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अरदास सोम सोम दे भरे भंडारे तेरे (Aradaas som som de atishay bhandaare tere Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

57 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्री मातेश्वरी की अरदास: कृपा का भंडार

इस भजन के पाठ से भक्त अपनी मनोकामनाएं पूर्ण कर सकते हैं और मातेश्वरी की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

 अरदास सोम सोम दे भरे भंडारे तेरे (Aradaas som som de atishay bhandaare tere Lyrics in Hindi) सोम सोम दे भरे भण्डार तेरे,मंगल मेहर दा बक्षो दान माताबुध बुद्धि दे विच प्रकाश होवे,वीर वीरता दा बक्षो दान माताशक्र शुकर कराँ तेरा हर वेले,शनि शांति दे हों सामान माताएतवार विश्वास यकीन होवे,पूरण कर दो सारे काज माताहे माता मातेश्वरी सर्व सुखों की खान,माँ देवन वाली एक है मांगत कुल जहानअज्ज वी तेरा आसरा कल वी तेरी आस,घड़ी घड़ी माँ आसरा ज्येष्ठ बारह मासमेरी दाती के दरबार में सभी खड़े हत्थ जोड़,माँ देवन वाली एक है मांगत लाख करोड़ऐ सच्चियाँ जोतां वाली माता तुहाडी सदा ही जयएत अम्बिका जी हिंगलाज, ज्वाला माँ,तेरा पर्वतां दे विच दरबार मातासोम सरस्वती, कालका, भद्रकाली,तैनू सिमरदा ए कुल संसार मातामगल मनसा देवी तू है पिंडरानी,समय समय ते लवें अवतार माताबुध वीरता दी वरी महान शक्ति,बग्घे शेर ते होवे सवार मातावीर वैष्णो देवी नैना देवी,लक्खां भक्त दित्ते ने तार माताशुक्र शक्ति भवानी कृपालु है तू,कई जालिमां नूँ दित्ता है मार माताशनि शांति रूप महान दुर्गे,तैनू भक्त सिमरन सत्ते वार मातारूप एक ते नाम अनेक तेरे,तेरे चरणां तो जावाँ बलिहार मातामेहर करो मातेश्वरी, आये तेरे द्वार,रक्ख लाज दाती आनके तुझे करते हैंनमस्कार नमस्कार नमस्कार

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन की प्रारंभिक पंक्तियों में 'सोम सोम दे भरे भंडारे तेरे' का संदर्भ मातेश्वरी के दिव्य गुणों और उनकी कृपा के भंडार की ओर इंगित करता है। भक्त मां से मंगल की मेहर और बुद्धि का प्रकाश मांगे हैं, ताकि उनके अज्ञान और समस्याओं का समाधान हो सके। जैसे-जैसे भजन आगे बढ़ता है, भक्त वीरता, शांति और विश्वास की दान की प्रार्थना करते हैं। यह दर्शाता है कि मातेश्वरी सच्चे भक्तों को हर कष्ट और दुख से मुक्त करती हैं। 'माता मातेश्वरी सर्व सुखों की खान' की पंक्ति यह स्पष्ट करती है कि मातेश्वरी से भक्तों को हर प्रकार का सुख और संतोष प्राप्त होता है। इसका तात्पर्य है कि मातेश्वरी समस्त सुखों का मूल आधार हैं और उनके दर पर श्रद्धा से आने वाले भक्तों का अहित कभी नहीं होता।

एक भावार्थ के रूप में, यह भजन न केवल भक्तों की भक्ति को दर्शाता है, बल्कि यह उनके दिलों की गहराई से निकली प्रार्थना भी है। भक्त मां से निरंतर आश्रय की कामना करते हैं, क्योंकि वे मानते हैं कि जब भी वे संकट में होते हैं, तो मातेश्वरी ही उनका सहारा बनती हैं। 'घड़ी घड़ी माँ आसरा' पंक्ति में भक्त मां के प्रति अपनी जरूरत को व्यक्त करते हैं, यह दर्शाता है कि माता हमेशा उनकी इच्छा के अनुसार सहायता करती हैं। इस भजन में विभिन्न देवी स्वरूपों का भी उल्लेख है, जैसे 'माँ वैष्णो देवी', 'नैना देवी', और 'माता धुर्गा', जो यह संकेत करते हैं कि देवी शक्तियों की एकता में विश्वास रखा गया है। इस प्रकार, भजन भावनाओं की समृद्धि और मां के प्रति अटूट विश्वास को उजागर करता है।

