आज का पंचांग | सूर्योदय: ०५:४५ AM | सूर्यास्त: ०६:५० PM
Parvati Stotram

माँ कामाख्या शक्तिपीठ चालीसा (Maa Kamakhya Shaktipeeth Chalisa Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

187 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
आकार:
कंट्रास्ट:
माँ कामाख्या शक्तिपीठ चालीसा (Maa Kamakhya Shaktipeeth Chalisa Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

माँ कामाख्या शक्तिपीठ चालीसा (Maa Kamakhya Shaktipeeth Chalisa Lyrics in Hindi) - 


॥ दोहा ॥

डम डम डम डमरू बजे, 

अन धन बरसै ठाठ  

मन वांछित माया मिले, 

पाठ हों एक सौ आठ ॥


॥ चौपाई ॥

गौरी गणपति प्रथम मनाऊं 

सकल कामना सिद्ध कराऊं ॥


जगजननी कामाख्या माता 

शिवशक्ति मेरी भाग्यविधाता ॥


लगन लगी कुछ भी ना जानूं 

कैसे तेरा गुणगान बखानूं ॥


दस विद्या का अंश मात्र भी 

जानूं नहीं ग्रह गौचरात्र भी ॥


शुभ और अशुभ घड़ी तू जाने 

बैठ गया हूं तुझको रिझाने ॥


बालक बुद्धि जान निहारो 

सिर पे रख दो हाथ तुम्हारो ॥


परमेश्वरी सम्पूर्ण आराध्या

निकसी अंतस अर्चन आध्या ॥


ब्रह्मा विष्णु शिव हे माते 

काम क्षेत्र तेरा ध्यान लगाते ॥


मुनिवर श्रेष्ठ वशिष्ठ सिद्ध हैं 

भांतिब्रह्म जन जन प्रसिद्ध है 

हार के आया त्रिपुर भैरवी 

कौन करे मां मेरी पैरवी ॥


निपट अकेला निपट अनाड़ी 

चल जाए मेरी भी गाड़ी ॥


एक बार मोहि आन निहारो 

कामाख्या मेरी मात उबारो ॥


मनो कामना पूरी कर दो  

शरण पड़ा हूं माता वर दो ॥


पूरब दिशि मां तारा दर्शन 

अगनकण षोडशी सुदर्शन ॥


धूमावती दक्षिण में दयाला 

नैऋत्यां भज भैरवी माला


भुवनेश्वरी पश्चिम करे रक्षा 

छिन्नमस्ता वायब्य सुरक्षा 

बगलामुखी उत्तर दिशि शोभा 

त्रिपुरसुंदरी दे मति बोधा ॥

ऊर्ध्व उज्वला मातंगिनी मां 

सर्व रक्षिका क्लीं काली मां ॥


दसों दिशा में तेरी ज्योति 

रोम रोम आराधना होती 

जय जयकारे नभ गूंजे मां 

अन धन खुशियां सब लूटे मां ॥ 


आशा पूरण आज करो मां 

संकट काटो कष्ट हरो मां ॥


स्वीकारो मेरी मानस पूजा 

नैम धरम जानूं नहीं दूजा ॥


पावन दिन वैशाख तृतीया 

जाप करै सम्मुख रख दीया ॥


परम् पिता शिवशंकर कहते 

निश्छल मन हो आंसू बहते ॥


ऐसी करो पुकार सुने मां 

जो भी वांछित वर दे दे मां ॥


यही धारणा लेकर बैठा पूजा

प्रार्थना करने बैठा डाकिन

शाकिन पास ना फटकै 

प्रेतादिक सबभागे बचकै 

निर्भय हो कर तुम्हें मनाऊं 

नित्य नए गुणगान सुनाऊं ॥


सभी सिद्धियां देने वाली वाली 

बिगड़े भाग्य बनाने वाली ॥


अखिलाराध्या भीम लोचना 

दीनन दुःख दारिद्र मोचना ॥


रक्तबीज महिसासुर मर्दिनि

काम रूप मां नित्य वंदिनि ॥


नव ग्रहादि अरु दिग् दिग्पाला 

क्षेत्रपाल हो सब रखवाला 

बावन भैरव चौसठ योगिन 

चले नहीं मां तब आज्ञा बिन ॥


अप्सरायक्ष यक्षिणी शीश नवावै 

तेरे लाल को नहीं सतावै ॥


ब्रह्मदैत्य वेताल 

कान भरै ना कोई मंथरा ॥


सत कोटि ब्रह्मांड हैं तेरे 

रूप तेरे उनमें बहुतेरे

ममता का आंचल फैलाओ 

लाल को अपने गले लगाओ ॥


दुर्बल अति कमजोर हूं मैया 

बन जाऊं तेरो कुंवरकन्हैया ॥


कठिन कौनसो काम तुझे मां 

जो ना तुम कर सको उसे मां ॥


" लहरी" लज्जा हाथ तेरे मां 

निश्चित जागे भाग्य मेरे मां ॥


॥ दोहा ॥

गुरु गोविंद का आसरा, तात मात सिर नाय 

कामाख्या मां शारदा, सिद्ध सकल हो जाय 

विद्व सिद्ध संतन गुणी, तपसी तारणहार 

हाथ जोड़ “लहरी" करे, वंदन बारम्बार ॥ 


वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 15 Aug 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!