गणपति गणेश को, उमा पति महेश को लिरिक्स || ganesh ganesh ko, uma pati mahesh ko lyrics in hindi ||
गणपति गणेश को, उमा पति महेश को
मेरा प्रणाम है जी, मेरा प्रणाम है जी
अनजानी के पूत को, राम जी के दूत को
मेरा प्रणाम है जी, मेरा प्रणाम है जी
कृष्ण कन्हैया को, दाऊ जी के भैया को
मेरा प्रणाम है जी, मेरा प्रणाम है जी
माँ शेरा वाली को, खंडे खप्पर वाली को
मेरा प्रणाम है जी, मेरा प्रणाम है जी
राम जिनका नाम है,
अयोध्या जिनका धाम है
ऐसे धनुर्धारी को हमारा प्रणाम है
हमारा प्रणाम है
कृष्णा जिनका नाम है
मथुरा जिनका धाम है
ऐसे मुरली बैजैया को हमारा प्रणाम है
हमारा प्रणाम है
शिव शंकर जिनका नाम है
कैलाश जिनका धाम है
ऐसे डमरू बैजैया को हमारा प्रणाम है
हमारा प्रणाम है
विष्णु जिनका नाम है
क्षीर सागर जिनका धाम है
ऐसे चक्र धारी को हमारा प्रणाम है
हमारा प्रणाम है
काली जिनका नाम है
कलकत्ता जिनका धाम है
ऐसी खप्पर वाली को हमारा प्रणाम है
हमारा प्रणाम है
🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश जी का यह भजन "गणपति गणेश को, उमा पति महेश को लिरिक्स || ganesh ganesh ko, uma pati mahesh ko lyrics in hindi || Bhaktilok" सभी कार्यों के निर्विघ्न संपन्न होने की कामना से गाया जाता है। विघ्नहर्ता गणेश जी बुद्धि, ज्ञान और विवेक के अधिष्ठाता देव हैं। इस भजन के प्रत्येक शब्द में गणेश जी के गजमुख, विशाल उदर, और चूषक वाहन का सुंदर वर्णन है।
इस भजन की मूल भावना विघ्न विनाश और शुभ-लाभ की प्राप्ति की है। जीवन में जब भी कोई नया कार्य प्रारंभ करना हो, तो गणेश जी का स्मरण करना अनिवार्य माना गया है, क्योंकि वे ऋद्धि-सिद्धि के प्रदाता हैं।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
गणेश पुराण के अनुसार, श्री गणेश जी की स्तुति और भजन सुनने से बुद्धि का विकास होता है, विद्या अर्जन में आने वाली बाधाएं समाप्त होती हैं और घर में शांति का वातावरण बनता है।
प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के जन्म और उनकी कथाओं का संपूर्ण विवरण जानने के लिए ब्रह्म पुराण गणेश महिमा का पाठ करें। गणेश संकीर्तन से मानसिक अशांति दूर होती है, बुद्धि कुशाग्र होती है और किसी भी कार्य में आने वाली विघ्न-बाधाएं स्वतः ही दूर हो जाती हैं।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
बुधवार और गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी के सम्मुख दूर्वा और मोदक अर्पित कर इस भजन का संकीर्तन करें। गायन के समय सिंदूर का तिलक लगाना शुभ होता है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
गणेश जी की पूजा में 'दूर्वा' (दूब घास) क्यों चढ़ाई जाती है?
दूर्वा शीतलता प्रदान करने वाली है। अनलासुर नामक दैत्य को निगलने के बाद गणेश जी के पेट में उत्पन्न जलन को शांत करने के लिए मुनियों ने उन्हें दूर्वा चढ़ाई थी। तब से गणेश जी को दूर्वा अत्यंत प्रिय है।
भगवान गणेश के भजन किस दिन विशेष रूप से गाने चाहिए?
बुधवार का दिन और हर माह आने वाली संकष्टी व विनायक चतुर्थी की तिथियां गणेश आराधना के लिए सर्वोत्तम हैं।
क्या प्रथम पूज्य गणेश जी का स्मरण हर पूजा से पहले जरूरी है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव से मिले वरदान के कारण किसी भी शुभ कार्य या देव पूजा की शुरुआत गणेश जी के पूजन व स्मरण से ही की जाती है।
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