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Hanuman Bhajan

हनुमान के सीने में सियाराम ना होते (Hanuman Ke Seene Me Siyaram Na Hote Lyrics in Hindi) - Hanuman Bhajan Rohit Sharma - Bhaktilok

66 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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हनुमान भगवान का अनन्य प्रेम

श्री हनुमान के प्रति भक्ति का यह भजन, भक्तों को शक्ति और साहस का संचार करता है।

हनुमान के सीने में सियाराम ना होते सेवा के ये सच्चे अगर भाव ना होते हनुमान के सीने में सियाराम ना होते उड़े उड़े हनुमान लांघ गए समंदर पवन वेग से उड़कर श्री राम के पायक बनकर संकट मोचन वीर बली के चर्चे ना होते हनुमान के सीने में सियाराम ना होते शिव की नगरी लंका में बैठ बजाये चुटकी कच्चे पक्के बल खाये भरे राम नाम की बटकी मात सिया के चरणों में अंजना लाल ना होते हनुमान के सीने में सियाराम ना होते जीवन की ये नैया लहरों के ऊपर है चलती कब आ जाएँ तूफां पल में पलट जाएँ ये कश्ती मूर्छित को बूटी पिलाई लक्ष्मण ज़िंदा ना होते हनुमान के सीने में सियाराम ना होते तेरे दीवाने की अँखियाँ छलक रही हैं बाबा अँसुअन की मोती माला तुझे अर्पण करू मैं बाबा सज्जन शिव अवतार ना लेते राम काज ना होते हनुमान के सीने में सियाराम ना होते

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में हनुमान जी की भक्ति और उनके हृदय में श्री राम का वास दर्शाया गया है। पहले दो पंक्तियों में कहा गया है कि अगर हनुमान जी के दिल में श्री राम का प्रेम न होता, तो उनकी सेवा और भक्ति का भाव भी संभव नहीं होता। हनुमान जी को संकट मोचन कहा गया है, जिसका तात्पर्य है कि वह अपने भक्तों के संकटों को दूर करने में सक्षम हैं। उनके पंखों के साथ उड़कर समुद्र को पार करने की बात यह दर्शाती है कि हनुमान जी की भक्ति बिना किसी सीमा के है। जब हनुमान जी राम के पायक बनते हैं, तो यह भक्तों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता है। 'शिव की नगरी लंका में' एक महत्वपूर्ण स्थान है, जहाँ हनुमान जी ने अपने अद्वितीय बल और साहस का प्रदर्शन किया। इस प्रकार, भजन में हनुमान जी की महिमा और उनके अद्वितीय कार्यों का वर्णन किया गया है।

इस भजन में गहराई से भावार्थ के द्वारा हनुमान जी की परीक्षा और उनके समर्पण का वर्णन किया गया है। 'जीवन की ये नैया लहरों के ऊपर है चलती' से यह स्पष्ट होता है कि जीवन में कई कठिनाइयाँ हैं, लेकिन हनुमान जी के आशीर्वाद से हमें इन्हें पार करने की शक्ति प्राप्त होती है। इस भजन में यह भी बताया गया है कि कैसे हनुमान जी ने लक्ष्मण को लौटाने के लिए जड़ी-बूटी का उपयोग किया, यह उनके समर्पण और साहस को दर्शाता है। जब भक्त कहता है कि 'तेरे दीवाने की अँखियाँ छलक रही हैं', तो यह स्पष्ट करता है कि भक्त की भक्ति और प्रेम में गहरा भाव है। इस प्रकार, हनुमान जी की प्रेरणा भक्त के जीवन में आवश्यक है, जिससे भक्त का मन और आत्मा प्रफुल्लित हो जाती है।

भजन में भक्ति मार्ग का अनुसरण करने की प्रेरणा दी गई है। हनुमान जी का हृदय श्री राम में है, और इसी कारण वे अपने भक्तों के प्रति हमेशा तत्पर रहते हैं। यह भजन केवल उनकी महिमा को नहीं दर्शाता, बल्कि यह भी बताता है कि भक्ति का असली अर्थ क्या है। भक्त की भक्ति जब सच्चे भाव से होती है, तब वह ईश्वर की कृपा को आकर्षित करती है। भक्ति का मार्ग कठिनाइयों से भरा हो सकता है, लेकिन हनुमान जी के प्रति सच्चा समर्पण हमें हर कठिनाई से पार कर सकता है। इस भजन की शिक्षाएँ हम सभी के लिए आवश्यक हैं कि हमें अपने जीवन में संतुलन और सच्चे भाव के साथ आगे बढ़ना है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

हनुमान जी की महिमा को समझने के लिए रामायण का अध्ययन अनिवार्य है। हनुमान जी की भक्ति और उनके बलिदान के किस्से हमें यह सिखाते हैं कि जीवन में भक्ति सबसे महत्वपूर्ण है। रामायण में हनुमान जी ने कितनी बार राम जी की सहायता की, इसका उल्लेख है। यह भजन उन सभी घटनाओं का स्मरण कराता है, जहाँ हनुमान जी ने राम नाम का जाप करते हुए अनेक महान कार्य किए। वे केवल राम के भक्त नहीं, बल्कि उनके अंश भी हैं। इस दृष्टि से, यह भजन केवल एक स्तुति नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण पाठ भी है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। इस भजन का जप करने से भक्त को मानसिक शांति, आंतरिक शक्ति और साहस मिलता है। भक्ति से तनाव और चिंता को कम करने में मदद मिलती है। हनुमान जी का नाम लेने से भक्त को व्यक्तिगत संकटों में सटीक मार्गदर्शन मिलता है। मानसिक तनाव को कम करने और सकारात्मकता लाने में यह भजन कारगर होता है, जो कि भक्त के जीवन में स्थायी सुख और संतोष उत्पन्न करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप सुबह या रात को किया जा सकता है, जब मन शांत हो। पूजा स्थल पर दीया जलाना, पुष्प अर्पित करना और शुद्ध मन से भजन का प्रणाम करना आवश्यक है। बैठने की सही मुद्रा ध्यान लगाते समय कमर सीधी रखकर बैठना चाहिए, जिससे ध्यान केंद्रित रहे। भक्ति से भरा मन ही सच्चे भाव से भजन को गाने के लिए आवश्यक है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह भजन गाने का उचित समय क्या है?

इस भजन का गाना सुबह जल्दी या रात में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय विशेष फलदायी है। इस समय मन बेहद शांत होता है, जिससे भक्ति का अनुभव अधिक गहरा होता है।

क्यों इस भजन को गाने से मानसिक शांति प्राप्त होती है?

इस भजन के माध्यम से हनुमान जी की उपासना होती है, जो मानसिक तनाव को दूर करता है। जब भक्त हनुमान नाम का जप करता है, तो उसके मन में नकारात्मकता कम होती है और शांति का अनुभव होता है।

हनुमान जी की महत्ता क्या है इस भजन में?

हनुमान जी का वर्णन इस भजन में उनके अटूट प्रेम, सेवा और बलिदान के रूप में किया गया है। उनका हृदय श्री राम में है, और इसी कारण वे सत्य, धर्म और अनुशासन के प्रतीक बने हैं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Aug 2026

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