सत्यमेव जयते नानृतम्।
satyameva jayate nānṛtam
भावार्थ: हमेशा सत्य की ही विजय होती है, असत्य (झूठ) की नहीं।
सुभाषित का जीवन में अमूल्य महत्त्व
संस्कृत व्याकरण में 'सुभाषित' शब्द दो शब्दों के मेल से बना है: **'सु'** अर्थात उत्तम/सुंदर और **'भाषित'** अर्थात कहे गए वचन। हमारे महापुरुषों और मनीषियों ने सदियों के गहन स्वाध्याय और आत्मसाक्षात्कार के बाद इन सुभाषितों की रचना की है।
इन छोटे श्लोकों में जीवन का बहुत बड़ा व्यावहारिक और आध्यात्मिक ज्ञान (Niti) छुपा होता है। इनका नित्य स्मरण करने से मनुष्य का चरित्र सुदृढ़ होता है, काम, क्रोध और लोभ जैसे विकारों पर नियंत्रण प्राप्त होता है और विपरीत परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है।
नित्य सुभाषित स्वाध्याय की सरल विधि
सुभाषितों के ज्ञान को जीवन में आत्मसात करने के लिए निम्नलिखित व्यावहारिक अभ्यास करें:
सुभाषित सम्बन्धी आम प्रश्न (FAQs)
संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी
लेखन एवं संकलन
भक्तिलोक शोध मंडल (Bhaktilok Research Council)
धार्मिक ग्रंथों के प्राचीन ज्ञान का सरल और प्रामाणिक अनुवाद करने वाली समर्पित संस्था।
तथ्य-जांच व धार्मिक समीक्षा
डॉ. विकास शास्त्री (Dr. Vikas Shastri)
वैदिक संस्कृति व संस्कृत साहित्य के विद्वान। पीएचडी (वैदिक अध्ययन)।
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