आज का पंचांग | सूर्योदय: ०५:४५ AM | सूर्यास्त: ०६:५० PM
Ganga Bhajan

गंगा के किनारे – Ganga Ke Kinare Lyrics in Hindi (Shiv Bhajan)

652 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah | 2 मिनट पठन समय
आकार:
कंट्रास्ट:

🙏 गंगा के किनारे – Ganga Ke Kinare

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें।

(शिव भजन – Shiv Bhajan Lyrics in Hindi)

प्रचलित लोक भजन / भक्ति गीत

📝 भजन विवरण

🎤 गायक/लेखक: प्रचलित लोक भजन (अज्ञात)
🏷️ श्रेणी: शिव भजन / गंगा भजन
📍 भाव: शांति, आस्था, समर्पण

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

चाँद को निहारु
शिव को पुकारु
चाँद को निहारु
शिव को पुकारु

॥ स्थायी ॥

गंगा के किनारे बैठ के
बैठ के
गंगा के किनारे बैठ के
बैठ के
गंगा के किनारे बैठ के

॥ अंतरा १ ॥

रूह को सँवारु आरती उतारु
गंगा के किनारे बैठ के
बैठ के
गंगा के किनारे बैठ के
बैठ के

॥ अंतरा २ ॥

हम तो हमारे ही जीवन से
है इतने सताए हुए
टूटे हैं बिखरे हैं हम तो
सबके भुलाए हुए

॥ अंतरा ३ ॥

कहते हैं आए जो गंगा नहाए
हर जाते हैं सब रोग
अब हमने समझा है अब हमने जाना
क्यू गंगा आते हैं लोग

॥ अंतरा ४ ॥

थक गए थे हम
दुखों को उठा के
अब चैन आया
आई अब सांसें

गंगा के किनारे बैठ के
बैठ के
गंगा के किनारे बैठ के
बैठ के

॥ अंतरा ५ ॥

क्यू रोए हर बात में बंदेया
क्या लाया था साथ में बंदेया
जाने दे जो चला गया है
कुछ भी नहीं तेरे हाथ में बंदेया

क्यू रोए हर बात में बंदेया
क्या लाया था साथ में बंदेया
जाने दे जो चला गया है
कुछ भी नहीं तेरे हाथ में बंदेया

॥ अंतरा ६ ॥

मन नहीं भरता जितना भी ताकें
इतना सुकून हैं भर गई आंखें
गंगा के किनारे बैठ के

गंगा धराए शिव गंगा धराए
हर हर भोले नमः शिवाय
गंगा धराए शिव गंगा धराए
हर हर भोले नमः शिवाय
गंगा धराए शिव गंगा धराए
हर हर भोले नमः शिवाय

✍️ रचनाकार :- प्रचलित लोक भजन (अज्ञात)

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह मार्मिक भजन गंगा के पवित्र तट पर बैठकर शिव-आराधना और आत्म-शांति का वर्णन करता है। “चाँद को निहारु, शिव को पुकारु” – भक्त चाँद (शीतलता, सौंदर्य) को निहारता है और शिव (विनाशक, कल्याणकारी) को पुकारता है।

भजन में जीवन के दुखों, टूटन और भुलाए जाने का दर्द व्यक्त किया गया है। भक्त कहता है कि वह अपने ही जीवन से सताया हुआ है, टूटा-बिखरा हुआ, सबका भुलाया हुआ। लेकिन गंगा किनारे बैठने से उसे शांति मिलती है। “थक गए थे हम दुखों को उठा के, अब चैन आया” – यह पंक्ति गंगा और शिव की शरण में आने से मिलने वाली आंतरिक शांति को दर्शाती है।

भजन में एक गहरा दार्शनिक संदेश भी है – “क्यू रोए हर बात में बंदेया, क्या लाया था साथ में बंदेया” – हम इस दुनिया में खाली हाथ आए हैं और खाली हाथ जाना है। जो चला गया, उसे जाने दो। यह वैराग्य और संतोष का संदेश है।

अंत में “हर हर भोले नमः शिवाय” के जयघोष के साथ भजन समाप्त होता है – यह शिव-गंगा की अखंडता को दर्शाता है, क्योंकि गंगा शिव की जटाओं से प्रकट हुई हैं।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

गंगा और शिव का अटूट संबंध: पौराणिक मान्यता है कि गंगा देवी शिव की जटाओं से धरती पर उतरीं। इसलिए गंगा किनारे बैठकर शिव का ध्यान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। यह भजन उसी भावना को जीवंत करता है।

आत्म-शांति और दुखों से मुक्ति: आधुनिक जीवन की व्यस्तता और तनाव के बीच यह भजन याद दिलाता है कि प्रकृति की गोद में, पवित्र नदी के तट पर बैठकर मन को सँवारा जा सकता है। “रूह को सँवारु, आरती उतारु” – यह आत्मा का श्रृंगार और ईश्वर के प्रति कृतज्ञता का भाव है।

वैराग्य और संतोष का संदेश: “जाने दे जो चला गया है, कुछ भी नहीं तेरे हाथ में” – यह पंक्ति गीता के उपदेश “प्राप्त-प्राप्तव्य-विवर्जित” (जो मिला उसे स्वीकार करो, जो गया उसे छोड़ दो) की याद दिलाती है।

💖 भक्ति रस का संगम

🎯 संदेश

जीवन के दुखों से घबराकर भागने की बजाय, पवित्र स्थानों पर जाकर, ईश्वर का स्मरण करके और प्रकृति के सान्निध्य में रहकर आंतरिक शांति प्राप्त की जा सकती है। गंगा किनारे बैठना केवल एक क्रिया नहीं, बल्कि आत्म-मंथन और पुनर्जीवन का अवसर है।

✨ आस्था का प्रतीक

यह भजन उन सभी के लिए प्रेरणा है जो मानसिक तनाव, अवसाद या जीवन की कठिनाइयों से जूझ रहे हैं। यह बताता है कि शिव और गंगा की शरण में जाने से रोग दूर होते हैं, सांसें सही चलती हैं, और जीवन में सुकून आता है।

🙏 ॐ नमः शिवाय ।। हर हर महादेव ।। जय गंगा मैया ।।

॥ इति शिव-गंगा भजनम् ॥
॥ गंगा के किनारे बैठ के, रूह को सँवारु आरती उतारु ॥
श्रेणियां: Ganga Bhajan

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
`; body.appendChild(typingIndicator); body.scrollTop = body.scrollHeight; // Response Delay setTimeout(() => { if (body.contains(typingIndicator)) { body.removeChild(typingIndicator); } const responseText = matchResponse(query); const guruMsg = document.createElement('div'); guruMsg.className = 'chat-msg guru'; voiceCounter++; const btnId = `global-guru-speech-${voiceCounter}`; guruMsg.innerHTML = `
${responseText}
`; body.appendChild(guruMsg); body.scrollTop = body.scrollHeight; }, 1200); } } if (document.readyState === 'loading') { document.addEventListener('DOMContentLoaded', initChatbot); } else { initChatbot(); } })(); �थ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } let voiceCounter = 0; window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; utterance.onend = () => { btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
`; body.appendChild(typingIndicator); body.scrollTop = body.scrollHeight; // Response Delay setTimeout(() => { body.removeChild(typingIndicator); const responseText = matchResponse(query); const guruMsg = document.createElement('div'); guruMsg.className = 'chat-msg guru'; voiceCounter++; const btnId = `global-guru-speech-${voiceCounter}`; guruMsg.innerHTML = `
${responseText}
`; body.appendChild(guruMsg); body.scrollTop = body.scrollHeight; }, 1200); } });