आरती (आरार्तिकम्) पूजन की अंतिम क्रिया है, जो पूजा में रह गई किसी भी कमी को पूर्ण करती है। पंच तत्वों के प्रतीक दीप को घुमाने से हमारे पांच प्राण जागृत होते हैं और सकारात्मक तरंगों का प्रवाह होता है। आज की मुख्य आरती, लिरिक्स और पूजन विधि विस्तार से जानें।
प्रभाव: ऊर्जा शुद्धि व शांति समय: प्रातः व संध्या काल
26 Sep 2026 | दैनिक अनुशंसित आरती
राम नाम अनमोल है प्यारे सुबह शाम तुम लिया करो भजन इन हिंदी
<div> <div> <h2>मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन</h2> <p>शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें</p> </div> <div> <div> <h2 >राम नाम अनमोल है प्यारे सुबह शाम तुम लिया करो </h2><p ><b> राम नाम अनमोल है प्यारे सुबह शाम तुम लिया करो,</b></p><p >जो कोई आये द्वार तुम्हारे उसकी सेवा किया करो,</p><p >राम नाम अनमोल है प्यारे सुबह शाम तुम लिया करो,</p><p >ना मालुम किस वेश में तुम को नारायण मिल जाएगा,</p><p >राम नाम से लगन लगा वैकुंठ द्वार खुल जाएगा,</p><p >रुखी सुखी खाए के भईया ठंडा पानी पिया करो,</p><p >|| जो कोई आये द्वार तुम्हारे उसकी सेवा किया करो ||</p><p >अच्छी करनी करो हमेशा और अच्छा व्यवाहर करो,</p><p >सदा करो सत्संग प्रभु का परमेश्वर से प्यार करो,</p><p >रोज सवेरे नित नियम से राम का दर्शन किया करो,</p><p >|| जो कोई आये द्वार तुम्हारे उसकी सेवा किया करो ||</p><p >माता पिता और गुरु चरणों में सब से प्रथम परनाम करो,</p><p >रामायण को पड़ो हमेशा गीता जी का ध्यान धरो,</p><p >जो कुछ देवे तुम्हे राम जी सब्र उसी में किया करो,</p><p >|| जो कोई आये द्वार तुम्हारे उसकी सेवा किया करो ||</p><div ><b><u>Letest Ram Bhajan :-</u></b> </div> </div> <div> <i></i> साझा करें: <a href="https://api.whatsapp.com/send?text=%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE+%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%AE+%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%B2+%E0%A4%B9%E0%A5%88+%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%87+%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%AC%E0%A4%B9+%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%AE+%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%AE+%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE+%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8B+%E0%A4%AD%E0%A4%9C%E0%A4%A8+%E0%A4%87%E0%A4%A8+%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80%20http%3A%2F%2F127.0.0.1%2Fbhaktilok%2F2021%2F05%2Fram-name-anamol-hai-pyare-subah-sham.html" target="_blank" title="WhatsApp पर साझा करें"><i></i></a> <a href="https://www.facebook.com/sharer/sharer.php?u=http%3A%2F%2F127.0.0.1%2Fbhaktilok%2F2021%2F05%2Fram-name-anamol-hai-pyare-subah-sham.html" target="_blank" title="Facebook पर साझा करें"><i></i></a> <a 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भक्त को सीधे साकेत धाम की पावन चेतना से जोड़ते हैं।</p> <p>भजन का प्रमुख भाव शरणागति का है। जब जीव समस्त सांसारिक प्रपंचों से थककर भगवान राम के चरणों में शरण लेता है, तो उसे परम अभय की प्राप्ति होती है। राम नाम की ध्वनि से वातावरण शुद्ध होता है और अंतःकरण में धर्म और सत्य के प्रति निष्ठा दृढ़ होती है।</p> </div> </div> <div> <div> <h3><i></i> 🔍 विशेष महत्त्व और लाभ</h3> <p>सनातन ग्रंथों के अनुसार, राम नाम का जाप कलयुग का सर्वश्रेष्ठ साधन माना गया है। <strong>वाल्मीकि रामायण</strong> और रामचरितमानस में राम नाम की असीम महिमा गाई गई है। यह भजन साधक के मन में वैराग्य, संयम, दया और कर्तव्य परायणता जैसे नैतिक मूल्यों का संचार करता है।