श्राद्ध कर्म व तर्पण विधि निर्देशिका
तर्पण जल विधि
| १. आवश्यक पूजन सामग्री (Ingredients): | तांबे का पात्र, कुशा घास, काले तिल, जौ, गाय का कच्चा दूध। |
| २. वैदिक विधि व दिशा (Method): | 0 |
| ३. मानसिक संकल्प मन्त्र (Mantra): | 0 |
| गरुड़ पुराण टिप: 0 | |
पंचबलि का गूढ़ पारिस्थितिक व आध्यात्मिक रहस्य
श्राद्ध के दिन भोजन तैयार होने के बाद थाली से ५ हिस्से निकाले जाते हैं, जिसका पारिस्थितिक (ecological) व आध्यात्मिक महत्व है:
गौ बलि (गाय): पृथ्वी तत्व व देवताओं की प्रसन्नता हेतु।
श्वान बलि (कुत्ता): यमराज के द्वारपालों की प्रसन्नता व सुरक्षा हेतु।
काक बलि (कौआ): कौए को पितरों का दूत माना जाता है। वायु तत्व के संतुलन हेतु इसका भोग आवश्यक है।
देव बलि: पंचभूत शक्तियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने हेतु।
पिपीलिका बलि (चींटी): लघुतम भूमि जीवों के प्रति अन्न समर्पण। यह प्रकृति के प्रति हमारे दायित्व को दर्शाता है जिससे सूक्ष्म पितृ दोष दूर होते हैं।
पितृपक्ष श्राद्ध शंका समाधान (FAQs)
१. सर्वपितृ अमावस्या (आश्विन कृष्ण अमावस्या): इस दिन परिवार के उन सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों का श्राद्ध व तर्पण किया जा सकता है जिनकी तिथि ज्ञात नहीं है।
२. पिता का श्राद्ध अष्टमी या नवमी तिथि को और माता का श्राद्ध नवमी (मातृ नवमी) तिथि को किया जा सकता है।
संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी
कर्मकांड व पितृ शास्त्र संपादन
भक्तिलोक कर्मकांड पीठ (Bhaktilok Karma Kanda Desk)
गरुड़ पुराण, श्राद्ध पारिजात और हेमाद्रि चतुर्वर्ग चिंतामणि संहिताओं के श्लोकों के अनुसार श्राद्ध विधि संकलन करने वाली विंग।
श्राद्ध निर्णय व तिथि समीक्षा
पं. विद्याधर द्विवेदी (Pt. Vidyadhar Dwivedi)
कुलपति, सनातन धर्म संस्कृत महाविद्यालय, गयाजी। ३५+ वर्षों का गया विष्णुपद पिण्डदान व गया श्राद्ध विधि समीक्षा अनुभव।
विधि व तिथियां सत्यापित