देव स्वरूप व प्रतीक विमर्श विनिर्देशन
भगवान शिव (Lord Shiva)
| १. आध्यात्मिक स्वरूप (Representation): | संहारक व कल्याणकारी देव। |
| २. प्रमुख वाहन (Vahana): | नंदी बैल (धर्म का प्रतीक)। |
| ३. प्रतीक शास्त्र/शस्त्र (Symbols): | त्रिशूल, डमरू, जटाजूट, अर्धचंद्र। |
| ४. सिद्ध मूल मंत्र (Beej Mantra): | ॐ नमः शिवाय |
| विशेष देव टिप: 0 | |
मंदिर में देव विग्रह स्थापित करने के ५ आवश्यक नियम
घर के मंदिर में देव विग्रहों (मूर्तियों) की स्थापना करते समय इन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:
घर के मंदिर में कभी भी एक ही देव विग्रह के सम्मुख दूसरा विग्रह आमने-सामने नहीं होना चाहिए। इसके अलावा, एक ही घर में ३ गणेश, ३ देवियाँ, या २ शंख एक साथ पूजा गृह में स्थापित करना वर्जित माना जाता है।
गृहस्थों के घर में मूर्तियों की ऊंचाई हमेशा अंगूठे से लेकर ९ इंच तक होनी चाहिए। इससे बड़ी मूर्तियों के लिए कड़े प्राण प्रतिष्ठा नियमों और नित्य नैवेद्य का ध्यान रखना अनिवार्य हो जाता है जो गृहस्थ जीवन में कठिन है।
देव स्वरूप शंका समाधान (FAQs)
दाहिनी सूंड वाले गणेश (सिद्धिविनायक): यह उग्र स्वभाव (सूर्य नाड़ी) के होते हैं। इनकी पूजा के लिए कड़े नियमों की आवश्यकता होती है, अतः इन्हें मंदिरों या विशेष तांत्रिक साधनाओं में ही स्थापित किया जाता है।
संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी
देव विग्रह व रूप संपादन
भक्तिलोक विग्रह शोध परिषद (Bhaktilok Iconography Desk)
श्रीमद्देवीभागवत, शिवपुराण और विष्णुधर्मोत्तर पुराण के रूप-चित्रण अध्यायों के अनुसार देव स्वरूप संकलन करने वाली विंग।
कर्मकांड व वैदिक देव समीक्षा
आचार्य देवदत्त शास्त्री (Acharya Devdutt Shastri)
पूर्व अध्यक्ष, संस्कृत संस्कृति विभाग, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय काशी। ३०+ वर्षों का देव प्रतिष्ठा व वैदिक मूर्ति लक्षण समीक्षा अनुभव।
देव स्वरूप सत्यापित