पुत्रदा एकादशी (Putrada Ekadashi)
संतान सुख व रक्षा हेतु रखा जाने वाला पावन व्रत। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना की जाती है।
सावन सोमवार व्रत (Sawan Somvar Vrat)
श्रावण मास का पवित्र सोमवार व्रत। भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्ति हेतु रखा जाता है।
रक्षा बन्धन (Raksha Bandhan)
भाई-बहन के पवित्र प्रेम का महापर्व। बहनें भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं।
भाद्रपद पूर्णिमा (Bhadrapad Purnima)
सत्यनारायण भगवान की पूजा और कथा का उत्तम दिवस। इस दिन से श्राद्ध पक्ष की शुरुआत होती है।
भाद्रपद अमावस्या (Bhadrapad Amavasya)
पितृ तर्पण, दान व श्राद्ध कर्म के लिए अत्यंत शुभ और शांतिदायक दिवस।
हिन्दू पंचांग का वैज्ञानिक आधार (५ मुख्य अंग)
हिन्दू कैलेंडर सौर और चन्द्र दोनों गणनाओं का मिश्रण है (Lunisolar Calendar)। इसके पांच मुख्य अंग होते हैं, जिन्हें मिलाकर **पंचांग** कहा जाता है:
चन्द्रमा और सूर्य के बीच के अंतर को १२ अंशों के भागों में बांटने से तिथि बनती है। कुल ३० तिथियां होती हैं (१५ शुक्ल पक्ष, १५ कृष्ण पक्ष)।
सप्ताह के ७ दिन जो ७ सौर मंडल ग्रहों के नाम पर आधारित हैं (सोम, मंगल, बुध आदि)।
आकाश मंडल के २७ भागों में से चन्द्रमा आज जिस भाग में गोचर कर रहा है, वह नक्षत्र कहलाता है।
सूर्य और चन्द्रमा के स्थान योग से कुल २७ योग बनते हैं, और तिथि के आधे भाग को 'करण' कहा जाता है (कुल ११ करण होते हैं)।
हिन्दू कैलेंडर शंका समाधान (FAQs)
संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी
कैलेंडर तिथि संपादन
भक्तिलोक पंचांग परिषद (Bhaktilok Panchang Council)
वैदिक गणित गणनाओं और स्थानिक गृह गोचर स्थितियों के आधार पर उत्सव और व्रत सूचियां सत्यापित करने वाली विंग।
ज्योतिषीय समीक्षा व सत्यापन
पं. देवदत्त शास्त्री (Pt. Devdutt Shastri)
वाराणसी पंचांग शोध केंद्र के अध्यक्ष। ३५+ वर्षों का वैदिक पंचांग लेखन व संपादन अनुभव।
कैलेंडर तिथियां सत्यापित