मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।
🙏 तुम्हीं मेरी नईया तुम्हीं हो खवईया – माता भजन
(Tumhi Meri Naiya Tumhi Ho Khavaiya) – Mata Rani Bhajan 2026
📝 भजन विवरण
📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)
॥ धुन ॥
तुम्हीं मेरी नईया तुम्हीं हो खवईया
धुन- तुम्हीं मेरे मंदिर तुम्हीं मेरी पूजा
तुम्हीं, मेरी नईया, तुम्हीं हो खवईया,
तुम्हीं, आसरा हो, तुम्हीं आसरा हो ॥
॥ अंतरा १ ॥
कदर मेरी मईया, किसी ने ना जानी,
हमेशा रहा मेरी, आंखों में पानी ॥
गैर तो, गैर अपनों, ने रुलाया ॥
तुम्हीं, आसरा हो, तुम्हीं आसरा हो ।
तुम्हीं, मेरी नईया, तुम्हीं हो खवईया...
॥ अंतरा २ ॥
बचपन से ही मैं, हूँ निरभागी,
तेरी दया से मेरी, किस्मत मां जागी ॥
आप ने ही, मईया मुझको, गले से लगाया ॥
तुम्हीं, आसरा हो, तुम्हीं आसरा हो ।
तुम्हीं, मेरी नईया, तुम्हीं हो खवईया...
॥ अंतरा ३ ॥
जिन रिश्तो से, आशा लगाई,
उन रिश्तो ने, निराशा दिखाई ॥
मतलब की, दुनिया में, कोई ना हमारा ॥
तुम्हीं, आसरा हो, तुम्हीं आसरा हो ।
तुम्हीं, मेरी नईया, तुम्हीं हो खवईया...
॥ अंतरा ४ ॥
तेरा नाम लेकर, जिए जा रही हूँ,
जहर ज़िन्दगी का, पिए जा रही हूँ ॥
तेरा नाम, है मुझको, प्राणों से प्यारा ॥
तुम्हीं, आसरा हो, तुम्हीं आसरा हो ।
तुम्हीं, मेरी नईया, तुम्हीं हो खवईया...
🎵 माता रानी भजन | शरणागति भजन
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह मार्मिक भजन एक भक्त की माता रानी के प्रति पूर्ण समर्पण और शरणागति की भावना को व्यक्त करता है। "तुम्हीं मेरी नईया तुम्हीं हो खवईया" – तुम ही मेरी नाव हो और तुम ही नाव चलाने वाले हो। यह भाव है कि जीवन रूपी नाव को पार लगाने वाले माता के अलावा और कोई नहीं।
"तुम्हीं मेरे मंदिर तुम्हीं मेरी पूजा" – तुम ही मेरे मंदिर हो और तुम ही मेरी पूजा। भक्त के लिए माता ही सब कुछ हैं।
"कदर मेरी मईया, किसी ने ना जानी, हमेशा रहा मेरी, आंखों में पानी" – मेरी कदर किसी ने नहीं जानी, हमेशा मेरी आँखों में आँसू रहे। गैर तो गैर, अपनों ने भी रुलाया।
"बचपन से ही मैं हूँ निरभागी, तेरी दया से मेरी किस्मत मां जागी" – मैं बचपन से ही अभागा रहा, तेरी दया से मेरी किस्मत जागी। तूने ही मुझे गले से लगाया।
"जिन रिश्तो से आशा लगाई, उन रिश्तो ने निराशा दिखाई" – जिन रिश्तों से आशा लगाई, उन्हीं ने निराशा दी। इस मतलब की दुनिया में कोई अपना नहीं।
"तेरा नाम लेकर जिए जा रही हूँ, जहर ज़िन्दगी का पिए जा रही हूँ" – तेरा नाम लेकर जी रहा हूँ, ज़िन्दगी का ज़हर पी रहा हूँ। तेरा नाम मुझे प्राणों से प्यारा है।
यह भजन उन सभी के लिए प्रेरणादायक है जो जीवन में दुःख, निराशा और अकेलेपन से गुज़र रहे हैं। यह सिखाता है कि माता रानी ही एकमात्र सहारा हैं, वे ही नाव हैं और वे ही खेवनहार।
📖 विशेष शब्दों के अर्थ
- नईया: नाव, जीवन रूपी नाव
- खवईया: खेवनहार, नाव चलाने वाला, पार लगाने वाला
- आसरा: सहारा
- निरभागी: अभागा, भाग्यहीन
- कदर: कीमत, महत्व
- गैर: पराये
- अपने: अपने संबंधी, परिवारजन
- निराशा: आशा का टूटना
- मतलब की दुनिया: स्वार्थी संसार
- जहर: विष
🔍 भजन का विशेष महत्त्व
⛵ नईया और खवईया
यह भजन जीवन को एक नाव के रूप में देखता है जिसे पार लगाने के लिए एक खेवनहार की जरूरत होती है। भक्त कहता है कि तुम ही नाव हो और तुम ही खेवनहार – यानी तुम ही सब कुछ हो।
🏠 आसरा
बार-बार "तुम्हीं आसरा हो" कहकर भक्त माता से अपनी लाचारी और उन पर पूर्ण निर्भरता व्यक्त करता है। जब दुनिया में कोई सहारा नहीं होता, तब माता ही एकमात्र सहारा होती हैं।
🎯 संदेश : संसार के रिश्ते निराशा ही देते हैं, अपने भी रुला देते हैं। लेकिन माता रानी ही वह सहारा हैं जो कभी निराश नहीं करतीं। वे हमारी नाव को भवसागर से पार लगाती हैं। बस जरूरत है उनके नाम को प्राणों से प्यारा करने की और उनकी शरण में जाने की।
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "तुम्हीं मेरी नईया तुम्हीं हो खवईया – माता भजन (Tumhi Meri Naiya Tumhi Ho Khavaiya) | Mata Rani Bhajan" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।
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