</p> <p>प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए <a href="http://127.0.0.1/bhaktilok/pages/ramayan-explorer.php">रामायण महाग्रंथ अन्वेषक</a> का उपयोग करें। राम नाम के संकीर्तन से व्यक्ति का आत्मबल जागृत होता है, भय तथा शंकाओं का नाश होता है और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य रखने की शक्ति प्राप्त होती है। यह पारिवारिक सौहार्द और मर्यादा की स्थापना में सहायक है।</p> </div> </div> </div> <div> <h3><i></i> 🕒 साधना एवं गायन विधि</h3> <p>राम भजन का संकीर्तन प्रातःकाल स्नान के पश्चात राम दरबार की प्रतिमा के सम्मुख घी का दीपक जलाकर करें। तुलसी की माला से राम नाम का जप करने के पश्चात इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी होता है।</p> </div> <div> <h3><i></i> ❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)</h3> <div> <div><h5><i></i> राम भजन के गायन से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?</h5><p>राम भजन के संकीर्तन से मानसिक शांति, उत्तम चरित्र, और विपत्तियों में धैर्य बनाए रखने का आत्मबल प्राप्त होता है।</p></div><div><h5><i></i> राम नाम जप के लिए सर्वश्रेष्ठ माला कौन सी है?</h5><p>भगवान श्री राम के मंत्र जाप और संकीर्तन के लिए तुलसी की माला को सर्वश्रेष्ठ और अत्यंत पवित्र माना गया है।</p></div><div><h5><i></i> क्या राम भजन बच्चों के संस्कारों के लिए उपयोगी है?</h5><p>हाँ, भगवान राम के मर्यादापूर्ण चरित्र के भजन सुनने से बच्चों में बड़ों के प्रति सम्मान, सत्यप्रियता और उच्च नैतिक संस्कारों का विकास होता है।</p></div> </div> 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सनातन परम्परा में आरती उतारने के पीछे गहरा खगोलीय व स्वास्थ्य विज्ञान छुपा है। आरती की थाल को इष्टदेव के सम्मुख गोलाकार घुमाने से वातावरण में **अवरक्त तरंगें (Infrared Waves)** बनती हैं जो कमरे की नकारात्मक जीवाणुओं को नष्ट करती हैं।
आरती के साथ बजने वाली शंख व घंटी की ध्वनि से मस्तिष्क का बायां और दायां हिस्सा संतुलित होता है, जिससे तनाव कम होता है और एकाग्रता बढ़ती है। कपूर का प्रज्वलन पर्यावरण शुद्धि और नकारात्मक गंधों को समाप्त करने में अचूक माना जाता है।
आरती उतारने के शास्त्र सम्मत नियम
हरिभक्तिविलास और तंत्र ग्रंथों के अनुसार देव मूर्ति के समक्ष आरती घुमाने का विशेष अनुक्रम है:
१. चरणों, नाभि व मुख की आवृत्ति
सबसे पहले भगवान के चरणों के सम्मुख चार बार, नाभि के सम्मुख दो बार, मुखमंडल के सम्मुख एक बार और तत्पश्चात भगवान के पूरे शरीर के सम्मुख सात बार चक्राकार रूप में आरती घुमाएं।
२. आरती ग्रहण करने की विधि
आरती समाप्त होने के बाद थाल के चारों ओर थोड़ा जल छिड़कें (जल का अर्घ्य दें)। फिर आरती को दोनों हाथों की अंजुली से लेकर अपने सिर और आंखों को स्पर्श करें, जिसे कल्याणकारी आशीर्वाद ग्रहण करना कहते हैं।
आरती सम्बन्धी शंका समाधान (FAQs)
कपूर की आरती को **नीराजन** कहा जाता है, यह हमारे सूक्ष्म शरीर की शुद्धि और नकारात्मक विचारों के विनाश के लिए उत्तम है। जबकि गाय के घी के दीपक से की जाने वाली आरती जीवन में समृद्धि और सात्विक ऊर्जा का प्रवाह लाती है।
शास्त्रों के अनुसार बिना वाद्य यंत्रों (विशेष रूप से घंटी) के की गई आरती अधूरी मानी जाती है। घंटी की ध्वनि में 'ॐ' की नाद समाहित होती है जो आसुरी शक्तियों का नाश करती है और देवताओं को प्रसन्न करती है।
संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी
आरती पाठ शुद्धि व संपादन
भक्तिलोक स्तोत्र परिषद (Bhaktilok Stotra Council)
प्राचीन हस्तलिखित स्तोत्रों और प्रामाणिक गीताप्रेस प्रकाशनों के आधार पर आरती के मूल शब्दों व लयबद्ध नियमों का संरक्षण करने वाली शाखा।
कर्मकाण्ड समीक्षा
पं. मदन मोहन शास्त्री (Pt. Madan Mohan Shastri)
वेद प्रवक्ता व कर्मकाण्ड आचार्य, काशी विश्वविद्यालय। २८+ वर्षों का धार्मिक अनुष्ठान व पूजा विधि समीक्षा अनुभव।