सर्ग का संक्षिप्त परिचय एवं प्रसंग
प्रसंग सार संक्षेप
हनुमान पाताल में प्रवेश करते हैं, अहिरावण का वध करते हैं और राम-लक्ष्मण को मुक्त कराकर वापस लाते हैं।
सर्ग की विस्तृत पृष्ठभूमि
आध्यात्मिक व्याख्या एवं कथा
(हनुमान् द्वारा अहिरावण का वध)
🔆 प्रस्तावना : अहिरावण ने राम-लक्ष्मण का हरण कर पाताल ले जाकर उनकी बलि देने की तैयारी की। हनुमान ने विभीषण के साथ पाताल में प्रवेश किया और अहिरावण का वध कर दोनों भाइयों को मुक्त कराया। यह सर्ग उस अद्वितीय पराक्रम का वर्णन करता है।
🌍 पाताल प्रवेश (श्लोक १-१०)
पातालं प्रययौ वीरो रामलक्ष्मणकारणात् ॥
ददर्श तत्र राक्षस्यो राक्षसांश्च सहस्रशः ।
प्रविश्य नगरं तस्य अहिरावणरक्षसः ॥
बद्धौ राक्षसराजेन अहिरावणेन धीमता ॥
⚔️ अहिरावण का वध (श्लोक ११-२५)
मुञ्च एनौ महाबाहो नो चेत् त्वां नाशयाम्यहम् ॥
अहिरावणस्तु तच्छ्रुत्वा हनूमन्तमथाब्रवीत् ।
कस्त्वं वानररूपेण मम राज्ये प्रविष्टवान् ॥
विभीषणसहायोऽहं त्वां हनिष्यामि संयुगे ॥
ततः प्रवृत्तं तुमुलं युद्धं हनूमदाहवे ।
हनूमान् राक्षसं हत्वा रामलक्ष्मणमानयत् ॥
🎉 वापसी और हर्ष (श्लोक २६-४४)
हनूमन् कृतकार्यस्त्वं मम प्रियमुपागतः ॥
वरं वृणीष्व भद्रं ते यथेष्टं कुरु सत्वरम् ॥
भवत्प्रसादादेवाहं सर्वं प्राप्नोमि राघव ॥
इत्येष षट्पञ्चाशः सर्गो युद्धकाण्डतः ।
अहिरावणवधो यत्र हनूमत्पराक्रमः ॥
🔍 सर्ग का गूढ़ार्थ एवं विशेष महत्त्व
🦍 हनुमान की भक्ति
हनुमान ने अपने प्रभु के लिए पाताल जाकर अहिरावण का वध किया, जो उनकी अनन्य भक्ति और निष्ठा का प्रतीक है।
🙏 राम का आशीर्वाद
राम ने हनुमान को वरदान देने की इच्छा व्यक्त की, जो उनके प्रति उनके स्नेह को दर्शाता है।
🎯 शिक्षा : सच्ची भक्ति और निष्ठा से कोई भी असंभव कार्य संभव हो जाता है।
सर्ग के पावन श्लोक (मूल पाठ व अर्थ)
नीचे महर्षि वाल्मीकि रचित इस सर्ग के सभी श्लोक, उनके मूल देवनागरी छंद, सरल हिंदी अनुवाद एवं व्याख्या सहित प्रस्तुत किए गए हैं।
इस सर्ग के श्लोक वर्तमान में अद्यतन किए जा रहे हैं। कृपया कुछ समय पश्चात देखें।
आचार्य रामानन्द त्रिपाठी
संस्कृत वाङ्मय एवं वाल्मीकि रामायण के शोधार्थी। संदर्भ-आधारित एवं प्रामाणिक ग्रंथों के अध्ययन का २०+ वर्षों का अनुभव।
महंत रामशरण दास
अयोध्या वेद पीठ के वयोवृद्ध धर्माचार्य। उपलब्ध शास्त्रीय संदर्भों के आधार पर सामग्री का अंतिम प्रमाणीकरण।