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Ganga Bhajan

गंगा की लहरों का शरण (ganga ki Laharo ka sharan Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

57 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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गंगा: जीवनदाता और मोह मोचन

गंगा की लहरों का यह भजन, नीर मोक्ष और पवित्रता का प्रतीक है, जो जीवन का संजीवनी स्थल है।

 गंगा की लहरों का शरण (ganga ki Laharo ka sharan Lyrics in Hindi) गंगा की लहरों का शरणगंगा की लहरों का शरण,हर हर गंगे, हर हर गंगे।तुम जीवन की आधार हो,पाप हरती, उद्धार हो।गंगा की लहरों का शरण,हर हर गंगे, हर हर गंगे।सुरसरि माँ, हे भागीरथी,तुमसे निर्मल हर रघुवंshi।गंगा की लहरों का शरण,हर हर गंगे, हर हर गंगे।पावन जल से कर दो तार,तुमसे मिटे भव का अंधकार।गंगा की लहरों का शरण,हर हर गंगे, हर हर गंगे।ज्योतिर्मयी, हे अमृतधारा,तुमसे ही उज्ज्वल संसार हमारा।गंगा की लहरों का शरण,हर हर गंगे, हर हर गंगे।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में गंगा नदी को जीवनदायिनी और परम पवित्र माँ के रूप में वर्णित किया गया है। गंगा की लहरें केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शुद्धता और मोक्ष का आधार भी हैं। पहले अंतरे में कहा गया है कि गंगा जीवन की आधार हो, वह पापों का नाश करती और उद्धार का माध्यम बनती है। जब भक्त गंगा की शरण में जाते हैं, तो उन्हें अदृश्य शक्ति का अनुभव होता है, जो उनके पापों को धोकर नई ऊर्जा से भर देती है। यही कारण है कि भक्ति भाव से गंगा के प्रति प्रकट की गई श्रद्धा इस भजन को एक विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक गहराई देती है।

गंगा का मानव जीवन में महत्व केवल भौतिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक भी है। दूसरे अंतरे में गंगा को 'सुरसरि माँ' कहा गया है, जो सभी संतानों को निर्मलता प्रदान करती है। यहाँ रघुवंशी का उल्लेख, भगवान राम के वंश का प्रतीक है, जो यह दर्शाता है कि गंगा का संबंध केवल सामान्य जीवन से नहीं, बल्कि उच्च आत्मा के साथ भी है। भक्त जब गंगा की लहरों में दुहाई देते हैं, तब वे उस शुद्धता को अनुभव करते हैं जो समस्त अंधकार को मिटाने में सक्षम है। गंगा की जलधारा को अमृतधारा के रूप में संदर्भित किया गया है, जो जीवन को प्रकाश और सकारात्मकता प्रदान करती है।

इस भजन में भक्ति मार्ग का गहराई से वर्णन किया गया है, जहाँ भक्त गंगा को एक आध्यात्मिक गुरु के रूप में स्वीकार करते हैं। गंगा की शरण में जाना, आत्म-साक्षात्कार की दिशा में एक कदम है। भक्त जब गंगा के पावन जल में स्नान करता है, तो वह केवल शारीरिक शुद्धि नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शुद्धि की ओर अग्रसर होता है। गंगा को जलित ज्योति और अमरता का प्रतीक माना गया है, जो भक्तों को शिक्षित करती है कि जीवन में कैसे आगे बढ़ें। इस प्रकार गंगा की भक्ति और समर्पण वास्तविकता की खोज की ओर ले जाता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

गंगा का महत्व भारतीय संस्कृति में अतुलनीय है। पुराणों में इसे 'उज्ज्वलातमा' कहा गया है और यह कहा गया है कि गंगा के जल में स्नान करने से आत्मा के पवित्रता की प्राप्ति होती है। रामायण और महाभारत में गंगा के बारे में कई कहानियाँ हैं, जहाँ यह दिखाया गया है कि किस प्रकार गंगा ने अपने भक्तों को संकट से उबारा। भागीरथ की तपस्या के बाद गंगा का अवतरण, मानवता के उद्धार का प्रतीक है। अतः, यह भजन गंगा की पवित्रता और शक्ति को स्मरण कराता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। गंगा की लहरों का शरण लेते समय ध्यान और मंत्र जाप से मानसिक शांति, शारीरिक स्वास्थ्य और आध्यात्मिक विकास की प्राप्ति होती है। यह भजन श्रद्धा और विश्वास को बढ़ाता है, जिससे व्यक्ति में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। नियमित रूप से इस भजन का जाप करने से जीवन के संकट और चुनौतीयों का सामना करने की शक्ति में वृद्धि होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

गंगा की लहरों का शरण भजन सुबह या शाम को उच्च स्वर में गाना चाहिए। इसे गाते समय एक दीया जलाना और फूलों का भोग अर्पित करना उचित है। साधक को ध्यान केंद्रित करके, सही मुद्रा में बैठना चाहिए, जिससे मन की एकाग्रता बनी रहे। मन को सकारात्मक धुन में रखते हुए गंगा की महिमा का गुणगान करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

गंगा की लहरों का शरण क्यों गाते हैं?

यह भजन गंगा की पवित्रता और शक्ति को स्मरण करता है, जिससे भक्त अपने पापों से मुक्त होने और उद्धार पाने की कामना करते हैं।

क्या गंगा का जल पवित्र है?

गंगा का जल शुद्धि और मोक्ष का प्रतीक है। इसके पवित्र जल में स्नान करने से मानसिक और आध्यात्मिक लाभ होते हैं।

इस भजन का पाठ करने का सही समय क्या है?

सुबह या शाम का समय भजन के लिए सर्वोत्तम है, जिससे भक्त का मन शुद्ध और एकाग्र होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 23 Aug 2026

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