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भक्ति रस काव्य व भजन

मैं तो राधे राधे बोलूँगी कान्हा संग होली खेलूँगी Lyrics (Holi Bhajan) – Main To Radhe Radhe Bolungi Kanha Sang Holi Khelungi

253 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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🙏 मैं तो राधे राधे बोलूँगी – कान्हा संग होली खेलूँगी

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।

(Main To Radhe Radhe Bolungi Kanha Sang Holi Khelungi) – होली भजन 2026

प्रस्तुतकर्ता : अनिल रामूर्ति, भोपाल

📝 भजन विवरण

🎤 गायक/प्रस्तुतकर्ता: अनिल रामूर्ति, भोपाल
🏷️ श्रेणी: होली भजन / राधा-कृष्ण भजन
📍 भाव: उल्लास, प्रेम, होली का रंग

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ मुखड़ा ॥

मैं तो, राधे राधे बोलूँगी,
कान्हा संग, होली खेलूँगी ॥
मैं तो, राधे राधे बोलूंगी,
मोहना संग, होली खेलूँगी ॥
कान्हा संग, होली खेलूँगी ।
मोहना संग, होली खेलूँगी ।
मैं तो, राधे राधे, बोलूँगी...

॥ नंद गाँव में ॥

इक्क दिन, खेलूँगी, नंद गाँव में ।
नंद, गाँव में जी, नंद गाँव में ।
इक्क दिन, खेलूँगी, नंद गांव में ।
माँ, यशोदा से, मिल के आऊँगी,
कान्हा संग, होली खेलूँगी ।
मैं तो, राधे राधे, बोलूँगी...

॥ बरसाने में ॥

इक्क दिन, खेलूँगी, बरसाने में ।
बरसाने में जी, बरसाने में ।
इक्क दिन, खेलूँगी, बरसाने में ।
राधा, प्यारी से, मिल के आऊँगी,
कान्हा संग, होली खेलूँगी ।
मैं तो, राधे राधे, बोलूँगी...

॥ गोवर्धन में ॥

इक्क दिन, खेलूँगी, गोवर्धन में ।
गो,वर्धन में जी, गोवर्धन में,
इक्क दिन, खेलूँगी गोवर्धन में ।
गिरी, राज के, दर्शन पाऊँगी,
कान्हा संग, होली खेलूँगी ।
मैं तो, राधे राधे, बोलूँगी...

॥ बृज मंडल में ॥

इक्क दिन, खेलूँगी, बृज मंडल में ।
बृज, मंडल में जी, बृज मंडल में ।
इक्क दिन, खेलूँगी, बृज मंडल में ।
परि, क्रमा, करके आऊँगी,
कान्हा संग, होली खेलूँगी ।
मैं तो, राधे राधे, बोलूँगी...

॥ वृन्दावन में ॥

इक्क दिन, खेलूँगी, वृन्दावन में ।
वृन्दावन में जी, वृन्दावन में ।
इक्क दिन, खेलूँगी, वृन्दावन में ।
बिहारी जी को, रंग लगाऊँगी,
कान्हा संग, होली खेलूँगी ।
मैं तो, राधे राधे, बोलूँगी...

॥ गोकुल में ॥

इक्क दिन, खेलूँगी, मैं गोकुल में ।
मैं गोकुल में, मैं गोकुल में ।
इक्क दिन, खेलूँगी, मैं गोकुल में ।
नंद, बाबा से, मिल के आऊँगी,
कान्हा संग, होली खेलूँगी ।
मैं तो, राधे राधे, बोलूँगी...

॥ दाऊ जी में ॥

इक्क दिन, खेलूँगी, दाऊ जी में ।
दाऊ, जी में बल, दाऊ जी में ।
इक्क दिन, खेलूँगी, दाऊ जी में ।
बल, राम जी से, मिलके आऊँगी,
कान्हा संग, होली खेलूँगी ।
मैं तो, राधे राधे, बोलूँगी...

मैं तो, राधे राधे बोलूँगी,
कान्हा संग, होली खेलूँगी ॥
मोहना संग, होली खेलूँगी ॥

📤 अपलोडर :- अनिल रामूर्ति, भोपाल

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह होली भजन एक भक्त की गहरी लालसा को व्यक्त करता है कि वह किसी दिन श्री कृष्ण (कान्हा/मोहना) के साथ होली खेल सके। "मैं तो राधे राधे बोलूँगी" – राधा नाम का जाप करते हुए भक्त कान्हा के विभिन्न लीलास्थलों पर होली खेलने की कल्पना करता है।

हर अंतरे में एक अलग पवित्र स्थान का उल्लेख है – नंद गाँव, बरसाना, गोवर्धन, बृज मंडल, वृन्दावन, गोकुल और दाऊ जी (बलराम जी) का स्थान। भक्त वहाँ जाकर वहाँ के दिव्य व्यक्तित्वों (यशोदा मैया, राधा रानी, गिरिराज जी, बिहारी जी, नंद बाबा, बलराम जी) से मिलने और उन्हें रंग लगाने की इच्छा रखता है। यह भाव है कि एक दिन वह इन पावन धामों में जाकर कृष्ण की अनंत होली में सम्मिलित होगा।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

उल्लास और समर्पण: यह भजन केवल होली का गीत नहीं, बल्कि आत्मसमर्पण की भावना से ओत-प्रोत है। "इक्क दिन" की पुनरावृत्ति दर्शाती है कि भक्त को पूरा विश्वास है कि उसकी यह इच्छा अवश्य पूरी होगी।

सात पवित्र स्थान: नंद गाँव, बरसाना, गोवर्धन, बृज मंडल, वृन्दावन, गोकुल और दाऊ जी का स्थान – ये सभी कृष्ण लीला से जुड़े हुए हैं। भक्त हर स्थान पर जाकर वहाँ के विशेष स्वरूप से मिलना चाहता है, जो उसकी सर्वांगीण भक्ति को दर्शाता है।

राधे-कृष्ण का प्रेम: "राधे राधे" बोलना और कान्हा के साथ होली खेलना – यह राधा-कृष्ण के अटूट प्रेम का प्रतीक है। भक्त स्वयं को राधा की तरह कान्हा के सान्निध्य में देखता है।

💖 भक्ति रस का संगम

🎯 संदेश

सच्चे मन से राधे-कृष्ण का नाम जपने वाला कभी अकेला नहीं रहता। वह हर पल, हर स्थान पर उनकी उपस्थिति का अनुभव कर सकता है और अपनी आस्था के रंगों से जीवन को होली सा रंगीन बना सकता है।

✨ आस्था का प्रतीक

यह भजन उन सभी भक्तों को प्रेरित करता है जो भौतिक रूप से बृज की यात्रा नहीं कर सकते, लेकिन मानसिक रूप से वहाँ होली खेलने की लालसा रखते हैं। नाम-जप और भावना ही सच्ची यात्रा है।

🙏 राधे राधे ।। बोलो राधे राधे ।। जय श्री कृष्णा ।।

॥ राधे राधे ॥
॥ कान्हा संग होली खेलूँगी, राधे राधे बोलूँगी ॥

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 13 Aug 2026

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