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Parvati Stotram

लाज बचाने वाले तू है श्याम (Laaj Bachane Wale Lyrics in Hindi) - Khatu Shyam Bhajan Vini Devda - Bhaktilok

90 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

लाज बचाने वाले मेरी बिगड़ी बनाने वाले तू ही तू ही तू है श्याम तू ही तू ही तू है जब जब भी विपदा आये मुझको संभाले तू बीच भवर से बाबा मुझको निकाले तू बन के खिवैया मेरा मुझे पार लगाता तू तू ही तू ही तू है श्याम तू ही तू ही तू है हार के जो भी आया दिया सहारा है हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा है बिन माझी के बाबा पतवार चलाये तू तू ही तू ही तू है श्याम तू ही तू ही तू है कलयुग का दाता तू ही तू ही सहारा है हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा है तेरी चौखट बाबा अब मेरा ठिकाना है तू ही तू ही तू है श्याम तू ही तू ही तू है तेरा ही प्रेमी बाबा तूने बनाया है विनि दीवाना तेरे दर पर आया है हर ग्यारस को बाबा बस तूने बुलाया है तू ही तू ही तू है श्याम तू ही तू ही तू है

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह भजन खातु श्याम के प्रति समर्पित एक अत्यंत महत्वपूर्ण भक्ति गीत है जो दिव्य कृपा और रक्षा की विनती करता है। 'लाज बचाने वाले' श्लोक में भक्त ईश्वर से आग्रह करता है कि वह उसकी मर्यादा और प्रतिष्ठा की रक्षा करें। 'बिगड़ी बनाने वाले' पंक्ति विध्वंस और पुनर्निर्माण की शक्ति को दर्शाती है। भजन में 'विपदा' आने पर संभालने, 'भवर से निकालने' और 'खिवैया बनकर पार लगाने' जैसे रूपक संसार के संकटों से मुक्ति के प्रतीक हैं। यह गीत श्याम की सर्वव्यापी शक्ति और सर्वव्यापिता का चित्रण करता है। 'हारे का सहारा' अभिव्यक्ति असहाय और पीड़ित जनों के लिए श्याम की दया और सहायता को उजागर करती है। प्रत्येक पंक्ति में भक्त की विनम्रता और पूर्ण समर्पण की भावना व्यक्त होती है।

इस भजन की भावार्थ भक्ति की सर्वोच्च अवस्था को प्रदर्शित करती है जहाँ भक्त पूर्ण रूप से ईश्वर पर निर्भर हो जाता है। 'तू ही तू ही तू है' की बारंबार पुनरावृत्ति एकाग्रता, अद्वैत और पूर्ण समर्पण का प्रतीक है। जब व्यक्ति 'विपदा' से घिरा होता है तो केवल दिव्य हस्तक्षेप ही उसे बचा सकता है। 'खिवैया' (नाविक) का उपमान सुझाता है कि श्याम जीवन के समुद्र में भक्त का मार्गदर्शन करते हैं। 'कलयुग का दाता' होने का अर्थ है कि अराजकता और संकट के इस युग में श्याम ही एकमात्र आश्रय और दाता हैं। 'चौखट' श्याम के दरबार को प्रतीकित करता है जो भक्त का सर्वोच्च ठिकाना बन जाता है। 'दीवाना' शब्द प्रेम की पागलपन को दर्शाता है - एक ऐसी आध्यात्मिक मस्ती जहाँ भक्त संसार की परवाह नहीं करता। 'हर ग्यारस' पर बुलाने का संदर्भ नियमित धार्मिक आह्वान और योग संबंध का द्योतक है।

यह भजन भक्ति के शरणागति मार्ग का सबसे सुंदर उदाहरण है। हिंदू दर्शन में शरणागति को सर्वोच्च साधना माना जाता है जहाँ भक्त अपने अहंकार को विसर्जित कर देता है। भजन में 'विपदा', 'भवर', 'हार' जैसे शब्द मायिक संसार की निरंतर चलती समस्याओं को दर्शाते हैं। श्याम की कृपा ही इन सभी से मुक्ति दिला सकती है। 'माझी' (नाविक) बिना ही 'पतवार चलाना' परमेश्वर की सर्वशक्तिमानता को व्यक्त करता है - वह नियम, प्रकृति और समय के बिना भी सब कुछ नियंत्रित करते हैं। यह अद्वैत वेदांत की शिक्षा को परिलक्षित करता है कि परब्रह्म सभी में व्याप्त है। भजन की यह दार्शनिक गहराई भक्त को सांसारिक मोह से परे ले जाती है और परमात्मा से सीधा संबंध स्थापित करती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

