राम की कहानी – श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

नाना चित्राः कथाश्चान्या विश्वामित्रसहायने । जानक्याश्च विवाहं च धनुषश्च विभेदनम् ॥

हिंदी अनुवाद

विश्वामित्र की सहायता में अनेक प्रकार की विचित्र कथाएँ, जानकी का विवाह और धनुष का तोड़ना।

अर्थ / व्याख्या

यह श्लोक बालकाण्ड के तीसरे सर्ग (संक्षेप रामायण) का ग्यारहवाँ श्लोक है। इसमें उन घटनाओं का संकेत है जो विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा के दौरान घटित हुईं – अनेक विचित्र कथाएँ (जैसे गंगा का प्राकट्य, इत्यादि), फिर जानकी (सीता) का स्वयंवर और शिव-धनुष का भंग। ये सभी घटनाएँ राम के बाल-चरित्र के प्रमुख अंश हैं।

टिप्पणी

इस श्लोक में वर्णित "विश्वामित्रसहायने" का तात्पर्य है – जब विश्वामित्र राम-लक्ष्मण को अपने आश्रम ले गए, वहाँ उन्होंने यज्ञ की रक्षा की, राक्षसों का वध किया, और मार्ग में अनेक आख्यान सुनाए। "जानक्याश्च विवाह" एवं "धनुषो विभेदन" सीता-स्वयंवर की ओर संकेत करते हैं, जहाँ राम ने शिव-धनुष को तोड़ा था।

॥ श्री रामायण – बालकाण्ड – सर्ग ३ – श्लोक ११ ॥

नाना चित्राः कथाश्चान्या विश्वामित्रसहायने ।
जानक्याश्च विवाहं च धनुषश्च विभेदनम् ॥
nānā citrāḥ kathāścānyā viśvāmitrasahāyane |
jānakyāśca vivāhaṃ ca dhanuṣaśca vibhedanam ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : विश्वामित्र की सहायता में अनेक प्रकार की विचित्र कथाएँ, जानकी का विवाह और धनुष का तोड़ना।

🔹 English Translation : Various wonderful stories in assisting Vishvamitra, the marriage of Janaki, and the breaking of the bow.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृत पदव्याकरणहिन्दी अर्थEnglish Meaning
नानाविशेषण (adj.)अनेकvarious, many
चित्राःस्त्रीलिंग, प्रथमा बहुवचनविचित्र, अद्भुतwonderful, amazing
कथाःस्त्रीलिंग, प्रथमा बहुवचनकथाएँstories, narratives
चअव्ययऔरand
अन्यास्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचनअन्य, दूसरीother
विश्वामित्रसहायनेसप्तमी एकवचनविश्वामित्र की सहायता मेंin the assistance of Vishvamitra
जानक्याःषष्ठी एकवचनजानकी (सीता) काof Janaki (Sita)
चअव्ययऔरand
विवाहम्पुल्लिंग, द्वितीया एकवचनविवाहmarriage
चअव्ययऔरand
धनुषःषष्ठी एकवचनधनुष काof the bow
चअव्ययऔरand
विभेदनम्नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनतोड़ना, भंग करनाbreaking, shattering

📜 श्लोक का अर्थ एवं महत्व

यह श्लोक उन घटनाओं की ओर संकेत करता है जो विश्वामित्र के साथ राम के जीवन में घटित हुईं। विश्वामित्र ने राम और लक्ष्मण को अपने यज्ञ की रक्षा के लिए आमंत्रित किया। इस दौरान उन्होंने अनेक पौराणिक कथाएँ सुनाईं, जैसे गंगा का जन्म, इत्यादि। यह "नाना चित्राः कथाः" का भाव है। तत्पश्चात् वे मिथिला गए, जहाँ राजा जनक द्वारा आयोजित स्वयंवर में शिव-धनुष को तोड़कर राम ने सीता को प्राप्त किया। यह "जानकीविवाह" और "धनुषभंग" है। यह श्लोक राम के बाल-चरित्र के दो प्रमुख अध्यायों को संक्षेप में प्रस्तुत करता है।

📖 व्याकरणिक एवं साहित्यिक पक्ष

इस श्लोक में अनुष्टुप् छंद है। "च" का तीन बार प्रयोग (कथाश्च, जानक्याश्च, धनुषश्च) समुच्चयालंकार को दर्शाता है। "विभेदनम्" शब्द धनुष के भंग की क्रिया को व्यक्त करता है, जो आगे चलकर रावण-वध का प्रतीक बनता है।

🕉️ आध्यात्मिक संदेश

यह श्लोक हमें सिखाता है कि सत्संग (विश्वामित्र जैसे ऋषि का साहचर्य) से अनेक विचित्र एवं ज्ञानवर्धक कथाओं का श्रवण होता है, और अंततः धर्म की स्थापना (धनुषभंग द्वारा असत्य के विनाश) होती है। राम का धनुष तोड़ना केवल शारीरिक बल का प्रदर्शन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक है।

॥ रामो विग्रहवान् धर्मः – राम स्वयं धर्म के मूर्तिमान स्वरूप हैं ॥