सूर्योदय आधारित दैनिक संधिकाल मुहूर्त्त गणक
दैनिक पूजा व आरती समय सारिणी:
| संधिकाल / पूजा | गणना समय खिड़की | वैज्ञानिक महत्व | अलार्म सहेजें |
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वैदिक पंचांग काल का गणितीय विभाजन
प्राचीन ऋषियों ने समय मापन के लिए अत्यंत परिष्कृत (precise) इकाइयों की रचना की थी:
१ दिन-रात (२४ घंटे) = ६० घाटी।
१ घाटी = २४ मिनट।
१ विघटी = २४ सेकंड।
इस गणितीय विभाजन के अनुसार, संध्यावंदन का समय प्रातः और सायं संधिकाल पर ठीक २ घाटी (४८ मिनट) का निर्धारित किया गया है, जो प्रकृति में ऊर्जा परिवर्तन का सूचक है।
१ दिन-रात में कुल ३० मुहूर्त होते हैं। प्रत्येक मुहूर्त २ घाटी (४८ मिनट) का होता है। सूर्योदय से ठीक २ मुहूर्त पहले (९६ मिनट पूर्व) **'ब्रह्ममुहूर्त'** प्रारंभ होता है। इस काल में वायुमंडल में ओजोन गैस (O3) की मात्रा सर्वाधिक होती है जो प्राणशक्ति बढ़ाती है।
पूजा समय पंचांग शंका समाधान (FAQs)
संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी
पंचांग गणित व काल गणना संपादन
भक्तिलोक पंचांग काल अनुसंधान विभाग (Bhaktilok Time Math Wing)
सूर्य सिद्धांत और सिद्धांत शिरोमणि के ग्रह गतियों के समय मापदंडों के अनुसार पंचांग गणनाएं करने वाली विंग।
मुहूर्त्त व संधिकाल समीक्षा
पं. मदनमोहन पाठक (Pt. Madanmohan Pathak)
प्रधान ज्योतिषाचार्य, काशी पंचांग सभा। ३१+ वर्षों का ग्रहण वेध, ग्रह गोचर व मुहूर्त्त संधिकाल शुद्धि समीक्षा अनुभव।
समय सारिणी सत्यापित