राहु काल (Rahu Kaal)
03:00 PM - 04:30 PMसर्वथा अशुभ काल (नया कार्य या यात्रा न करें)
यमगण्ड (Yamaganda)
09:00 AM - 10:30 AMमृत्यु कारक होरा (मृत्यु तुल्य हानि का भय)
गुलिक काल (Gulika)
12:00 PM - 01:30 PMअवरोधक काल (विलंब का सामना करना पड़ सकता है)
राहुकाल में क्या करें और क्या न करें
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहुकाल के दौरान कुछ विशेष कार्य वर्जित माने गए हैं, जबकि कुछ कार्य किए जा सकते हैं:
वर्जित कार्य (Avoid)
- नया व्यापार या दुकान का शुभारंभ।
- गृह प्रवेश, विवाह या मुंडन संस्कार।
- सोना, वाहन, संपत्ति या कीमती वस्तुएं खरीदना।
- महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करना।
स्वीकृत कार्य (Allowed)
- पूर्व से चल रहे कार्यों को जारी रखना।
- भगवान शिव या हनुमान जी की मानसिक आराधना।
- राहु की शांति के लिए दान या मंत्र जप करना।
- आपातकालीन या जीवन रक्षक चिकित्सकीय कार्य।
राहुकाल का वैज्ञानिक व ज्योतिषीय आधार
खगोलीय रूप से, राहु कोई भौतिक तारा या ग्रह नहीं है। यह केवल पृथ्वी की कक्षा और चंद्रमा की कक्षा का प्रतिच्छेदन बिंदु (Intersection Node) है। इसे छाया ग्रह कहा जाता है।
जब सूर्य का प्रकाश पृथ्वी और चंद्रमा के इस चुंबकीय क्षेत्र से गुजरता है, तो एक निश्चित समय के लिए नकारात्मक विद्युत-चुंबकीय ऊर्जा (Negative Electromagnetic Field) उत्पन्न होती है, जो मानव मस्तिष्क की निर्णय क्षमता को प्रभावित करती है। इसी कारण इस समय को अशुभ माना जाता है।
साप्ताहिक राहुकाल चक्र समय सारणी
| दिन | राहुकाल (सूर्योदय ६:०० AM मानक मानकर) |
|---|---|
| सोमवार | सुबह ०७:३० से ०९:०० |
| मंगलवार | दुपहर ०३:०० से ०४:३० |
| बुधवार | दुपहर १२:०० से ०१:३० |
| गुरुवार | दुपहर ०१:३० से ०३:०० |
| शुक्रवार | सुबह १०:३० से दुपहर १२:०० |
| शनिवार | सुबह ०९:०० से १०:३० |
| रविवार | शाम ०४:३० से ०६:०० |
राहुकाल शंका समाधान (FAQs)
संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी
पंचांग गणना व संपादन
भक्तिलोक पंचांग परिषद (Bhaktilok Panchang Council)
गृह स्थिति, गोचर काल और स्थानीय सूर्योदय गणना के आधार पर सटीक वैदिक पंचांग डेटा तैयार करने वाली खगोलीय विंग।
ज्योतिषीय समीक्षा व सत्यापन
आचार्य रमन देव जोशी (Acharya Raman Dev Joshi)
वरिष्ठ खगोल शास्त्री व फलित ज्योतिष आचार्य। काशी विद्वत परिषद के मानद सदस्य।
पंचांग गणना सत्यापित