने जाते हैं। इस भजन में भक्त उनकी शक्ति की कामना करते हैं और संकट के समय उनकी शरण में जाते हैं।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Aug 2026

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