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राधा रानी को कन्हैया बड़ो प्यारो (ब्रज रस) कृष्ण भजन लिरिक्स | Radha Rani Ko Kanhaiya Bado Pyaro Krishna Bhajan Lyrics

313 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah | 2 मिनट पठन समय
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🙏 राधा रानी को कन्हैया बड़ो प्यारो

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।

(Radha Rani Ko Kanhaiya Bado Pyaro) – ब्रज रस कृष्ण भजन

🎵 माखन-चोरी, पनघट, कुंज गलिन – ब्रज की मनमोहन लीला

📝 भजन विवरण

🏷️ श्रेणी: कृष्ण भजन / ब्रज रस / लोकगीत
🎶 भाव: श्रृंगार, वात्सल्य, माधुर्य भक्ति
📍 विशेषता: ब्रजभाषा में रचित, कन्हैया की बाल-लीलाओं का सजीव वर्णन
📀 लोकप्रियता: जन्माष्टमी, होली, और कृष्ण भक्ति के अवसरों पर गाया जाने वाला अत्यंत प्रिय भजन

📜 भजन लिरिक्स (ब्रजभाषा-हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

राधा रानी को, श्यामा प्यारी को,
राधा रानी को कन्हैया बड़ो प्यारो,
मनमोहन मुरली वारो॥

॥ अंतरा १ – माखन-चोरी ॥

घर-घर माखन जाए चुरावे,
माखन खाए, दही फैलावे।
माखन-चोरी हू पे लागे बड़ो प्यारो,
मनमोहन मुरली वारो॥

॥ अंतरा २ – पनघट की लीला ॥

पनघट पे जल भरन न देवें,
गागर भरी शीश लुढ़कावे।
गागर फोरे हू पे लागे बड़ो प्यारो,
मनमोहन मुरली वारो॥

॥ अंतरा ३ – दधि दान और मटकी लूट ॥

गली सांकरी घेरे नित ही,
दधि को दान ले बरबस ही।
लूटे मटकी हू पे लागे बड़ो प्यारो,
मनमोहन मुरली वारो॥

॥ अंतरा ४ – कुंज गलिन में रार मचाना ॥

कुंज गलिन में जो मिल जावे,
बैयाँ पकड़ के रार मचावे।
रार करत पे लागे बड़ो प्यारो,
मनमोहन मुरली वारो॥

🎵 रचनाकार : लोक परम्परा (ब्रज क्षेत्र)

🗣️ भाषा: ब्रजभाषा-हिन्दी मिश्रित

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह अत्यंत मधुर ब्रज भजन कन्हैया (श्रीकृष्ण) और राधा रानी के परस्पर प्रेम तथा बाल-लीलाओं का सजीव वर्णन करता है। “राधा रानी को कन्हैया बड़ो प्यारो” – भक्त कहता है कि राधा को कन्हैया अत्यंत प्रिय हैं, और श्यामा (कृष्ण) को राधा प्यारी हैं। “मनमोहन मुरली वारो” – मुरली बजाने वाले मनमोहन कृष्ण का यह स्वरूप अति सुंदर है।

प्रत्येक अंतरे में कृष्ण की बाल-लीलाओं का वर्णन है – माखन-चोरी (घर-घर माखन चुराना, दही फैलाना), पनघट की लीला (ग्वालिनों से जल भरने न देना, गागर फोड़ना), मटकी लूट (गली में घेरकर दधि दान लेना), और कुंज गलिन में रार (बाँह पकड़कर रार मचाना)। ये सभी लीलाएँ कृष्ण के बाल स्वरूप की चंचलता, शरारत और राधा-कृष्ण के मधुर संबंधों को दर्शाती हैं।

भजन का मूल भाव यह है कि कृष्ण की ये लीलाएँ उनके भक्तों को अत्यंत प्रिय लगती हैं – “लागे बड़ो प्यारो” – हर लीला उनके प्रति प्रेम को और बढ़ा देती है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

ब्रज रस और लोक संस्कृति: यह भजन ब्रज की समृद्ध लोक परम्परा का प्रतीक है। ब्रजभाषा में रचित यह गीत आम जनता की भाषा में कृष्ण-लीलाओं का सहज वर्णन करता है।

माखन-चोरी से लेकर कुंज-रार तक: इसमें कृष्ण की बाल-लीलाओं का पूरा आनंद समाहित है। प्रत्येक अंतरा एक नई लीला प्रस्तुत करता है, जिससे भक्त कृष्ण के विभिन्न रूपों का आनंद ले सकते हैं।

राधा-कृष्ण का मधुर प्रेम: स्थायी पंक्तियों में राधा-कृष्ण के परस्पर प्रेम को रेखांकित किया गया है, जो भक्ति में माधुर्य भाव का सर्वोत्तम उदाहरण है।

💖 भक्ति रस का संगम

🎯 संदेश

कृष्ण की बाल-लीलाएँ केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि भक्ति के माधुर्य भाव को जगाने वाली हैं। राधा-कृष्ण का प्रेम सांसारिक नहीं, आध्यात्मिक आनंद का प्रतीक है।

✨ आस्था का प्रतीक

यह भजन गाते समय भक्त स्वयं को ब्रज की गलियों में महसूस करते हैं। कृष्ण की शरारतें उनके हृदय को प्रिय लगती हैं, और यही भक्ति का अनुपम रस है।

🙏 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।। राधे-राधे ।।

॥ इति ब्रज रस कृष्ण भजनम् ॥
॥ माखन-चोरी लागे बड़ो प्यारो, राधा रानी को कन्हैया बड़ो प्यारो ॥
श्रेणियां: radha rani bhajan

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 12 Aug 2026

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