भक्ति मार्ग का एक मुख्य प्रस्ताव यह है कि भक्त अपनी सारी इच्छाओं और पुकारों को ईश्वर के पास लेकर जाते हैं। इस भजन में, भक्त मातेश्वरी से विविध आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। देवी का रूप एक है और नाम अनेक हैं, यह भक्ति की महानता को दर्शाता है कि एक ही शक्ति से भक्तों की सारी बाधाएं दूर होती हैं। यहाँ, 'तेरे चरणां तो जावाँ बलिहार' की भावना यह संकेत करती है कि भक्त माता के चरणों में समर्पित होकर उन्हें हर प्रकार का आदर देंगे। यह दर्शाता है कि भक्ति केवल प्रार्थना तक सीमित नहीं है, बल्कि कार्यों में भी समर्पण आवश्यक है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भारतीय संस्कृति में देवी पूजा के महत्व को सिद्ध करता है। देवी महात्म्य और विभिन्न देवी स्वरूपों का वर्णन विशेषकर दुर्गा सप्तशती और महाकाली पुराण में पाया जाता है। भक्तों की इस प्रार्थना से दिखता है कि कैसे श्रद्धा और विश्वास से माया का भय मिटाया जा सकता है। मातेश्वरी की प्रतिमा का पूजन भारतीय पौराणिक कथाओं में अनेकों बार किया गया है, जिसमें देवी दुर्गा का महाकाल के साथ संबंध शामिल है। उनके प्रति आस्था रखने वाले भक्तों के लिए यह भजन तीर्थ के समान होता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित पाठ मानसिक शांति और आंतरिक सुकून प्रदान करता है। भक्त इसे गाते समय मातेश्वरी से आशीर्वाद मांगते हैं, जिससे जीवन में खुशियों की वृद्धि होती है। भजन का जाप करने से नकारात्मकता दूर होने के साथ सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसके अलावा, मानसिक तनाव और दुविधाओं को दूर करने में भी यह भजन सहायक होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह या शाम के समय किया जा सकता है। भक्ति के वातावरण को बनाए रखने के लिए भक्त को एक दीया जलाना चाहिए और देवी माँ के प्रति फूलों और मिठाइयों का भोग अर्पित करना चाहिए। ध्यान की अवस्था में बैठते समय, भक्त को अपने मन में माता की छवि रखनी चाहिए और श्रद्धा पूर्वक भजन का गाने का प्रयास करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन के माध्यम से कौन-कौन सी देवी की पूजा की जाती है?

इस भजन में माँ दुर्गा, नैना देवी, वैष्णो देवी, और कालका देवी जैसे विभिन्न स्वरूपों का उल्लेख किया गया है, जिससे भक्तों को विभिन्न प्रकार की सुरक्षा और आशीर्वाद प्राप्त होता है।

क्या इस भजन का पाठ हर दिन करना आवश्यक है?

हर दिन इस भजन का पाठ करना आवश्यक नहीं है, लेकिन नियमित रूप से इसका पाठ करने से मानसिक शांति और दिव्य कृपा प्राप्त होती है, जिससे भक्त का जीवन और आसान हो जाता है।

इस भजन का पाठ करने के लिए खास समय क्या है?

इस भजन का पाठ सुबह सूर्योदय के समय या शाम के समय किया जा सकता है, जब भक्त मानसिक शांति और एकाग्रता के साथ माता की प्रार्थना कर सकें।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 18 Aug 2026

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