खातु श्याम भारतीय धार्मिक परंपरा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पूजनीय देवता हैं। उन्हें कृष्ण का अवतार माना जाता है और राजस्थान में खाटू गाँव में उनका प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। श्याम नीलकंठ के रूप में परिचित हैं और उन्हें सभी कष्टों के निवारक माना जाता है। भागवत पुराण और हरिवंश पुराण में कृष्ण की लीला और करुणामयी प्रकृति का विस्तृत वर्णन है। यह भजन उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए 'लाज बचाने' की अवधारणा को रेखांकित करता है, जो महाभारत में द्रौपदी की लाज रक्षा की घटना से संबंधित है। कलियुग में जहाँ न्याय प्रणाली विफल हो, वहाँ केवल दिव्य शक्ति ही अंतिम सहारा है। उपनिषदों में भी परमेश्वर को 'रक्षक' और 'पालक' कहा गया है। यह भजन उसी सनातन सत्य को आधुनिक भाषा में प्रस्तुत करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित पाठ और गायन मानसिक शांति, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक विकास प्रदान करता है। नियमित चिंतन से आंतरिक भय दूर होता है और मन में दिव्य शक्ति का विश्वास जागृत होता है। भक्ति की इस प्रक्रिया में कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) में कमी आती है और सेरोटोनिन का स्तर बढ़ता है। मानसिक स्थिरता, सहिष्णुता और करुणा का विकास होता है। आध्यात्मिक दृष्टि से यह भजन चेतना के उच्च स्तरों तक पहुँचने में सहायता करता है और आत्म-साक्षात्कार की ओर ले जाता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का गायन प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में सर्वाधिक प्रभावी है। शुद्ध घी का दीप जलाएँ, पुष्प और धूप अर्पित करें। मानसिक शुद्धता के साथ पूर्व की ओर मुख करके बैठें। माला धारण करके 108 बार या अपनी श्रद्धानुसार भजन गाएँ। प्रत्येक 'तू ही' पर ध्यान केंद्रित करें। संध्या काल में भी पाठ किया जा सकता है। खातु श्याम को चने की दाल, बूँदी के लड्डू और गुलाब का हलवा प्रिय है। हर ग्यारस को इस भजन का विशेष महत्व है। आसन स्थिर रखें, श्वास नियमित करें और हृदय में श्याम की प्रतिमा ध्यान करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

खातु श्याम कौन हैं और लाज बचाने वाले क्यों कहे जाते हैं?

खातु श्याम कृष्ण का अवतार हैं जो राजस्थान के खाटू गाँव में पूजे जाते हैं। महाभारत में द्रौपदी की लाज रक्षा करने वाले कृष्ण की कथा के अनुसार, वे सभी असहाय व्यक्तियों की मर्यादा और प्रतिष्ठा की रक्षा करते हैं। कलियुग में जब न्याय विफल हो, तब वे एकमात्र शरणदाता हैं।

इस भजन को गाने का सर्वोत्तम समय और पद्धति क्या है?

प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में या संध्या काल में यह भजन गाएँ। शुद्ध मन से दीप जलाएँ, पुष्प अर्पित करें। खातु श्याम को चना, बूँदी लड्डू और हलवा प्रसाद रूप में दें। हर ग्यारस को विशेष महत्व है। नियमित 40 दिन तक करने से विशेष लाभ मिलता है।

भजन में 'हर ग्यारस को बुलाया है' का क्या अर्थ है?

ग्यारस चंद्र मास की ग्यारहवीं तिथि को कहते हैं जो भारतीय परंपरा में महत्वपूर्ण मानी जाती है। खातु श्याम को प्रत्येक ग्यारस पर विशेष नियम और त्योहार मनाया जाता है। यह दर्शाता है कि भक्त को नियमित रूप से दिव्य आह्वान का पालन करना चाहिए।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 20 Aug 2026

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