अष्टोत्तर शतनामावली अन्वेषण
श्री गणेश अष्टोत्तर शतनामावली:
शतनामावली पाठ करने के ५ शास्त्रीय नियम
देवताओं के नाम जप का पूर्ण फल प्राप्त करने हेतु शास्त्रों में बताए गए इन विधानों का पालन करें:
जब भी नामों का हवन या अर्पण किया जाता है, तो नाम को चतुर्थी विभक्ति में बोलना चाहिए। जैसे 'गणपति' नाम को **"ॐ गणपतये नमः"** कहकर अक्षत, दूर्वा या पुष्प अर्पित करना चाहिए। केवल नाम बोलने से अधिक प्रभावी मन्त्र स्वरूप है।
ब्रह्मांड में सूर्य की दूरी पृथ्वी के व्यास की १०८ गुना है। हमारे शरीर में ७२,००० नाड़ियाँ हैं जिनमें से मुख्य १०८ नाड़ियों का जंक्शन हृदय चक्र (Heart Chakra) पर होता है। १०८ बार जप करने से नाड़ियाँ शुद्ध होती हैं।
शतनामावली शंका समाधान (FAQs)
संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी
ग्रन्थ नाम कोश संपादन
भक्तिलोक नाम कोश पीठ (Bhaktilok Nomological Desk)
पद्म पुराण, शिवरहस्य और देवीभागवत पुराण के सहस्रनामों से १०८ प्रमुख नाम संकलन करने वाली विंग।
वैदिक नामावली व विग्रह समीक्षा
पं. रामेश्वरानन्द शास्त्री (Pt. Rameshwaranand Shastri)
पूर्व अध्यक्ष, नाम-जप परिषद, अयोध्या। ३१+ वर्षों का वैष्णव व शैव नामावली व्याख्या व मन्त्र शुद्धि समीक्षा अनुभव।
नामावली अर्थ सत्यापित