चंद्र तिथि व व्रत-त्यौहार विनिर्देशन
पूर्णिमा (Full Moon)
| १. खगोलीय स्थिति (Astronomy): | सूर्य व चंद्रमा १८० अंश पर (विपरीत दिशा में)। |
| २. जैविक / मानसिक प्रभाव (Body Effect): | 0 |
| ३. व्रत, पूजन व मुख्य देव (Deity Vows): | 0 |
| ४. शास्त्रीय पथ्य / अपथ्य आहार (Diet): | 0 |
| विशेष पंचांग सूत्र: 0 | |
चंद्र कलाओं के ३ अचूक जैविक व खगोलीय प्रभाव
आधुनिक विज्ञान और प्राचीन ऋषि दोनों इस बात पर सहमत हैं कि चंद्रमा का खिंचाव हमारे मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है:
हमारा शरीर ७०% जल से निर्मित है। पूर्णिमा और अमावस्या के दिन चंद्रमा के तीव्र गुरुत्वाकर्षण बल के कारण शरीर के रक्त संचार और कोशिकीय द्रवों (cellular fluids) में खिंचाव बढ़ता है। इससे संवेदनशील लोगों में भावुकता, क्रोध या सिरदर्द की समस्या बढ़ सकती है।
एकादशी तिथि (११वीं कला) को चंद्रमा का खिंचाव सबसे संतुलित होता है। इस दिन उपवास रखने से शरीर के अंगों में जलीय संतुलन बना रहता है, मस्तिष्क के न्यूरो-फ्लूइड्स शांत रहते हैं जिससे साधक का मन एकाग्र और ध्यान केंद्रित करने में समर्थ होता है।
चंद्र कला पंचांग शंका समाधान (FAQs)
अमावस्या व्रत: यह पूर्ण अंधकार की तिथि है, जो हमारे पूर्वजों (पितरों) को समर्पित है। इस दिन कोई शुभ मांगलिक कार्य (विवाह, मुंडन) नहीं किया जाता। इस दिन मौन रहना, पितृ तर्पण करना, दान देना और गीता का पाठ करना आत्मा की शांति के लिए परम आवश्यक माना गया है।
संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी
खगोल ज्योतिष व पंचांग संपादन
भक्तिलोक पंचांग गणित विभाग (Bhaktilok Panchang Desk)
सूर्य सिद्धांत, सिद्धांत शिरोमणि और निर्णयसिंधु ग्रंथों की ग्रह गणितीय तालिकाओं के अनुसार चंद्र कलाओं की व्याख्या करने वाली विंग।
ज्योतिषीय काल गणना समीक्षा
पं. प्रभाकर शुक्ल (Pt. Prabhakar Shukla)
वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य, जगन्नाथ मंदिर पंचांग सभा। ३०+ वर्षों का चंद्र ग्रहण, तिथि क्षय व संक्रांति गणितीय शुद्धि समीक्षा अनुभव।
चंद्र कला विवरण सत्यापित