सर्ग का संक्षिप्त परिचय एवं प्रसंग
प्रसंग सार संक्षेप
सुन्दरकाण्ड के सातवें सर्ग में हनुमान् लंका के राक्षसराज रावण के अन्तःपुर में प्रवेश करते हैं और वहाँ पुष्पक विमान को देखकर आश्चर्यचकित होते हैं। इसके पश्चात वे रावण की शय्या और उसकी स्त्रियों को देखते हैं, किन्तु सीता को वहाँ न पाकर अन्यत्र खोजने का निश्चय करते हैं।
सर्ग की विस्तृत पृष्ठभूमि
आध्यात्मिक व्याख्या एवं कथा
📖 श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण – सुन्दरकाण्ड – सर्ग ७
(हनुमान् का रावण के अंत:पुर में पुष्पक विमान देखना)
🔆 प्रस्तावना : हनुमान् ने समुद्र लाँघकर लंका में प्रवेश किया। रात्रि के समय वे लंका नगरी का भ्रमण करते हुए रावण के महल में पहुँचे। वहाँ उन्होंने अपूर्व ऐश्वर्य देखा। इस सर्ग में हनुमान् द्वारा रावण के अन्तःपुर का निरीक्षण, पुष्पक विमान का दर्शन, तथा रावण और उसकी स्त्रियों को सोते हुए देखने का वर्णन है। सीता वहाँ न मिलने पर हनुमान् आगे की खोज हेतु निकल पड़े।
✨ हनुमान् का रावण-भवन में प्रवेश एवं पुष्पक विमान (श्लोक १-१५)
राक्षसाधिपतेर्द्दष्ट्वा परां वृद्धिमुपस्थितम् ॥
ददर्श पुष्पकं नाम विमानं हेमभूषितम् ।
प्रभूतरत्ननिचयं कुबेरभवनोपमम् ॥
तस्य हेममयैः स्तम्भैर्मणिविद्रुमवेदिकैः ।
सोपानैश्च महार्हैश्च विचित्रैरुपशोभितम् ॥
तच्चन्द्रशिशिरैर्मुक्ताजालैः प्रतिविभूषितम् ।
विमानं द्विरदेन्द्रस्य गजेन्द्रस्येव वल्गुना ॥
🛌 रावण के अन्तःपुर का निरीक्षण (श्लोक १६-३५)
सुप्तं भूषणभूषाङ्गं विमानशतसंवृतम् ॥
नानारत्नप्रभाजुष्टं नानास्त्रणकृतास्पदम् ।
महार्हशयनं दिव्यं रावणस्य महात्मनः ॥
तस्योपरि महार्हाणि चित्राणि विविधानि च ।
व्यजनानि च तत्रासन् वीज्यमानानि योषिताम् ॥
ददर्श च महाबाहुः सुप्तांस्तत्र महाबलान् ।
राक्षसान् राक्षसेन्द्रस्य रक्षार्थं पर्युपस्थितान् ॥
ततः प्रविश्य हनुमान् रावणस्य निवेशनम् ।
ददर्श रावणं सुप्तं मन्दोदर्या समन्वितम् ॥
🧘 हनुमान् का आत्मचिन्तन और आगे बढ़ना (श्लोक ३६-४२)
रावणस्य निकुञ्जेषु शयितुं युज्यते क्वचित् ॥
भर्तारं नानुपश्यन्ती सीता धर्मपरायणा ।
रावणस्य न शयने कथं शयितुमर्हति ॥
इति संचिन्त्य हनुमान् रामकार्यहिते रतः ।
तस्मात् प्रदेशान्निश्चक्राम सीतान्वेषणतत्परः ॥
🎯 सर्ग निचोड़ : इस सर्ग में हनुमान् ने रावण के अन्तःपुर और पुष्पक विमान का सुन्दर वर्णन किया है। सीता को वहाँ न पाकर वे निराश नहीं होते, वरन् नई उमंग से खोज जारी रखते हैं। यह हनुमान् के अटल धैर्य और राम-भक्ति का प्रतीक है।
🔍 सर्ग का गूढ़ार्थ एवं विशेष महत्त्व
🕉️ हनुमान् का संयम
रावण को निद्रावस्था में देखकर भी हनुमान् ने उसका वध नहीं किया, क्योंकि उनका मुख्य उद्देश्य सीता का पता लगाना था। यह उनके कर्तव्यपरायणता और संयम को दर्शाता है।
🏰 पुष्पक विमान का वैभव
पुष्पक विमान का वर्णन रामायण में एक विशिष्ट स्थान रखता है। यह विमान बाद में राम-रावण युद्ध के उपरान्त विभीषण द्वारा राम को सौंपा गया था।
🌙 सीता की पतिव्रता
हनुमान् के चिन्तन से सीता के पतिव्रताधर्म की झलक मिलती है। वे राम के अतिरिक्त किसी और के समीप रहना तो दूर, उनके भवन में भी नहीं रह सकतीं।
📜 रावण का ऐश्वर्य
इस सर्ग में रावण के ऐश्वर्य का भव्य वर्णन है, जो लंका की समृद्धि और रावण की महत्ता को दर्शाता है। किन्तु यह ऐश्वर्य उसके अहंकार का ही परिणाम था।
🎯 शिक्षा : इस सर्ग से हमें सीख मिलती है कि कार्य के प्रति समर्पित व्यक्ति कैसे आकर्षणों और अवसरों के बावजूद अपने मार्ग पर अटल रहता है। हनुमान् ने रावण के ऐश्वर्य और रूप-यौवन से मोहित हुए बिना, केवल अपने कर्तव्य का पालन किया। हमें भी जीवन में लक्ष्य से विचलित नहीं होना चाहिए।
सर्ग के पावन श्लोक (मूल पाठ व अर्थ)
नीचे महर्षि वाल्मीकि रचित इस सर्ग के सभी श्लोक, उनके मूल देवनागरी छंद, सरल हिंदी अनुवाद एवं व्याख्या सहित प्रस्तुत किए गए हैं।
इस सर्ग के श्लोक वर्तमान में अद्यतन किए जा रहे हैं। कृपया कुछ समय पश्चात देखें।
आचार्य रामानन्द त्रिपाठी
संस्कृत वाङ्मय एवं वाल्मीकि रामायण के शोधार्थी। संदर्भ-आधारित एवं प्रामाणिक ग्रंथों के अध्ययन का २०+ वर्षों का अनुभव।
महंत रामशरण दास
अयोध्या वेद पीठ के वयोवृद्ध धर्माचार्य। उपलब्ध शास्त्रीय संदर्भों के आधार पर सामग्री का अंतिम प्रमाणीकरण।