ज्योतिर्लिंग पौराणिक व भौगोलिक विनिर्देशन
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग
| १. राज्य / भौगोलिक स्थिति: | प्रभात पाटन, वेरावल, गुजरात। |
| २. पौराणिक इतिहास व महिमा: | 0 |
| ३. विशेष पूजा अनुष्ठान / दर्शन नियम: | 0 |
| विशेष शास्त्र निर्देश: 0 | |
"सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम्।
भक्तिप्रदानाय कृपावतीर्णं तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये॥"
ज्योतिर्लिंग अभिषेक के ५ आवश्यक शास्त्र सम्मत नियम
ज्योतिर्लिंगों के दर्शन व पूजा करते समय शिवपुराण के अनुसार इन बातों का पालन करना अनिवार्य है:
त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग में जल चढ़ाना वर्जित है। यहाँ शिवलिंग एक छोटे गड्ढे के समान है जिसमें त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) के प्रतीक अंगूठे के आकार के तीन लिंग हैं। यहाँ गीले सूती वस्त्र पहनकर ही गर्भ गृह में पूजा का नियम है।
शिव मंदिर में कभी भी पूर्ण परिक्रमा (गोलाई) नहीं की जाती। केवल आधी परिक्रमा ही की जाती है। जहां से अभिषेक का जल बाहर बहता है (जलाधारी/सोमसूत्र), उसे भूलकर भी लांघना नहीं चाहिए। जलाधारी लांघने से घोर पाप लगता है।
ज्योतिर्लिंग शंका समाधान (FAQs)
संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी
शिवपुराण शोध व संपादन
भक्तिलोक शैव विमर्श पीठ (Bhaktilok Shaiva Desk)
शिवपुराण कोटिरुद्रसंहिता, निर्णयसिंधु और लिंगपुराण ग्रंथों के श्लोकों के आधार पर ज्योतिर्लिंग विवरणों का संपादन करने वाली विंग।
कर्मकांड व ज्योतिर्लिंग महाभिषेक समीक्षा
आचार्य सोमनाथ दीक्षित (Acharya Somnath Dixit)
पूर्व मुख्य अर्चक, काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास। ३५+ वर्षों का द्वादश ज्योतिर्लिंग वैदिक अभिषेक कर्मकांड समीक्षा अनुभव।
ज्योतिर्लिंग इतिहास सत्यापित