अभिजित मुहूर्त
11:40 AM - 12:30 PMसर्वकार्य सिद्धि के लिए विजय काल (दोपहर काल)
अमृत काल
06:30 PM - 08:00 PMअमृत योग (आध्यात्मिक कार्यों के लिए शुभ)
ब्रह्म मुहूर्त
04:24 AM - 05:12 AMअमृत बेला (पूजा-पाठ व ध्यान का सर्वोत्तम समय)
अभिजित मुहूर्त का धार्मिक व वैज्ञानिक महत्व
अभिजित मुहूर्त प्रतिदिन के ३० मुहूर्तों में से १५वां मुहूर्त है जो दोपहर के ठीक मध्य में (सूर्योदय व सूर्यास्त के मध्य) आता है। इस मुहूर्त का स्वामी **ब्रह्मा जी** हैं।
धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध इसी मुहूर्त में किया था। यह समय इतना शक्तिशाली होता है कि यदि किसी कार्य के लिए कोई विशेष मुहूर्त उपलब्ध न हो, तो भी अभिजित मुहूर्त में कार्य शुरू करने से राहुकाल व अन्य दोषों का प्रभाव समाप्त हो जाता है। (बुधवार के दिन अभिजित में कार्य वर्जित माना जाता है)।
शुभ मुहूर्त के वैदिक नियम
मुहूर्त शास्त्र के अनुसार, शुभ समय का उपयोग करने के लिए कुछ आवश्यक सावधानियां बरतनी चाहिए:
अमृत काल या अन्य शुभ काल के दौरान भी यदि राहुकाल सक्रिय हो जाए, तो राहुकाल की अवधि में नया काम शुरू करने से बचना चाहिए।
ब्रह्म मुहूर्त के समय किया गया योगाभ्यास, संध्या उपासना और ग्रंथों का अध्ययन सीधे हमारे चेतन मन में स्थायी प्रभाव डालता है।
शुभ मुहूर्त शंका समाधान (FAQs)
संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी
मुहूर्त काल निर्धारण व संपादन
भक्तिलोक पंचांग परिषद (Bhaktilok Panchang Council)
खगोलीय वेधशाला गणनाओं के आधार पर अयन, ऋतु और देशांतर का समायोजन करके शुभ मुहूर्त निकालने वाली विंग।
ज्योतिषीय समीक्षा व सत्यापन
डॉ. रामनाथ पाठक (Dr. Ramnath Pathak)
वाराणसी पंचांग शोध केंद्र के वरिष्ठ संकाय सदस्य व ज्योतिषाचार्य। २५+ वर्षों का अनुभव।
मुहूर्त गणना सत्यापित