घर मंदिर वास्तु विन्यास नियोजक
वास्तु विश्लेषण व विन्यास रिपोर्ट
| १. वास्तु अनुकूलता (Vastu Compatibility): | 0 |
| २. अनुशंसित रंग योजना (Wall Colors): | 0 |
| ३. मूर्तियों की दिशा व मुख (Facing): | 0 |
| ४. वर्जित बातें (Things to Avoid): | 0 |
| विशेष वैदिक टिप: पूजा घर में कभी भी खंडित विग्रह (टूटी मूर्तियाँ) न रखें। | |
मूर्तियों के विन्यास व आकार के ५ आवश्यक शास्त्रीय नियम
मंदिर में भगवान के विग्रहों (मूर्तियों) की स्थापना करते समय शास्त्र सम्मत मर्यादाओं का पालन करना अनिवार्य है:
घर के मंदिर में स्थापित की जाने वाली मूर्तियों की ऊंचाई कभी भी ९ इंच से अधिक नहीं होनी चाहिए। अंगूठे के आकार की मूर्तियाँ गृहस्थों के पूजन हेतु सर्वोत्तम मानी जाती हैं, क्योंकि बड़ी मूर्तियों के लिए कड़े प्राण-प्रतिष्ठा नियमों की आवश्यकता होती है।
वेदी पर भगवान गणेश को सदैव बाईं ओर (left side) स्थापित करें, और उनके साथ माता लक्ष्मी को दाहिनी ओर स्थापित किया जाता है। एक ही देवी-देवता की दो मूर्तियाँ एक साथ एक मंदिर में नहीं रखनी चाहिए।
मंदिर वास्तु शंका समाधान (FAQs)
संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी
गृह वास्तु शास्त्र संकलन
भक्तिलोक गृह विन्यास विंग (Bhaktilok Vastu Desk)
विश्वकर्मा प्रकाश, समरांगण सूत्रधार और मयमतम् वास्तु संहिताओं के आधार पर मंदिर स्थापत्य दिशाओं का मिलान करने वाली विंग।
वास्तु व कर्मकांड समीक्षा
आचार्य गोपीनाथ त्रिपाठी (Acharya Gopinath Tripathi)
वरिष्ठ प्राध्यापक, ज्योतिष व वास्तु शास्त्र विभाग, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय काशी। ३०+ वर्षों का देव प्रतिष्ठा व गृह मंदिर विन्यास अनुभव।
विन्यास सूत्र सत्यापित